अगर आप भी दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) या देश के बड़े शहरों में अपने सपनों का आशियाना खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपकी जेब और बजट से सीधी जुड़ी है. रियल एस्टेट रिसर्च फर्म एनारॉक (ANAROCK) के नए आंकड़े बता रहे हैं कि आम आदमी के लिए 40 से 60 लाख रुपये के बजट में फ्लैट ढूंढ़ना अब लगभग नामुमकिन सा होता जा रहा है.
पिछले 5 सालों (2021 से 2025) में जहां घर बनाने की लागत (Construction Cost) 34% बढ़ी है, वहीं फ्लैट्स के दाम 59% की भारी छलांग लगाकर औसतन 9260 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच चुके हैं.
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क्यों इतने महंगे हो रहे हैं फ्लैट्स?
लागत और बिक्री मूल्य के बीच 25% का यह बड़ा अंतर साफ दिखाता है कि महंगे फ्लैट्स के पीछे सिर्फ ईंट, सीमेंट या सरिया की कीमतें जिम्मेदार नहीं हैं. असली खेल जमीन के दामों (Land Prices) और बिल्डरों के मार्जिन का है.
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आसमां छूती जमीन की कीमतें:
2021 से 2026 के बीच देश के 7 बड़े शहरों में जमीन के दाम 50% से 120% तक बढ़े हैं. दिल्ली-एनसीआर में तो जमीन के भाव 70% से 130% तक उछल चुके हैं. बिल्डर जिस महंगी कीमत पर जमीन खरीदता है, उसका पूरा बोझ आखिरकर होम बायर्स की जेब पर ही डाला जाता है.
कच्चा माल हुआ महंगा:
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय संकट की वजह से कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे नए प्रोजेक्ट्स 8% से 12% तक और महंगे हो सकते हैं. सरिया (Steel) 20% महंगा होकर 72000 रुपये प्रति टन पर पहुंच गया है. वहीं ब्रेंट क्रूड महंगा होने से ईंधन व लॉजिस्टिक्स के दाम में 15-20% की बढ़ोतरी हुई है.
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इलेक्ट्रिकल्स व प्लंबिंग भी 9 से 13% महंगा हो गया है, क्योंकि कॉपर और एल्युमीनियम महंगा हुआ है. फिनिशिंग मटेरियल के रूप में इस्तेमाल होने वाले आयातित सामान में 8 से 12 फीसदी का इजाफा हुआ है. लेबर कॉस्ट 5-6% और सीमेंट 4-5% तक महंगा हुआ है.
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