अगर आप सोच रहे हैं कि मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) की लड़ाई दूर-दराज का मामला है, तो थोड़ा ठहरिए. समुद्र में शुरू हुआ नया विवाद बहुत जल्द आपकी और हमारी रसोई के बजट से लेकर बाइक और कार के फ्यूल टैंक तक को प्रभावित कर सकता है. यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ आधिकारिक रूप से समुद्री नाकेबंदी (Maritime Blockade) का ऐलान कर दिया है.
इस कदम के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की वैश्विक सप्लाई चेन ठप होने का खतरा मंडराने लगा है. आइए, बिल्कुल आसान बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि आखिर लाल सागर में क्या चल रहा है और क्या भारत में सच में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस के दाम बढ़ने वाले हैं.
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लाल सागर में क्या हुआ और किसने की नाकेबंदी?
यमन के हूती विद्रोहियों का आरोप है कि सऊदी अरब ने उनके बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर रोक लगाई हुई है. इसी के जवाब में उन्होंने ईंट का जवाब पत्थर से (Eye for an eye) देने का हवाला देते हुए सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री जहाजों की नाकेबंदी करने का फैसला लिया है. बता दें कि यमन का यह रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में पहले से चल रही उथल-पुथल की वजह से सऊदी अरब अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा यानबू (Yanbu) बंदरगाह के रास्ते निर्यात कर रहा था. अब हूतियों की धमकी से इस मुख्य सप्लाई रूट पर सीधा खतरा आ गया है.
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कच्चे तेल पर क्यों गहराया संकट?
दुनिया भर का लगभग 12 से 15 फीसदी समुद्री व्यापार इसी लाल सागर और बाब-अल-मंडेब के रास्ते होता है. यहां से हर रोज 80 लाख से 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है. अगर हूती विद्रोही यहां से गुजरने वाले टैंकरों पर हमले करते हैं या जहाजों का रास्ता रोकते हैं, तो तेल की खेप को पूरा अफ्रीका घूमकर लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी. इससे शिपिंग का खर्च (Freight Cost) और बीमा (Insurance) का प्रीमियम अचानक बढ़ जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम तेजी से उछलेंगे.
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क्या भारत में महंगे होंगे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी?
भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल और भारी मात्रा में गैस दूसरे देशों से खरीदता है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के भाव बढ़ते हैं, तो भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) का खर्च बढ़ जाएगा. क्रूड और गैस महंगी होने पर देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों और कमर्शियल व घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
अगर आप सोच रहे हैं कि मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) की लड़ाई दूर-दराज का मामला है, तो थोड़ा ठहरिए. समुद्र में शुरू हुआ नया विवाद बहुत जल्द आपकी और हमारी रसोई के बजट से लेकर बाइक और कार के फ्यूल टैंक तक को प्रभावित कर सकता है. यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ आधिकारिक रूप से समुद्री नाकेबंदी (Maritime Blockade) का ऐलान कर दिया है.
इस कदम के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की वैश्विक सप्लाई चेन ठप होने का खतरा मंडराने लगा है. आइए, बिल्कुल आसान बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि आखिर लाल सागर में क्या चल रहा है और क्या भारत में सच में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस के दाम बढ़ने वाले हैं.
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दुनिया भर का लगभग 12 से 15 फीसदी समुद्री व्यापार इसी लाल सागर और बाब-अल-मंडेब के रास्ते होता है. यहां से हर रोज 80 लाख से 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है. अगर हूती विद्रोही यहां से गुजरने वाले टैंकरों पर हमले करते हैं या जहाजों का रास्ता रोकते हैं, तो तेल की खेप को पूरा अफ्रीका घूमकर लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी. इससे शिपिंग का खर्च (Freight Cost) और बीमा (Insurance) का प्रीमियम अचानक बढ़ जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम तेजी से उछलेंगे.
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क्या भारत में महंगे होंगे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी?
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