जापान में भारतीय आम बैन! 20 साल मिठास के बाद अब स्वाद में क्यों आई 'खटास'? अधिकारियों ने बताया

जापान भारत का सबसे बड़ा आम बाजार नहीं है, लेकिन यहां भारतीय आम अच्छी कीमत पर बिकते हैं. निर्यातक मानते हैं कि यह प्रतिबंध उनके लिए बड़ा नुकसान है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, जहां हर साल करीब 2.8 करोड़ मीट्रिक टन आम पैदा होता है.

Japan bans Indian mangoes

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भारत की आम निर्यात व्यवस्था को उस समय बड़ा झटका लगा जब जापान ने भारतीय आमों के आयात पर अचानक रोक लगाने का फैसला लिया. जापान के क्वारंटाइन अधिकारियों ने इस साल मार्च में भारत के स्टीम हीट ट्रीटमेंट (VHT) सेंटर्स में पेस्ट कंट्रोल प्रक्रियाओं में गंभीर कमियां पाई हैं. इस फैसले से गर्मियों के महत्वपूर्ण मौसम में निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनापल्ली जैसी भारत की प्रीमियम किस्मों पर यह प्रतिबंध सबसे ज्यादा असर डालेगा.

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20 साल बाद स्वाद में आई ‘खटास’


जापान लगभग 20 वर्षों बाद पहली बार भारतीय आमों पर रोक लगाने जा रहा है. इससे पहले फ्रूट फ्लाई के खतरे को लेकर जापान ने 2006 में ही प्रतिबंध हटाया था, जब भारत ने अपनी ट्रीटमेंट प्रक्रियाओं को मजबूत किया था. आपको बता दें कि जापान की नीति बेहद सख्त है. वह आक्रामक कीटों खासकर फ्रूट फ्लाई को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाता है, क्योंकि ये कीट उनके देश की स्थानीय कृषि के लिए बड़ा खतरा हैं.

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क्यों निर्यात पर लगी रोक?


गौरतलब है कि हर साल निर्यात से पहले जापानी अधिकारी भारत के VHT केंद्रों का निरीक्षण करते हैं. इन केंद्रों में आमों को गर्म और नम हवा के नियंत्रित वातावरण में रखकर कीटों और लार्वा को नष्ट किया जाता है. इस बार निरीक्षण मार्च 2026 में उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित VHT सुविधा केंद्र पर हुआ. रिपोर्ट्स के अनुसार, जापानी टीम को यहां फ्यूमिगेशन और कीटाणुशोधन प्रक्रियाओं में कमियां मिलीं. इसके बाद जापान के योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया कि 25 मार्च 2026 के बाद जारी प्रमाण-पत्र वाले भारतीय आमों को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

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निर्यातकों पर पड़ा असर


जापान भारत का सबसे बड़ा आम बाजार नहीं है, लेकिन यहां भारतीय आम अच्छी कीमत पर बिकते हैं. निर्यातक मानते हैं कि यह प्रतिबंध उनके लिए बड़ा नुकसान है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, जहां हर साल करीब 2.8 करोड़ मीट्रिक टन आम पैदा होता है. ज्यादातर खपत देश के अंदर होती है, लेकिन जापान जैसे हाई-एंड बाजारों में निर्यात से किसानों और व्यापारियों को अच्छा मुनाफा होता है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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