अक्सर रिटायरमेंट के बाद कई सीनियर सिटिजन्स (वरिष्ठ नागरिकों) के मन में यह सवाल उठता है कि जब उनकी कोई रेगुलर सैलरी या इनकम नहीं आ रही है, तो क्या उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की जरूरत है? कई लोग सोचते हैं कि पेंशन या एफडी (FD) के ब्याज से मिलने वाला पैसा टैक्स के दायरे में नहीं आता, इसलिए आईटीआर की कोई जरूरत नहीं है. लेकिन इनकम टैक्स के नियम कुछ और कहते हैं. आइए समझते हैं कि सीनियर सिटिजन्स को कब ITR भरना जरूरी है और कब उन्हें इससे छूट मिलती है.

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किसे मिलती है ITR भरने से पूरी छूट?

सरकार ने 75 साल या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए Section 194P के तहत ITR फाइल करने से छूट दी है. लेकिन इसके लिए 3 मुख्य शर्तें पूरी होनी चाहिए:

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  1. बुजुर्ग की उम्र 75 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए.
  2. उनकी आय का जरिया सिर्फ पेंशन (Pension) और उसी बैंक से मिलने वाला ब्याज (Interest) होना चाहिए.
  3. उनका पेंशन खाता उसी बैंक में होना चाहिए जहां उनकी एफडी या सेविंग्स अकाउंट है.

इस मामले में बैंक खुद ही आपकी आय पर बनता हुआ टैक्स (TDS) काट लेता है और आपको अलग से ITR फाइल नहीं करना पड़ता.

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60 से 75 साल के सीनियर सिटिजन्स के लिए क्या नियम हैं?

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60 से 75 वर्ष की उम्र के बुजुर्गों के लिए बेसिक टैक्स छूट की सीमा (Basic Exemption Limit) तय है. पुराने टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए 3 लाख रुपये तक की सालाना आय टैक्स फ्री है. वहीं 80 वर्ष से अधिक (Super Senior Citizens) के लिए यह सीमा 5 लाख रुपये है. नए टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में 60 से अधिक उम्र के लोगों के लिए ₹3 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता.

जरूरी बात ये है क‍ि अगर आपकी कुल सालाना कमाई (पेंशन + एफडी का ब्याज + अन्य ब्याज) इस छूट सीमा से ज्यादा है, तो बिना रेगुलर सैलरी के भी ITR फाइल करना अनिवार्य है.

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रेगुलर इनकम न होने पर भी क्यों भरना चाहिए ITR?
अगर आपकी कमाई टैक्स छूट की सीमा से कम है, फिर भी ITR फाइल करने के कई बड़े फायदे होते हैं:

कट चुके TDS का रिफंड पाने के लिए: बैंक अक्सर FD के ब्याज पर TDS काट लेते हैं. अगर आपकी कुल आय टैक्स के दायरे में नहीं आती, तो कटा हुआ पैसा वापस (Tax Refund) पाने के लिए आपको ITR फाइल करना ही पड़ेगा.

कैपिटल गेन्स सेट-ऑफ (Capital Gains): अगर आपने कोई प्रॉपर्टी, शेयर या म्यूचुअल फंड बेचा है और उसमें नुकसान (Loss) हुआ है, तो ITR भरकर आप उस नुकसान को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड (Carry Forward) कर सकते हैं.

वीजा और होम लोन में आसानी: विदेश यात्रा के लिए वीजा अप्लाई करते समय या किसी काम के लिए लोन लेते समय पिछले 2-3 सालों का ITR एक मजबूत इनकम प्रूफ का काम करता है.

इन स्पेशल केसेज में ITR भरना अनिवार्य है
भले ही आपकी कुल आय कम हो, लेकिन अगर आपने साल भर में नीचे दिए गए काम किए हैं, तो ITR भरना जरूरी हो जाता है:

  • एक साल में 1 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल चुकाया हो.
  • विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से अधिक खर्च किए हों.
  • बैंक खातों में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक का कैश जमा किया हो.
  • बैंक से साल में 25,000 रुपये से अधिक का TDS काटा गया हो.

कुल म‍िला कर बात ये है क‍ि सीनियर सिटिजन्स को अपनी उम्र, आय के स्रोतों और बैंक द्वारा काटे गए TDS को ध्यान में रखकर ही ITR का फैसला लेना चाहिए. अगर आपका TDS कटा है या आपकी आय बेसिक छूट सीमा से ऊपर है, तो समय पर ITR जरूर फाइल करें ताकि किसी भी पेनाल्टी से बचा जा सके.