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Ground Zero Review: संसद हमले की इनसाइड स्टोरी, असली कहानी पर फिल्मी ड्रामा

'ग्राउंड जीरो' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। अगर आप भी फिल्म देखने से पहले इसका रिव्यू पढ़ना चाहते हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। आइए जानते हैं कि आखिर कैसी है इमरान हाशमी की ये फिल्म?

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Navin Singh Bhardwaj,

‘कश्मीर है पता नहीं कब मौसम बदल जाए’, इस बात से तो फिलहाल इत्तेफाक आप भी रखते होंगे। देश में जहां आतंकवाद के हमले से उथल-पुथल मची है। वहीं देश की जनता भी कश्मीर में हुए इस आतंकवाद की वजह से आक्रोश में है। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे ही कई आतंकवादी हमले पर काफी फिल्में भी बन चुकी हैं और ये वो जरिया होता है जिससे ऑडियंस हमले और विजयप्राप्ति पर पूरी जानकारी ले सकें।

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फिल्म ‘ग्राउंड जीरो’

हमारा देश भारत और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बीच के संबंध शुरू से ही ठीक नहीं रहे हैं। चाहे वो 1965 की जंग हो या 1999 का कारगिल वॉर… साल 2001 में ससंद पर हुए आतंकवादी हमले के बाद पड़ोसी मुल्क से रिश्ते और खट्टे हो गए। आतंकवाद पर बनी फिल्में ऑडियंस को पसंद आती है और यही वजह है कि बॉलीवुड में देशभक्ति और असल जिंदगी पर फिल्में बनती हैं। इस बीच अब ऐसी ही एक फिल्म रिलीज हुई है, जिसका नाम है ‘ग्राउंड जीरो’।

फिल्म की कहानी

‘ग्राउंड जीरो’ की कहानी की बात करें तो शुरुआत साल 2001 से होती है, जहां भारत-पाक सीमा पर माहौल ठीक नहीं चल रहे थे। उस वक्त बीएसएफ के नौजवान नरेंद्र नाथ धर दूबे (इमरान हाशमी) के निगरानी में कश्मीर की वादियां थीं। जैश-ए-मोहम्मद और गाजी बाबा के आतंकी हमले मानो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। गुजरात का अक्षरधाम आतंकी हमला हो या संसद अटैक… इन सारे हमले के मास्टरमाइंड गाजी बाबा को धर दबोचने के लिए नरेंद्र अपने ऊपर के ऑफिसर्स के खिलाफ भी जाने लगे थे। इतिहास के पन्नों में ये लिखा जा चुका है कि गोलियां खाने के बाद भी नरेंद्र नाथ धर दुबे ने गाजी को दबोचने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जी हां, इस फिल्म की कहानी दुबे की असल जिंदगी पर आधारित है, उनकी इस साहस को जानने के लिए आप थिएटर का रुख करना होगा।

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डायरेक्शन राइटिंग और म्यूजिक

फिल्म ‘ग्राउंड जीरो’ को डायरेक्ट किया है डायरेक्टर तेजस प्रभा विजय देऊरकर ने और इसका लेखन सचिन गुप्ता और प्रियदर्शी श्रीवास्तव ने किया है। डायरेक्शन के मामले में विजय ने बढ़िया काम किया है। फिल्म में भर-भर के आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ दिखाया गया है, जो लाजमी भी है और अच्छे से प्रदर्शित भी हुआ है। फिल्म का स्क्रीनप्ले भी बढ़िया है।

कुर्सी से बांधे रखेगा 1st हाफ

एक्शन सीक्वेंस के दौरान का बैकग्रॉड स्कोर अप टू द मार्क है, जिसका श्रेय जॉन स्ट्युअर्ट एडुरी को जाता है। फिल्म में कई गाने हैं जो ज्यादा जहन में घर नहीं कर पाए लेकिन फिल्म के सीन के दौरान थोड़ इमोशनल कर गए। तनीष बागची, रोहन रोहन, इरशाद कामिल, रश्मि विर्ग और सनी इंदर ने इस फिल्म में कई गाने दिए हैं। अब बात करते हैं पूरी फिल्म की तो इसका 1st हाफ से ही पेस पर है और आपको अपनी कुर्सी से बांधे रखेगा। कई ऐसे भी शॉट्स हैं जिसे देखकर दिल भी दहलेगा और आखिरकार आपको देश और बीएसएफ के जवान नरेंद्र नाथ धर दुबे पर नाज होगा।

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एक्टिंग

फिल्म में मुख्य तौर पर इमरान हाशमी को फ्रंट सीट पर बैठाया गया है। ये फिल्म एक रियल लाइफ पर बनी है, तो ये लाजमी भी है। इमरान यानी नरेंद्र नाथ धार दुबे की बीवी की भूमिका में सई ताम्हणकर नजर आई हैं जो जब भी जितने भी वक्त दिखी छा गईं। इसके अलावा बाकी एक्टर्स जैसे जोया हुसैन, मुकेश तिवारी, दीपक परामेश, ललित प्रभाकर, रॉकी रैना और राहुल वोरा ने भी फिल्म में अच्छा काम किया है।

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फाइनल वर्डिक्ट

फिलहाल देशभक्ति फिल्मों का दौर चल रहा है और इन फिल्मों को पसंद भी किया जा रहा है। ‘ग्राउंड जीरो’ देश के असल हीरो नरेंद्र नाथ धर दुबे की कहानी है जिसे देखा जाना चाहिए। फिल्म ‘ग्राउंड जीरो’ को 3.5 स्टार

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First published on: Apr 25, 2025 12:20 PM

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