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Female CEOs in India: देश की 500 बड़ी कंपनियों में सिर्फ 9 महिला CEO! संसद में पेश हुए आंकड़े

Women Leadership in Corporate India 2026: लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार देश की टॉप 500 लिस्टेड कंपनियों में केवल 9 महिला CEO और 25 MD हैं. जानिए कॉर्पोरेट जगत में महिलाओं की पूरी रिपोर्ट.

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भारत में महिलाएं अंतरिक्ष से लेकर खेल जगत और बिजनेस में हर दिन नए कीर्तिमान रच रही हैं. लेकिन जब बात देश की सबसे बड़ी कंपनियों के टॉप लीडरशिप पदों की आती है, तो स्थिति काफी चौंकाने वाली और सोचने पर मजबूर करने वाली नजर आती है. हाल ही में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश की टॉप 500 लिस्टेड कंपनियों में केवल 9 महिला सीईओ (CEO) और 25 महिला मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) ही कार्यभार संभाल रही हैं.

आइए जानते हैं क‍ि संसद में पेश क‍िए गए इन आंकड़ों की पूरी सच्चाई क्या है और कॉर्पोरेट बोर्ड्स में महिलाओं की मौजूदगी की क्या स्थिति है.

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टॉप पदों पर पुरुषों का दबदबा: क्या कहते हैं आंकड़े?

लोकसभा में सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों से साफ है कि कंपनियों में फैसले लेने वाली सबसे बड़ी कुर्सियों तक पहुंचने में महिलाओं और पुरुषों के बीच अभी भी बहुत बड़ा फासला है.

सीईओ (Chief Executive Officer): देश की टॉप 500 कंपनियों में केवल 9 महिलाएं सीईओ पद पर हैं.

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एमडी (Managing Director): केवल 25 महिलाएं मैनेजिंग डायरेक्टर की भूमिका निभा रही हैं.

ईडी और सीएफओ: इन टॉप 500 कंपनियों में 67 महिला एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ED) और 22 महिला चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) हैं.

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कंपनियों के बोर्ड में महिलाओं की कैसी है मौजूदगी?
सीईओ और एमडी के अलावा कंपनियों के बोर्ड रूम्स में भी महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले काफी कम है. देश की कंपनियों में करीब 860 महिलाएं डायरेक्टर या बोर्ड मेंबर हैं. कुल 638 महिलाएं इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं.

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने संसद में यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के पास फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक स्टडी नहीं है, जो यह बता सके कि महिलाएं सीईओ या एमडी जैसे बड़े पदों तक कम संख्या में क्यों पहुंच पा रही हैं.

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महिला नेतृत्व (Women Leadership) का बढ़ना क्यों है जरूरी?
किसी भी कंपनी में सीईओ या एमडी का पद सिर्फ एक नौकरी नहीं होता. ये वो पद हैं जहां कंपनी के भविष्य, निवेश, रणनीति और कर्मचारियों से जुड़े सबसे बड़े फैसले लिए जाते हैं. बोर्ड रूम और टॉप पदों पर महिलाओं के होने से फैसलों में एक नया और संतुलित नजरिया शामिल होता है. जब महिलाएं शीर्ष पदों पर पहुंचती हैं, तो इससे कार्यस्थल (Workplace) पर काम करने वाली लाखों अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलता है.

अध्ययनों से साबित हुआ है कि डाइवर्स लीडरशिप वाली कंपनियां कर्मचारियों के हितों और समावेशी माहौल को ज्यादा प्राथमिकता देती हैं.

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हालांकी पिछले कुछ सालों में कंपनियों के बोर्ड में महिलाओं की एंट्री जरूर बढ़ी है, लेकिन सीईओ और एमडी जैसे निर्णायक पदों पर लैंगिक असमानता (Gender Gap) अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. इस खाई को पटाने के लिए कॉर्पोरेट नीतियों में बदलाव और महिलाओं को लीडरशिप रोल के लिए प्रोत्साहित करना बेहद जरूरी है.

First published on: Aug 12, 2026 04:19 PM

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About the Author

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती, BAG नेटवर्क के माल‍िकाना हक वाले News 24 के साथ स‍ितंबर 2025 से कार्यरत हैं। मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं। News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबर लिखने के साथ-साथ एजुकेशन की भी जिम्मेदारी संभालती हैं। बी.कॉम की पढ़ाई द‍िल्‍ली यून‍िवर्स‍िटी से की है और YMCA, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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Vandana Bharti

वन्‍दना भारती, BAG नेटवर्क के माल‍िकाना हक वाले News 24 के साथ स‍ितंबर 2025 से कार्यरत हैं। मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं। News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबर लिखने के साथ-साथ एजुकेशन की भी जिम्मेदारी संभालती हैं। बी.कॉम की पढ़ाई द‍िल्‍ली यून‍िवर्स‍िटी से की है और YMCA, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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