Crude Oil Price: US-Iran तनाव से उछला कच्चा तेल; 2% की तेजी के साथ Brent Crude $96 के पार
ईरान पर अमेरिका के ताजा हमलों के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 2% तक बढ़ गई हैं। ब्रेंट क्रूड $96.19 प्रति बैरल पर पहुंचा, जानें तेजी की मुख्य वजहें।
इरान अमेरिका संघर्ष के बीच कच्चे तेल के दाम में इजाफा हुआ है
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर दिखने लगा है। ईरान में एक सैन्य ठिकाने पर अमेरिका द्वारा रातभर किए गए नए हमलों की खबरों के बाद गुरुवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगभग 2% की तेजी दर्ज की गई। वाशिंगटन और तेहरान के बीच पिछले तीन महीनों से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए जारी बातचीत के बावजूद इस सैन्य कार्रवाई ने भू-राजनीतिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
कच्चे तेल के दामों में आई ताजा तेजी
जुलाई डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स के दाम 1.90 डॉलर या 2.02% बढ़कर 96.19 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए। वहीं, अधिक सक्रियता से ट्रेड होने वाला अगस्त का कॉन्ट्रैक्ट 1.64 डॉलर (1.78%) की बढ़त के साथ 93.89 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। (बता दें कि जुलाई का कॉन्ट्रैक्ट शुक्रवार को एक्सपायर होने जा रहा है)। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड फ्यूचर्स भी 1.73 डॉलर या 1.95% की मजबूती के साथ 90.41 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।
इससे ठीक एक दिन पहले (बुधवार को), दोनों क्रूड बेंचमार्क में 5% से अधिक की भारी गिरावट देखी गई थी और वे एक महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। तब निवेशकों को उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच संभावित समझौते से यह युद्ध समाप्त हो जाएगा और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) को दोबारा खोल दिया जाएगा।
बाजार में अचानक तेजी आने के मुख्य कारण
ईरान पर अमेरिका का नया एयरस्ट्राइक रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि अमेरिका ने ईरान के भीतर एक ऐसे ठिकाने को निशाना बनाकर नए हमले किए हैं, जिसे अमेरिकी सेना और हॉर्मुज जलडमरूमध्ये (Strait of Hormuz) समुद्री यातायात के लिए खतरा माना जा रहा था। वाशिंगटन इस हफ्ते की शुरुआत में भी हॉर्मुज के पास कई ठिकानों पर हमले कर चुका है। SBI, HDFC, ICICI और अन्य बैंक आज रहेंगे बंद? जानें
बातचीत से संतुष्ट नहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस की एक बैठक के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि वह ईरान के साथ चल रही मौजूदा बातचीत से "संतुष्ट नहीं" हैं। इसके साथ ही व्हाइट हाउस ने ईरान की उस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि एक प्रस्तावित समझौते के तहत तेहरान और ओमान संयुक्त रूप से 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' की निगरानी करेंगे।
समझौते की राह में बड़े रोड़े भले ही बाजार को उम्मीद है कि दोनों पक्ष किसी अंतरिम समझौते (Interim Agreement) पर पहुंच सकते हैं (जिसके कारण तेल की कीमतें लगातार दूसरी साप्ताहिक गिरावट की राह पर हैं), लेकिन दोनों देशों के बीच कई बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है:
परमाणु कार्यक्रम और हॉर्मुज पर नियंत्रण ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने और हॉर्मुज जलडमरूमध्ये पर अपना नियंत्रण खोने को तैयार नहीं है। वर्तमान में इस समुद्री रास्ते पर ईरान और अमेरिका दोनों की ओर से दोहरी नाकेबंदी (Dual Blockade) चल रही है।
प्रतिबंध हटाने की मांग: तेहरान की मांग है कि अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों को हटाए और सैन्य हमलों को रोके, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी प्रतिकूल समझौते के लिए तैयार नहीं होंगे और प्रतिबंध नहीं हटाए जाएंगे।
