H-1B Visa Rules: ग्रीन कार्ड आवेदकों को बड़ी राहत! USCIS का नया यू-टर्न; अब देश छोड़े बिना अमेरिका में रह सकेंगे भारतीय पेशेवर

H-1B Visa & Green Card Rules 2026:अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड (Green Card) का इंतजार कर रहे लाखों भारतीय पेशेवरों और एच-1बी (H-1B) वीजा धारकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी नागरिकता और अप्रवासन सेवा (USCIS) ने हाल ही में पैदा हुए एक बड़े भ्रम को दूर करते हुए साफ किया है कि योग्य एच-1बी वर्कर्स को ग्रीन कार्ड आवेदन के दौरान अमेरिका छोड़ने की जरूरत नहीं होगी।

H-1B Visa Rules.jpg

H-1B वीजा को लेकर क्‍या हैं नए अपडेट, यहां जानें

विज्ञापन

अमेरिका में नौकरी कर रहे विदेशी पेशेवरों, विशेष रूप से भारतीय आईटी एक्सपर्ट्स के लिए राहत की खबर है। अमेरिकी अप्रवासन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई विदेशी पेशेवर यह साबित कर देता है कि उसका काम अमेरिकी अर्थव्यवस्था (US Economy) को लाभ पहुँचाता है या देश के राष्ट्रीय हित में है, तो उसे स्थायी निवास (Permanent Residency/Green Card) की प्रक्रिया के दौरान अमेरिका छोड़ने की आवश्यकता नहीं होगी।

यह स्पष्टीकरण USCIS की उस हालिया नीति व्याख्या (Policy Interpretation) के बाद आया है, जिसने पूरी दुनिया के टेक वर्कर्स में खलबली मचा दी थी। उस नीति में सुझाव दिया गया था कि ग्रीन कार्ड चाहने वाले अस्थाई वीजा धारकों को अपने गृह देश (जैसे भारत) वापस जाकर दूतावास के जरिए इस प्रक्रिया को पूरा करना होगा।

विज्ञापन

आखिर क्यों पैदा हुआ था भ्रम और डर का माहौल?

इस पूरे विवाद की शुरुआत इस महीने की शुरुआत में जारी USCIS के एक नीति ज्ञापन (Policy Memorandum) से हुई थी, जिसने स्टेटस एडजस्टमेंट (Adjustment of Status – Form I-485) के नियमों को बदल दिया था। अब तक Form I-485 के जरिए अस्थाई वीजा धारक अमेरिका में रहते हुए ही अपने स्टेटस को स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड होल्डर) में बदलवा लेते थे।

नई व्याख्या में ट्रंप प्रशासन के तहत काम कर रहे USCIS ने कहा कि ‘स्टेटस एडजस्टमेंट’ को एक सामान्य अधिकार के बजाय एक ‘विवेकाधीन राहत’ (Discretionary Relief) के रूप में देखा जाना चाहिए। एजेंसी ने शुरू में कहा था कि जब तक कोई असाधारण स्थिति न हो, अस्थाई वीजा धारकों को ग्रीन कार्ड प्रोसेसिंग के लिए अपने देश लौट जाना चाहिए। इस भाषा ने विशेष रूप से भारतीय टेक प्रोफेशनल्स और टेक कंपनियों को डरा दिया था।

विज्ञापन

USCIS ने अब क्या दी सफाई? (कौन हैं सुरक्षित)

बढ़ते विरोध के बीच, USCIS के प्रवक्ता जैक काहलर (Zach Kahler) ने न्यूजवीक और सेमाफोर को दिए साक्षात्कारों में स्थिति साफ की। जो लोग अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं या जिनका काम राष्ट्रीय हित से जुड़ा है, उन्हें अमेरिका के भीतर से ही ग्रीन कार्ड आवेदन जारी रखने की अनुमति दी जाएगी।

हालांकि, अधिकारी हर मामले की व्यक्तिगत जांच करेंगे। कुछ आवेदकों को अभी भी विदेशी वाणिज्य दूतावासों (Consulates) के चक्कर काटने पड़ सकते हैं।

विज्ञापन

H-1B धारकों का पक्ष क्यों है मजबूत?

विशेषज्ञों के अनुसार, एच-1बी वीजा धारक अन्य श्रेणियों की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं क्योंकि इस वीजा को ‘दोहरा इरादा’ (Dual Intent) की कानूनी मान्यता प्राप्त है। इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति एच-1बी पर रहते हुए कानूनी तौर पर अस्थाई काम भी कर सकता है और साथ ही स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) की इच्छा भी रख सकता है।

USCIS ने माना कि ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना एच-1बी स्टेटस का उल्लंघन नहीं है। हालांकि, सिर्फ एच-1बी वीजा होना ही अमेरिका में रहने की गारंटी नहीं होगा; आव्रजन अधिकारियों के पास अब व्यापक विवेकाधीन शक्तियां होंगी।

विज्ञापन

भारतीयों के लिए क्यों बड़ा है यह मुद्दा?

अमेरिका में एच-1बी वीजा पाने वालों में सबसे बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की है, जो मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग और फाइनेंस सेक्टर में कार्यरत हैं। भारतीय पेशेवर EB-2 और EB-3 श्रेणियों के तहत ग्रीन कार्ड के लिए दशकों लंबे इंतजार का सामना कर रहे हैं।

विज्ञापन

यदि उन्हें प्रक्रिया के दौरान अमेरिका छोड़ने पर मजबूर किया जाता, तो उनके करियर, परिवार और बच्चों की शिक्षा पूरी तरह प्रभावित हो जाती।

भारत में अमेरिकी दूतावासों में वीजा अपॉइंटमेंट के लंबे इंतजार के कारण वे महीनों अपने नियोक्ताओं (Employers) और परिवार से दूर रहने पर मजबूर हो जाते।

विज्ञापन

छंटनी या नौकरी जाने की स्थिति में संकट और गहरा जाता।

विज्ञापन

नीति की आलोचना और कानूनी चुनौतियां

इस विवादास्पद नीतिगत बदलाव की चौतरफा आलोचना हो रही है। लिंक्डइन (LinkedIn) के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन ने इस कदम को तकनीकी कंपनियों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहद नुकसानदेह बताया है। वहीं, अप्रवासन वकील टॉड पोमेरलू ने इसके कानूनी वजूद पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कोई प्रशासनिक एजेंसी (USCIS) नीति बदलकर कांग्रेस द्वारा बनाए गए अप्रवासन कानूनों को ओवरराइड नहीं कर सकती। दूसरी तरफ, प्रशासन का तर्क है कि इसका उद्देश्य नियमों के दुरुपयोग को रोकना है।

विज्ञापन

भारतीय H-1B कर्मचारियों के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह:

आव्रजन वकीलों ने भारतीय पेशेवरों को अभी भी सतर्क रहने की सलाह दी है:

H-1B स्टेटस बनाए रखें: फॉर्म I-485 फाइल करने के बाद भी, जब तक संभव हो अपने एच-1बी वीजा को वैध (Valid) रखें।

विज्ञापन

दस्तावेज मजबूत करें: अपने काम की विशेषज्ञता, नियोक्ता के लिए अपनी उपयोगिता और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अपने योगदान के पुख्ता रिकॉर्ड तैयार रखें।

अपडेट्स पर नजर रखें: आने वाले हफ्तों में इस पर विस्तृत गाइडलाइंस आनी बाकी हैं, इसलिए किसी भी नोटिस का जवाब देने से पहले कानूनी सलाह जरूर लें।

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