महाराष्ट्र में बढ़ते साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस ने अब सिर्फ शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क पर सीधा प्रहार शुरू कर दिया है. ‘ऑपरेशन 1930-साइबर सेफ्टी’ के तहत राज्यभर में अब तक 803 FIR दर्ज की जा चुकी हैं. पुलिस की कार्रवाई में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता लगाने के साथ बड़ी रकम को समय रहते फ्रीज किया गया है.

महाराष्ट्र साइबर के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले मनी म्यूल अकाउंट, फर्जी ATM और चेक निकासी, संदिग्ध SIM कार्ड और साइबर अपराध में मदद करने वाले PoS विक्रेताओं की पहचान कर पूरे नेटवर्क को तोड़ना है.

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2,717 मनी म्यूल अकाउंट की पहचान

डेटा एनालिसिस के दौरान 57 बैंकों में 2,717 Layer-1 मनी म्यूल अकाउंट सामने आए हैं. इन खातों से करीब 12.57 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन जुड़े पाए गए. इसी तरह चेक के जरिए रकम निकालने से जुड़े 3,597 बैंक अकाउंट की पहचान हुई है. इन खातों में करीब 89.30 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता चला है और इनका लिंक 2,171 बैंक शाखाओं से सामने आया है.

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फर्जी ATM निकासी के मामले में भी पुलिस ने बड़ी संख्या में संदिग्ध खातों और ATM की पहचान की है. जांच में 17,014 अकाउंट और 10,075 ATM IDs सामने आए हैं. इनसे जुड़े मामलों में करीब 70.14 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का पता चला है.

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5,684 संदिग्ध SIM कार्ड भी रडार पर

साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबरों की जांच के दौरान 5,684 संदिग्ध SIM कार्ड चिन्हित किए गए हैं. ये SIM कार्ड 7,312 साइबर क्राइम शिकायतों से जुड़े पाए गए हैं.

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महाराष्ट्र साइबर पुलिस के मुताबिक, इंटेलिजेंस इनपुट, डेटा एनालिसिस और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर इन मामलों में कार्रवाई की गई और अब तक 803 FIR दर्ज की जा चुकी हैं. पुलिस का कहना है कि यह अभियान केवल पीड़ितों की शिकायतों पर निर्भर नहीं है, बल्कि संदिग्ध नेटवर्क की पहचान कर उसे पहले ही तोड़ने पर जोर दिया जा रहा है.

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E-Zero FIR से शिकायत दर्ज करना आसान

साइबर फ्रॉड के मामलों में FIR दर्ज करने की प्रक्रिया को भी तेज किया गया है. महाराष्ट्र में 10 जुलाई 2026 से E-Zero FIR सिस्टम लागू किया गया है.

नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 5 लाख रुपये से ज्यादा के वित्तीय फ्रॉड की शिकायत मिलने पर उसे ऑटोमेटिक तरीके से E-Zero FIR में बदला जाता है और संबंधित पुलिस यूनिट को भेजा जाता है. इसके बाद पीड़ित को 72 घंटे के भीतर संबंधित पुलिस स्टेशन पहुंचकर E-FIR पर हस्ताक्षर करने होते हैं.

1930 हेल्पलाइन पर रोजाना 8 से 10 हजार कॉल

साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद अहम माने जाते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र की 1930 साइबर हेल्पलाइन को सक्रिय रखा गया है. पुलिस के मुताबिक, इस हेल्पलाइन पर रोजाना करीब 8 से 10 हजार कॉल आ रही हैं और सभी कॉल रिसीव की जा रही हैं.

साल 2026 के शुरुआती सात महीनों में महाराष्ट्र में 2 लाख से ज्यादा साइबर क्राइम शिकायतों पर कार्रवाई की गई. पुलिस के मुताबिक, समय रहते संदिग्ध रकम को फ्रीज कर करीब 514.36 करोड़ रुपये बचाए गए हैं. दावा है कि अब तक नागरिकों की 1,700 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम सुरक्षित की जा चुकी है।

सिर्फ रकम फ्रीज नहीं, पीड़ितों को पैसा लौटाने पर भी जोर

साइबर फ्रॉड के बाद बैंक अकाउंट फ्रीज या लियन मार्क होने से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए Grievance Redressal Module (GRM) भी चलाया जा रहा है. इसके जरिए अब तक 5,800 से ज्यादा शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है. वहीं, साइबर ठगी के पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाने के लिए Money Restoration Module (MRM) के जरिए प्रक्रिया को तेज किया गया है. महाराष्ट्र साइबर के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से अब तक करीब 25.46 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस किए जा चुके हैं.

इस व्यवस्था के तहत प्रति बैंक अकाउंट 2.5 लाख रुपये तक की रकम कोर्ट के आदेश के बिना वापस करने की सुविधा उपलब्ध है.

महाराष्ट्र साइबर का कहना है कि साइबर अपराध के खिलाफ रणनीति अब सिर्फ ठगी के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है. डेटा, इंटेलिजेंस और फील्ड इनपुट के जरिए उन खातों, नंबरों और नेटवर्क की पहचान की जा रही है, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जा सकता है. यानी पुलिस का फोकस अब ‘फ्रॉड होने के बाद कार्रवाई’ से आगे बढ़कर ‘फ्रॉड के नेटवर्क पर पहले ही वार’ करने पर है.