राजनीतिक दबाव: राष्ट्रपति ट्रंप पर रिपब्लिकन कट्टरपंथियों का भी भारी दबाव है कि वे इस संघर्ष को जारी रखें, जो फरवरी के अंत में शुरू हुआ था और अब अपने चौथे महीने में प्रवेश कर चुका है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर दिखने लगा है। ईरान में एक सैन्य ठिकाने पर अमेरिका द्वारा रातभर किए गए नए हमलों की खबरों के बाद गुरुवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगभग 2% की तेजी दर्ज की गई। वाशिंगटन और तेहरान के बीच पिछले तीन महीनों से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए जारी बातचीत के बावजूद इस सैन्य कार्रवाई ने भू-राजनीतिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
कच्चे तेल के दामों में आई ताजा तेजी
जुलाई डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स के दाम 1.90 डॉलर या 2.02% बढ़कर 96.19 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए। वहीं, अधिक सक्रियता से ट्रेड होने वाला अगस्त का कॉन्ट्रैक्ट 1.64 डॉलर (1.78%) की बढ़त के साथ 93.89 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। (बता दें कि जुलाई का कॉन्ट्रैक्ट शुक्रवार को एक्सपायर होने जा रहा है)। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड फ्यूचर्स भी 1.73 डॉलर या 1.95% की मजबूती के साथ 90.41 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।
इससे ठीक एक दिन पहले (बुधवार को), दोनों क्रूड बेंचमार्क में 5% से अधिक की भारी गिरावट देखी गई थी और वे एक महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। तब निवेशकों को उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच संभावित समझौते से यह युद्ध समाप्त हो जाएगा और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) को दोबारा खोल दिया जाएगा।
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बाजार में अचानक तेजी आने के मुख्य कारण
ईरान पर अमेरिका का नया एयरस्ट्राइक रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि अमेरिका ने ईरान के भीतर एक ऐसे ठिकाने को निशाना बनाकर नए हमले किए हैं, जिसे अमेरिकी सेना और हॉर्मुज जलडमरूमध्ये (Strait of Hormuz) समुद्री यातायात के लिए खतरा माना जा रहा था। वाशिंगटन इस हफ्ते की शुरुआत में भी हॉर्मुज के पास कई ठिकानों पर हमले कर चुका है। SBI, HDFC, ICICI और अन्य बैंक आज रहेंगे बंद? जानें
बातचीत से संतुष्ट नहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस की एक बैठक के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि वह ईरान के साथ चल रही मौजूदा बातचीत से “संतुष्ट नहीं” हैं। इसके साथ ही व्हाइट हाउस ने ईरान की उस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि एक प्रस्तावित समझौते के तहत तेहरान और ओमान संयुक्त रूप से ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ की निगरानी करेंगे।
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समझौते की राह में बड़े रोड़े भले ही बाजार को उम्मीद है कि दोनों पक्ष किसी अंतरिम समझौते (Interim Agreement) पर पहुंच सकते हैं (जिसके कारण तेल की कीमतें लगातार दूसरी साप्ताहिक गिरावट की राह पर हैं), लेकिन दोनों देशों के बीच कई बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है:
परमाणु कार्यक्रम और हॉर्मुज पर नियंत्रण ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने और हॉर्मुज जलडमरूमध्ये पर अपना नियंत्रण खोने को तैयार नहीं है। वर्तमान में इस समुद्री रास्ते पर ईरान और अमेरिका दोनों की ओर से दोहरी नाकेबंदी (Dual Blockade) चल रही है।
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प्रतिबंध हटाने की मांग: तेहरान की मांग है कि अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों को हटाए और सैन्य हमलों को रोके, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी प्रतिकूल समझौते के लिए तैयार नहीं होंगे और प्रतिबंध नहीं हटाए जाएंगे।
राजनीतिक दबाव: राष्ट्रपति ट्रंप पर रिपब्लिकन कट्टरपंथियों का भी भारी दबाव है कि वे इस संघर्ष को जारी रखें, जो फरवरी के अंत में शुरू हुआ था और अब अपने चौथे महीने में प्रवेश कर चुका है।