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RBI की नई स्कीम में NRIs ने झोंके 100 अरब डॉलर, ऐतिहासिक स्तर पर भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

अनिवासी भारतीयों के भारी निवेश से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 729.3 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है. आरबीआई की FCNR(B) योजना में उम्मीद से ज्यादा डॉलर आने के बाद इसे समय से एक महीने पहले ही बंद कर दिया गया. कच्चे तेल के संकट और गिरते रुपये के बीच यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है.

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वैश्विक उथल-पुथल और कच्चे तेल के संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद मजबूत खबर सामने आई है. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा अनिवासी भारतीयों को आकर्षित करने के लिए शुरू की गई विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) योजना में रिकॉर्ड 100 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया है. इस स्कीम की जबरदस्त कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय बैंक ने इसे अपनी तय समय-सीमा से एक महीने पहले ही बंद करने का फैसला लिया है.

उम्मीद से कहीं ज्यादा मिला रिस्पॉन्स

ब्लूमबर्ग ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि आरबीआई ने यह स्कीम जून में शुरू की थी. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा को इस योजना से लगभग 80 अरब डॉलर मिलने की उम्मीद थी. हालांकि, 31 अगस्त तक ही इसमें 100 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आ गया. अत्यधिक डॉलर प्रवाह से भविष्य में अचानक उलटफेर के जोखिमों को देखते हुए, आरबीआई ने 30 सितंबर की मूल समय-सीमा के बजाय इसे सोमवार को ही समाप्त कर दिया. हालांकि, बैंकों को 11 सितंबर तक पहले से तय जमाओं के लिए स्वैप सुविधा का लाभ उठाने की अनुमति रहेगी.

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विदेशी मुद्रा भंडार 729.3 अरब डॉलर के ऑल-टाइम हाई पर

एनआरआई से मिले इस भारी डॉलर प्रवाह ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को रिकॉर्ड 729.3 अरब डॉलर के शिखर पर पहुंचा दिया है. यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई है जब अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है. डॉलर के मुकाबले कमजोर होते भारतीय रुपये को संभालने के लिए भंडार पर पहले से दबाव था. विदेशी मुद्रा भंडार का यह नया रिकॉर्ड आरबीआई को मुद्रा बाजार में दखल देने और दबाव झेल रहे भारतीय रुपये को मजबूती प्रदान करने की अतिरिक्त ताकत देगा. वैश्विक संकट के दौर में एनआरआई का यह भरोसा देश की आर्थिक स्थिरता के लिए ढाल बनकर उभरा है.

फरवरी से जुलाई तक लगा था बड़ा झटका

ब्रिटेन के अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 46 अरब डॉलर की भारी गिरावट आई थी. 24 जुलाई तक यह खजाना घटकर 682 अरब डॉलर पर आ गया था. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 6% तक टूट चुका था, जिससे यह एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल हो गया था.

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सितंबर में पलटी बाजी, रुपये में भी आई जान

सितंबर आते-आते तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. भंडार में आई इस जोरदार रिकवरी से रिजर्व बैंक को मुद्रा बाजार में रुपये को सहारा देने की ताकत मिली है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को भारतीय रुपये में 0.4% की तेजी आई और यह 94.7988 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. यह 1 जुलाई के बाद रुपये का सबसे मजबूत स्तर है.

क्या है FCNR(B) योजना, जिसने बदला खेल?

विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) एक विशेष फिक्स्ड डिपॉजिट योजना है. इसके तहत अनिवासी भारतीय अपनी गाढ़ी कमाई को बिना रुपये में बदले, सीधे अमेरिकी डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं में भारतीय बैंकों में जमा कर सकते हैं. इसमें मूलधन और ब्याज दोनों का भुगतान विदेशी मुद्रा में ही होता है, जिससे जमाकर्ताओं को रुपये के उतार-चढ़ाव या गिरावट का कोई जोखिम नहीं रहता.

