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बिजनेस

क्रूड ऑयल $90 के पार, 12% से ज्‍यादा उछला दाम, क्या अब भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

दुनिया की धड़कनें इस वक्त एक संकीर्ण जलडमरूमध्य यानी हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अटकी हुई हैं. ईरान और अमेरिका के इस संघर्ष ने कच्चे तेल को $90 के पार पहुंचा दिया है. तेल की कीमतों में आई यह सुनामी कोई मामूली उछाल नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़े ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस का संकेत है.

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Written By: Vandana Bharti Updated: Mar 7, 2026 14:37
कच्‍चे तेल के दाम में 12 फीसदी से ज्‍यादा की उछाल आई है

जब से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण (Unconditional Surrender) की मांग की है, तब से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भूचाल आ गया है. कच्चे तेल के वायदा (WTI futures) 12.2% उछलकर $90.90 प्रति बैरल पर पहुंच चुके हैं. यह अप्रैल 2020 के बाद से तेल की कीमतों में दर्ज की गई सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी है.

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, असली डर तेल की कमी नहीं, बल्कि तेल के रास्ते (Supply Route) का बंद होना है. दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई इसी तंग रास्ते से गुजरती है. हालिया आंकड़ों के मुताबिक, जहां हाल तक रोज 60 टैंकर यहां से गुजरते थे, वहीं 1 मार्च को सिर्फ 5 टैंकर ही गुजर पाए. इसका मतलब है कि सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो चुकी है.

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भारत के लिए खतरे की घंटी

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. हालांकि भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी निर्भरता रूस और अन्य 40 देशों पर शिफ्ट कर ली है, लेकिन अभी भी हमारा 40% तेल आयात उसी हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है. भारत रोज लगभग 5.5 मिलियन बैरल तेल आयात करता है, जिसमें से 2 मिलियन बैरल हॉर्मुज के रास्ते आते हैं.

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अगर यह रास्ता लंबे समय के लिए बंद होता है, तो भारत की आयात लागत (Import Bill) में भारी उछाल आएगा, जिसका सीधा असर हमारे घरेलू पेट्रोल-डीजल और खाने-पीने की चीजों (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से) पर पड़ेगा.

क्या यह अब तक का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक है?
S&P Global Energy के विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति इतिहास के सबसे बड़े ऑयल सप्लाई शॉक में बदल सकती है. पहले ईरान ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) को निशाना नहीं बनाया था, लेकिन अब कतर और सऊदी अरब की सुविधाओं पर हमले ने आग में घी डालने का काम किया है.

आगे क्या होगा?
बाजार में अस्थिरता का माहौल है और जब तक युद्ध का कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक क्रूड ऑयल का दाम इसी तरह ऊपर-नीचे होता रहेगा. फिलहाल, दुनिया वेट एंड वॉच की स्थिति में है, लेकिन भारत जैसे देशों के लिए यह एक बड़ी चेतावनी है.

First published on: Mar 07, 2026 02:36 PM

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