Nana Patekar’s Famous Dialogues: बॉलीवुड के सबसे सम्मानित एक्टर्स में से एक नाना पाटेकर अब हमारे बीच में नहीं रहे. 8 अक्तूबर 2026 को गोवा में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. नाना पाटेकर की दमदार आवाज और खास डायलॉग डिलीवरी ने कई फिल्मों के संवादों को यादगार बना दिया, येी वजह है कि उनकी अदाकारी अपने आप में हटके नजर आती थी. आइए उनके 20 सबसे एपिक डायलॉग के बारे में बताने जा रहे हैं. इनमें क्रांतिवीर, तिरंगा, यशवंत, परिंदा, गुलाम-ए-मुस्तफा, अब तक छप्पन, वेलकम जैसी फिल्मों के फेमस डायलॉल्स शामिल हैं.
नाना पाटेकर के 25 एपिक डायलॉग्स
- ‘साला एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है.’ – यशवंत (1997)
- ‘अपना तो उसूल है… पहले लात, फिर बात, उसके बाद मुलाकात.’ – तिरंगा (1993)
- ‘आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने.’ – क्रांतिवीर (1994)
- ‘साले अपने खुद के देश में एक सुई नहीं बना सकते और हमारा देश तोड़ने का सपना देखते हैं.’ – क्रांतिवीर (1994)
- ‘ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून, बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा?’ – क्रांतिवीर (1994)
- ‘ऊपर वाला जब ऊपर से देखता होगा तो उसे भी शर्म आती होगी, मैंने सबसे खूबसूरत चीज बनाई थी, इंसान… नीचे देखा तो सब कीड़े बन गए.’ – क्रांतिवीर (1994)
- ‘धर्म के नाम पर ये तुम्हें बहकाते हैं, तुम एक-दूसरे के गले काट रहे हो.’ – क्रांतिवीर (1994)
- ‘कुत्ते की तरह जीने की आदत पड़ी है सबको.’ – क्रांतिवीर (1994)
- ‘हम भले ही ऊपर वाले को अलग-अलग नाम से पुकारते हैं, लेकिन हमारा धर्म एक है, मजहब एक है.’ – क्रांतिवीर (1994)
- ‘अपना तो उसूल है, पहले लात, फिर बात.’ – तिरंगा (1993)
- ‘मरता मरता है, ये मारता है.’ – तिरंगा (1993)
- ‘ये तो लाल मिर्च है, तीखी-तीखी. हाथ लगाओ तो हाथ जले, मुंह लगाओ तो मुंह जले, दिल लगाओ तो दिल जले.’ – तिरंगा (1993)
- ‘तुझे ऐसी मौत मारूंगा कि तेरी पापी आत्मा अगले 7 जन्म तक कांप उठेगी.’ – तिरंगा (1993)
- ‘धंधे में कोई किसी का भाई नहीं, कोई किसी का बेटा नहीं.’ – परिंदा (1989)
- ‘सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा देश महान.’ – गुलाम-ए-मुस्तफा (1997)
- ‘जान मत मांगना… इसकी बाजार में कोई कीमत नहीं है.’ – गुलाम-ए-मुस्तफा (1997)
- ‘बेहतर है तू अपना इरादा बदल दे, नहीं तो मैं तेरा नक्शा बदल दूंगा.’ – गुलाम-ए-मुस्तफा (1997)
- ‘मौत से बढ़कर कोई दोस्त नहीं है, हमेशा मेरे साथ चलती है.’ – गुलाम-ए-मुस्तफा (1997)
- ‘हम सब सिस्टम का हिस्सा हैं, सिस्टम डिसाइड करता है, अपुन फॉलो करता है.’ – अब तक छप्पन (2004)
- ‘तुम लोग सोसायटी का कचरा है, मैं सोसायटी का जमादार.’ – अब तक छप्पन (2004)
- ‘ये शरीफ लोग बहुत बदमाश होते हैं, शराफत की जुबान नहीं समझते हैं.’ – वेलकम (2007)
- ‘भगवान का दिया हुआ सब कुछ है, दौलत है, शोहरत है, इज्जत है.’ – वेलकम (2007)
- ‘ये मुंबई है, येां हर चीज दिखाई देती है, छुपाई नहीं जाती.’ – यशवंत (1997)
- ‘ये मेरा पसीना नहीं, मेरा खून है जो पानी बनकर बहता है मेरे बदन से.’ – यशवंत (1997)
- ‘कौन सा कानून, कैसा कानून, ये कानून तो चंद मुजरिमों की रखैल बन बैठा है.’ – यशवंत (1997)
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