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बिजनेस

LPG Crisis: क्या 14.2 किलो के बदले अब मिलेगा सिर्फ 10 किलो गैस? सरकार ने द‍िया Update

क्या आपकी रसोई का बजट और सिलेंडर का वजन दोनों बदलने वाले हैं? ईरान युद्ध के बीच LPG की किल्लत ने सरकार की नींद उड़ा दी है। 14.2 किलो बनाम 10 किलो—सोशल मीडिया पर छिड़ी इस जंग का सच क्या है? क्या वाकई कम गैस देकर संकट टाला जाएगा? देखिए पेट्रोलियम मंत्रालय की सफाई और आज की सबसे बड़ी रिपोर्ट!

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Written By: Vandana Bharti Updated: Mar 24, 2026 12:32
अमेर‍िका ईरान युद्ध के बीच भारत में एलपीजी गैस स‍िलेंडर का संकट गहरा गया है

LPG Crisis Update: खाड़ी देशों (Middle East) में जारी संघर्ष का सीधा असर अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता दिख रहा है। कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) की निर्बाध आपूर्ति बाधित होने से देश में गैस के स्टॉक पर भारी दबाव है। इस संकट के बीच एक रिपोर्ट ने देशभर में चर्चा छेड़ दी है कि सरकार अब सिलेंडर में गैस की मात्रा घटाने पर विचार कर रही है। गैस की किल्लत और कम होते स्टॉक के बीच एक ऐसी खबर सोशल मीड‍िया पर वायरल हो रही है जिसने करोड़ों गृहणियों की चिंता बढ़ा दी है। क्या वाकई अब आपके रसोई गैस सिलेंडर का वजन कम होने वाला है? आइये जानते हैं क‍ि सरकार ने इसे लेकर क्‍या अपडेट द‍िए हैं:

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क्या है 10 किलो वाला नया प्लान?

मीडिया रिपोर्ट्स (ET) के मुताबिक, देश में गैस की कमी से निपटने के लिए एक प्रस्ताव पर चर्चा हुई कि 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर में गैस की मात्रा घटाकर 10 किलो कर दी जाए। इसके पीछे तर्क यह था कि कम गैस देने से मौजूदा स्टॉक को ज्यादा दिनों तक और ज्यादा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सकेगा।

सरकार ने क्या कहा?
जैसे ही यह खबर फैली, सरकार ने तुरंत इस पर सफाई दी। एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सिलेंडर का वजन घटाने का कोई विचार नहीं है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक बुकिंग न करें।

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क्यों बढ़ रहा है आयात पर दबाव?
भारत अपनी गैस जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है और युद्ध की वजह से शिपमेंट में देरी हो रही है। पिछले हफ्ते केवल 92,700 टन गैस भारत पहुंची, जो देश की सिर्फ एक दिन की खपत के बराबर है। कमर्शियल गैस की सप्लाई फिर से शुरू होने से घरेलू उपयोग के लिए उपलब्ध स्टॉक पर और बोझ बढ़ गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने भी स्वीकार किया है कि स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

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कंपनियों की क्या है चिंता?
गैस कंपनियों का मानना है कि अगर भविष्य में गैस की मात्रा घटाई गई, तो इससे उपभोक्ताओं में भारी भ्रम और विरोध पैदा हो सकता है। खासकर उन राज्यों में जहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, वहां यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। इसके अलावा, बॉटलिंग प्लांट्स के सिस्टम को बदलना और नए स्टिकर लगाना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी।

First published on: Mar 24, 2026 12:32 PM

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