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आरबीआई का मास्टरस्ट्रोक

वित्त वर्ष 2025 में 7 अरब डॉलर से घटकर यह जमा वित्त वर्ष 2026 में सिर्फ 946 मिलियन डॉलर रह गया था. इसे बढ़ावा देने के लिए आरबीआई ने जून में एक खास रियायती स्वैप सुविधा शुरू की. इसके तहत 3 से 5 साल की अवधि वाले नए FCNR(B) जमाओं की करेंसी हेजिंग लागत खुद आरबीआई ने उठाई, जो अमूमन बैंकों को चुकानी पड़ती थी. आरबीआई की इसी रणनीति ने विदेशी निवेशकों और एनआरआई को आकर्षित किया, जिससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर से रिकॉर्ड मजबूती की ओर लौट आया है.

RBI की FCNR(B) योजना को बंपर रिस्पॉन्स

RBI की विदेशी मुद्रा अनिवासी यानी FCNR(B) योजना को उम्मीद से कहीं अधिक जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है. अगस्त की शुरुआत में आरबीआई ने बताया था कि जून से 40.8 अरब डॉलर का निवेश आया था. आधिकारिक सूत्रों के हवाले से फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 31 अगस्त तक यह आंकड़ा 100 अरब डॉलर के पार निकल गया.

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1991 और 2013 के संकट में भी बने थे तारणहार

यह पहला मौका नहीं है जब देश की नाजुक आर्थिक स्थिति में प्रवासी भारतीयों के धन ने ढाल का काम किया हो. इससे पहले 1991 में जब देश भुगतान संतुलन के गंभीर संकट में था, तब पहली बार इस रास्ते का सहारा लिया गया था. 2013 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से जब पूंजी देश से बाहर जा रही थी, तब प्रवासी भारतीयों से करीब 34 अरब डॉलर जुटाकर स्थिति संभाली गई थी.

विदेशी मुद्रा भंडार में भारी उछाल

रॉयटर्स के अनुसार, FCNR(B) में आए इस भारी निवेश से 21 अगस्त तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 729.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. संदर्भ के लिए, फाइनेंशियल टाइम्स ने बताया था कि 24 जुलाई तक यह भंडार गिरकर 682 अरब डॉलर रह गया था. मात्र कुछ हफ्तों में आए इस सुधार ने भारत के बाहरी वित्तीय संतुलन को बेहद मजबूत कर दिया है. इससे चालू वित्त वर्ष में देश के चालू खाता घाटे (CAD) की भरपाई आसानी से होने की उम्मीद है.

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रुपये को मिला नया जीवन

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत भंडार के सहारे आरबीआई ने ऑफशोर और ऑनशोर दोनों बाजारों में डॉलर बेचकर सीधा दखल दिया. इसका असर यह हुआ कि मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.4% मजबूत होकर 94.7988 पर पहुंच गया, जो 1 जुलाई के बाद का सबसे मजबूत स्तर है.

First published on: Sep 02, 2026 10:43 PM

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Vijay Jain

विजय जैन भारतीय मीडिया जगत का एक विश्वसनीय और प्रतिष्ठित नाम हैं. वर्तमान में न्यूज 24 में सीनियर न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत विजय को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 23 से अधिक वर्षों का लंबा और समृद्ध अनुभव है. राजनीति, चुनाव, बिजनेस, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसी हर प्रमुख बीट पर मजबूत पकड़ रखने वाले विजय अपनी निष्पक्ष और सटीक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. पत्रकारिता में उनके अद्वितीय योगदान और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए उन्हें साल 2018 में प्रतिष्ठित 'नेशनल श्रीफल अवार्ड' से सम्मानित किया गया था. डिजिटल दौर में वे ट्रेडिशनल जर्नलिज्म के अनुभवों को न्यू-एज मीडिया और SEO स्ट्रेटेजी के साथ जोड़कर खबरों को नया आयाम दे रहे हैं.

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