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विवादों से घिरे एआर रहमान ने मारी बाजी, आलोचनाओं के बीच हासिल की बड़ी कामयाबी

पिछले कुछ दिनों से एआर रहमान एक बयान को लेकर काफी सुर्खियों में थे. रहमान के इस बयान को बॉलीवुड के लिए अपमानजनक बताया गया. विवादों के इस माहौल के बीच उन्होंने एक बड़ी कामयाबी हासिल कर नई चर्चा छेड़ दी है. आइए जानते हैं इसके बारे में

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ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने विवादों के बीच एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है. उन्होंने वैंकूवर के डोम में अपनी इमर्सिव फिल्म ‘ले मस्क’ पेश कर एक नया इतिहास रच दिया. खास बात यह है कि वे 360 डिग्री डोम फॉर्मेट में फिल्म प्रदर्शित करने वाले पहले भारतीय कलाकार बन गए है. यह फिल्म उनके निर्देशन में बनी पहली परियोजना है, जिसे दर्शकों को अनोखा और पूरी तरह घेर लेने वाला सिनेमाई अनुभव देने के लिए खास तौर पर तैयार किया गया है.

फिल्म ‘ले मस्क’ वर्चुअल रियलिटी थ्रिलर फिल्म है जो साल 2017 में बनाई गई थी. और इस फिल्म को लिखा भी उन्होंने ही था. हाल ही में ‘ले मस्क’ की ग्रैंड स्क्रीनिंग वैंकूवर में हुई. दर्शकों से इसे जबर्दस्त रिस्पॉन्स भी मिला. इसके दो शो हाउसफुल भी रहे. इस प्रेजेंटेशन में रहमान के इमर्सिव मीडिया और एक्सपीरिएंशियल स्टोरीटेलिंग में लगातार खोज को दिखाया गया हैं.

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‘दुनियाभर के दर्शकों तक पहुंचाऊंगा अनुभव’-रहमान

‘ले मस्क’ एक अंग्रेजी भाषा की इमर्सिव फिल्म है, जिसे सबसे पहले कान XR फोरम में पेश किया गया था. इसके बाद यह सिंगापुर, टोरंटो और लॉस एंजिल्स जैसे शहरों में भी प्रदर्शित की जा चुकी है, जहां तकनीक के अनोखे इस्तेमाल और गहरे सेंसरी अनुभव के कारण इसने खास ध्यान खींचा.

इस प्रोजेक्ट और गाला शोकेस पर बात करते हुए ए.आर. रहमान ने कहा, ‘‘ले मस्क’ मेरे लिए एक पैशन प्रोजेक्ट है. यह कहानी कहने के नए तरीकों को तलाशने और अपने नैरेटिव स्टाइल को ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश है. डोम इमर्सिव फॉर्मेट की संभावनाएं मुझे बेहद रोमांचित करती हैं, और उम्मीद है कि इस अनुभव को दुनिया भर के लोगों तक ले जा सकूं’

‘डोम फॉर्मेट’ क्या है

बता दें कि इस खास फॉर्मेट में 360 डिग्री इमर्सिव सिनेमा का अनुभव कराया जाता है. पारंपरिक स्क्रीन की जगह फिल्म को एक गोलाकार डोम थिएटर में दिखाया जाता है, जहां दर्शक खुद को कहानी का हिस्सा महसूस करते हैं. यहां सिर्फ देखने और सुनने ही नहीं, बल्कि सुगंध जैसे सेंसरी एलिमेंट्स का भी अनुभव कराया जाता है. फिल्म ‘ले मस्क’ में 4K रेजोल्यूशन, 60 फ्रेम्स प्रति सेकेंड और 3डी तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे सिनेमा का अनुभव बेहद वास्तविक और जीवंत बन जाता है.

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First published on: Feb 04, 2026 09:22 PM

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