Pehla Pyaar Doosri Baar Review: पहली मोहब्बत की यादें, स्कूल के पुराने दोस्त और अधूरी रह गई दिल की बातें… क्या वक्त बीतने के बाद प्यार को दूसरा मौका मिल सकता है? लव रंजन और अंकुर गर्ग के प्रोडक्शन में बनी ‘पहला प्यार दूसरी बार’ इसी सवाल के साथ रोमांस, कॉमेडी और दोस्ती की दुनिया में ले जाती है. फिल्म में नए कलाकारों की टोली है जिनकी ताजगी, मजेदार संवाद और रिश्तों की उलझनें कहानी को दिलचस्प बनाती हैं. हालांकि, कुछ जगहों पर कहानी और बेहतर हो सकती थी, लेकिन कुल मिलाकर यह एक मनोरंजक रोमांटिक कॉमेडी है.
क्या है फिल्म की कहानी?
अनुज सैनी के निर्देशन में बनी यह फिल्म तीन पुराने दोस्तों की कहानी है, जो स्कूल खत्म होने के करीब 10 साल बाद फिर मिलते हैं. तीनों की जिंदगी में प्यार को लेकर कई अधूरी कहानियां हैं. स्कूल के दिनों में जिन लोगों को दिल दे बैठे थे, उनसे दोबारा मिलने और अपने दिल की बात कहने की उम्मीद उन्हें एक रीयूनियन तक ले आती है. लेकिन पुरानी यादों को फिर से जीना इतना आसान नहीं होता. वक्त के साथ लोग बदल जाते हैं, रिश्तों के मायने बदल जाते हैं और पहली मोहब्बत को दोबारा पाने की कोशिश कई अजीब परिस्थितियों को जन्म देती है. फिल्म इसी सफर में दोस्ती, आकर्षण, गलतफहमियों और रिश्तों की पेचीदगियों को सामने लाती है.
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका हल्का-फुल्का अंदाज और डायलॉग्स हैं. लव रंजन की फिल्मों में रिश्तों की नोकझोंक और बातचीत से पैदा होने वाली कॉमेडी हमेशा से अहम रही है. यहां भी कई मजेदार पंचलाइन ऐसी हैं. युवाओं के रिश्तों, उनकी उम्मीदों और कन्फ्यूजन को फिल्म बेहतर तरह से पेश करती है.
दोस्ती फिल्म का मजबूत पक्ष है. तीनों दोस्तों की आपसी केमिस्ट्री, एक-दूसरे की टांग खींचना और मुश्किल वक्त में साथ खड़े रहना स्टोरी को इमोशनल बनाते हैं. साथ ही फिल्म यह भी दिखाती है कि प्यार की तलाश में इंसान कई बार अपने आसपास मौजूद रिश्तों की अहमियत भूल जाता है.
हालांकि, फिल्म की कहानी हर जगह एक जैसी रफ्तार नहीं पकड़ पाती. कुछ रोमांटिक ट्रैक और सीक्वंस बेहतर हो सकते थे. पुराने क्रश के साथ दोबारा रिश्ता बनाने की कोशिश को लेकर कुछ जगहों पर इमोशनल गहराई की कमी भी महसूस होती है लेकिन इसके बावजूद, फिल्म में मनोरंजन के अच्छे पल हैं और इसका हल्का-फुल्का ट्रीटमेंट दर्शकों को जोड़े रखता है.
एक्टिंग में किसने मारी बाजी?
स्पर्श वालिया, कुनाल वैद, साक्षी वैद्य, अलीशा चोपड़ा, सर्गुन कौर लूथरा और तुषार छिब्बर जैसे कलाकार फिल्म में ताजगी लेकर आते हैं. नए कलाकारों के तौर पर सभी ने अपने किरदारों को सहजता से निभाया है.
स्पर्श वालिया अपनी स्क्रीन प्रेजेंस और कॉमिक अंदाज से प्रभावित करते हैं. कुनाल वैद भी अपने किरदार में अच्छी ऊर्जा लेकर आते हैं और उनका अभिनय खासतौर पर ध्यान खींचता है. सर्गुन कौर लूथरा अपने आत्मविश्वास और सहजता से कहानी में रंग भरती हैं.
फिल्म की कास्ट की सबसे अच्छी बात यह है कि कलाकारों के बीच दोस्ती और बातचीत के दृश्य स्वाभाविक लगते हैं. हालांकि, कुछ किरदारों को और गहराई मिलती तो उनके रोमांटिक सफर से जुड़ाव बढ़ सकता था.
फिल्म का म्यूजिक इसकी रोमांटिक फील को बेहतर बनाता है. गाने कहानी के मूड के साथ चलते हैं और पुरानी यादों, दोस्ती और प्यार के पलों को खूबसूरती से उभारते हैं. म्यूजिक फिल्म के यूथ स्टाइल अंदाज को और भी गहराई से जोड़ने का काम करता है.
डायरेक्टर अनुज सैनी ने रोमांस, दोस्ती और कॉमेडी को एक साथ पिरोने की कोशिश की है. फिल्म का क्लाइमैक्स कहानी के इमोशनल एंगल को समेटते हुए संतोषजनक अंत देता है.
अगर आपको हल्की-फुल्की रोमांटिक कॉमेडी, मजेदार डायलॉग्स, कहानियां और पहली मोहब्बत की यादें पसंद हैं, तो पहला प्यार दूसरी बार आपको पसंद आ सकती है. फिल्म की कुछ कमियों के बावजूद नए कलाकारों की ताजगी, कॉमेडी और म्यूजिक इसे एक बार देखने लायक बनाते हैं.