विकसित भारत की राह में इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा विकास का आधार, गौतम अडाणी ने गिनाई भारत की बड़ी प्राथमिकताएं
गौतम अडाणी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था जिस गति से आगे बढ़ रही है, उसे बनाए रखने के लिए मजबूत और आधुनिक बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी.
Written By: Akarsh Shukla|Updated: Aug 31, 2026 19:15
Edited By : Akarsh Shukla|Updated: Aug 31, 2026 19:15
Share :
गौतम अडाणी ने भारत के 'विकसित भारत' विजन कार्यक्रम को संबोधित किया. (Photo: News24)
---विज्ञापन---
भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य के बीच हिंदुस्तान में इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास की सबसे अहम कड़ी बनने जा रहा है. अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने भारत के ‘विकसित भारत’ विजन और इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रांसफॉर्मेशन पर अपने संबोधन में देश की विकास यात्रा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर बात की. उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, तकनीक और कनेक्टिविटी को भारत की आर्थिक क्षमता को नई ऊंचाई देने वाले प्रमुख क्षेत्र बताया.
गौतम अडाणी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था जिस गति से आगे बढ़ रही है, उसे बनाए रखने के लिए मजबूत और आधुनिक बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी. बेहतर सड़क, बंदरगाह, एयरपोर्ट, रेलवे, ऊर्जा नेटवर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी न केवल शहरों बल्कि देश के दूरदराज के क्षेत्रों को भी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
---विज्ञापन---
#WATCH | Mumbai, Maharashtra | "… Transformational infrastructures can be constrained not only by a lack of ambitions or capital, but also by the frameworks through which its risks are assessed. This is not a call for a less scrutiny… India does not need lower standards.… pic.twitter.com/vYUyCG1Eql
अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने कहा कि जब उन्होंने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में काम शुरू किया था, तब देश के सामने संसाधनों, क्षमता और आत्मविश्वास की कमी जैसी कई चुनौतियां थीं, लेकिन आज भारत काफी बदल चुका है. देश के पास जरूरी संसाधन हैं, अपनी क्षमता को साबित करने का अनुभव है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब भारत बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का आत्मविश्वास भी रखता है.
---विज्ञापन---
उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की राह में सिर्फ महत्वाकांक्षा या पूंजी की कमी ही चुनौती नहीं होती. कई बार किसी प्रोजेक्ट से जुड़े जोखिमों को आंकने का तरीका भी विकास की रफ्तार को प्रभावित करता है. उन्होंने साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि जांच-पड़ताल के मानकों को कमजोर किया जाना चाहिए. भारत को कम सख्त मानकों की जरूरत नहीं है, बल्कि चीजों को देखने के लिए ज्यादा व्यापक नजरिए की जरूरत है.
गौतम अडाणी ने आगे कहा कि अब भारत जिस तरह के बड़े और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है, उसकी प्रकृति बदल चुकी है. ऐसे में जोखिम और रेटिंग का आकलन करने वाले मौजूदा सिस्टम को भी समय के साथ बदलना होगा. भारत जिस तेजी और बड़े स्तर पर आगे बढ़ रहा है, उसके अनुरूप इंफ्रास्ट्रक्चर को समझने और उसका मूल्यांकन करने का नजरिया भी उतना ही आधुनिक और व्यापक होना चाहिए.