भारतीय रुपये के लिए 3 सितंबर का दिन बहुत शानदार रहा. डॉलर के मुकाबले रुपया 67 पैसे की बड़ी बढ़त बनाकर 94.30 पर पहुंच गया. जून के बाद से रुपये में एक दिन में आई यह सबसे बड़ी मजबूती है.
इस अचानक आई तेजी के पीछे की सबसे बड़ी वजह Reserve Bank of India (RBI) का वह आंकड़ा है, जिसने पूरे करेंसी मार्केट को हैरान कर दिया है. आइए समझते हैं कि रुपये में यह उछाल क्यों आया और इसका क्या मतलब है.
क्यों आई रुपये में इतनी बड़ी तेजी?
FCNR-B डिपॉजिट में उम्मीद से ज्यादा पैसा:
रुपये में इस बढ़त का मुख्य कारण FCNR-B (Foreign Currency Non-Resident Bank) डिपॉजिट के जरिए देश में आया विदेशी पैसा है. बाजार को उम्मीद थी कि लगभग $90 बिलियन डॉलर ही आएंगे, लेकिन RBI ने जानकारी दी कि देश में रिकॉर्ड 127 बिलियन डॉलर से ज्यादा का इनफ्लो आया है. अगर विदेशी कर्ज (ECB) को भी जोड़ दें तो यह आंकड़ा 136 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाता है.
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RBI की मजबूती और रणनीति:
बाजार के जानकारों का कहना है कि इतने भारी विदेशी फंड के आने से RBI के हाथ में बड़ी ताकत आ गई है. अब रिजर्व बैंक के पास अपना विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) बढ़ाने और रुपये को गिरने से रोकने का पर्याप्त फंड है.
डॉलर इंडेक्स में गिरावट:
जापानी येन (Yen) के मजबूत होने से ग्लोबल मार्केट में डॉलर इंडेक्स गिरा है, जिसका फायदा भारत सहित कई एशियाई मुद्राओं को मिला है.
क्या आगे भी बनी रहेगी यह मजबूती?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल रुपया 94.10 से 95.50 के दायरे में रहेगा. अगर रुपया 94.10 का स्तर तोड़ता है, तो यह 93.50 तक भी मजबूत हो सकता है. हालांकि, कुछ चिंताएं अभी भी बरकरार हैं, जैसे कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से कच्चा तेल $95 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है. अगर तेल और महंगा होता है, तो इससे रुपये पर दोबारा दबाव बन सकता है.