देश में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे कई तरह के दावों और अफवाहों पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. सरकार की तरफ से आधिकारिक तौर पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी कर एथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़े 10 बड़े भ्रामक दावों का तकनीकी और वैज्ञानिक तथ्यों के साथ खंडन किया गया है. सरकारी स्पष्टीकरण में साफ किया गया है कि E20 कार्यक्रम पूरी तरह सुरक्षित है और यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप काम कर रहा है.
1 लीटर एथेनॉल बनाने में कितना पानी होता है खर्च?
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि 1 लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है. इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से खाद्य सुरक्षा के बाद बचे अधिशेष अनाज और मक्के से किया जाता है. एक लीटर एथेनॉल बनाने में वास्तव में केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की आवश्यकता होती है, जिसे आधुनिक डिस्टिलरी जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक से रीसायकल करती हैं. इसके अलावा, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के परीक्षणों में सामने आया है कि E20 ईंधन से दोपहिया वाहनों में कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन लगभग 50 प्रतिशत और चारपहिया वाहनों में 30 प्रतिशत तक कम हुआ है.
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इंजन, माइलेज और वारंटी पर कोई खतरा नहीं
वाहन के इंजन खराब होने, माइलेज कम होने और वारंटी खत्म होने के दावों को भी सरकार ने पूरी तरह गलत बताया है. जांच में माइलेज पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं देखा गया है. इसके विपरीत, एथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग अधिक होने से वाहनों का पिकअप बेहतर और ड्राइव स्मूद होती है. सियाम (SIAM) और पीआईबी फैक्ट चेक ने जून 2026 में स्पष्ट किया है कि निर्धारित मानकों वाले E20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों की वारंटी या बीमा पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ता.
एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की बड़ी उपलब्धियां
वर्ष 2014-15 से लेकर मई 2026 के बीच इस कार्यक्रम ने देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका निभाई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान से अब तक 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है. साथ ही, किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का त्वरित भुगतान किया गया है. भारत में एथेनॉल मिश्रण का स्तर जो 2013-14 में मात्र 1.5 प्रतिशत था, वह दिसंबर 2025 तक बढ़कर 20 प्रतिशत (E20) के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर चुका है, जिससे देश की कच्चे तेल पर निर्भरता काफी कम हुई है.
यह भी पढ़ें: LPG Cylinder Lost Rules: अगर गैस सिलेंडर खो जाए या चोरी हो जाए तो क्या कनेक्शन कट जाता है? जानें कितने रुपये लगता है जुर्माना और क्या है पूरा नियम
देश में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे कई तरह के दावों और अफवाहों पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. सरकार की तरफ से आधिकारिक तौर पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी कर एथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़े 10 बड़े भ्रामक दावों का तकनीकी और वैज्ञानिक तथ्यों के साथ खंडन किया गया है. सरकारी स्पष्टीकरण में साफ किया गया है कि E20 कार्यक्रम पूरी तरह सुरक्षित है और यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप काम कर रहा है.
1 लीटर एथेनॉल बनाने में कितना पानी होता है खर्च?
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि 1 लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है. इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से खाद्य सुरक्षा के बाद बचे अधिशेष अनाज और मक्के से किया जाता है. एक लीटर एथेनॉल बनाने में वास्तव में केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की आवश्यकता होती है, जिसे आधुनिक डिस्टिलरी जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक से रीसायकल करती हैं. इसके अलावा, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के परीक्षणों में सामने आया है कि E20 ईंधन से दोपहिया वाहनों में कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन लगभग 50 प्रतिशत और चारपहिया वाहनों में 30 प्रतिशत तक कम हुआ है.
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इंजन, माइलेज और वारंटी पर कोई खतरा नहीं
वाहन के इंजन खराब होने, माइलेज कम होने और वारंटी खत्म होने के दावों को भी सरकार ने पूरी तरह गलत बताया है. जांच में माइलेज पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं देखा गया है. इसके विपरीत, एथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग अधिक होने से वाहनों का पिकअप बेहतर और ड्राइव स्मूद होती है. सियाम (SIAM) और पीआईबी फैक्ट चेक ने जून 2026 में स्पष्ट किया है कि निर्धारित मानकों वाले E20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों की वारंटी या बीमा पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ता.
एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की बड़ी उपलब्धियां
वर्ष 2014-15 से लेकर मई 2026 के बीच इस कार्यक्रम ने देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका निभाई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान से अब तक 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है. साथ ही, किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का त्वरित भुगतान किया गया है. भारत में एथेनॉल मिश्रण का स्तर जो 2013-14 में मात्र 1.5 प्रतिशत था, वह दिसंबर 2025 तक बढ़कर 20 प्रतिशत (E20) के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर चुका है, जिससे देश की कच्चे तेल पर निर्भरता काफी कम हुई है.
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