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बिजनेस

ईरान हमलों के बाद क्रूड ऑयल में 13% का सुनामी उछाल, वैश्विक बाजार में हाहाकार; क्‍या होगा भारत पर असर

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से ग्लोबल ऑयल मार्केट में हड़कंप मच गया है. इस तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड $82 के पार पहुंच गया है. जानिए भारत और आपकी जेब पर इसका क्या असर पड़ेगा.

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Written By: Vandana Bharti Updated: Mar 2, 2026 08:42
ईरान हमले के बाद ब्रेंट तेल के दाम में भयंकर तेजी द‍िख रही है.

क्या आपने आज सुबह उठकर पेट्रोल पंप के रेट चेक किए? शायद नहीं, लेकिन दुनिया के नक्शे पर ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने भारत में आपकी रसोई और गाड़ी के खर्चों पर काले बादल छा दिए हैं. सोमवार का दिन ग्लोबल मार्केट के लिए बेहद तनावपूर्ण रहा. जैसे ही ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमले किए, कच्चा तेल (Crude Oil) बाजार में आग की तरह फैल गया. ब्रेंट क्रूड की कीमतें 13% के जबरदस्त उछाल के साथ $82 प्रति बैरल के स्तर पर जा टिकीं. यह उछाल किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए रेड अलर्ट जैसा है.

क्यों मचा है बाजार में हड़कंप?

यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि एक भू-राजनीतिक (Geopolitical) संकट है. जब दो बड़े खिलाड़ी आपस में भिड़ते हैं, तो सप्लाई चेन लड़खड़ा जाती है.

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Iran-Israel-US War: सोना चांदी, तेल या शेयर बाजार! भारत के क‍िस सेक्‍टर पर होगा सबसे ज्‍यादा असर?

इस उछाल के पीछे का सबसे बड़ा कारण है होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz). यह समुद्र का वह संकरा रास्ता है जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है. अगर युद्ध की वजह से यहां आवाजाही रुकी, तो ग्लोबल सप्लाई चेन ठप हो जाएगी. विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर ऐसा हुआ, तो तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल का जादुई आंकड़ा भी पार कर सकती हैं.

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भारत के लिए क्यों है यह टेंशन का सबब?
भारत जैसे देश के लिए, जहां हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 85% तेल आयात (Import) करते हैं, यह खबर किसी झटके से कम नहीं है.

आयात का बिल बढ़ेगा: जब हम कच्चा तेल महंगा खरीदेंगे, तो इसका सीधा असर हमारे फॉरेक्स रिजर्व और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर पड़ेगा.

महंगाई का मल्टीप्लायर इफेक्ट: तेल सिर्फ पेट्रोल-डीजल के लिए नहीं चाहिए होता. पूरी लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री, माल ढुलाई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इसी पर निर्भर है. अगर तेल महंगा हुआ, तो बाजार में सब्जियां, राशन और हर वो चीज महंगी हो जाएगी जिसकी आप कल्पना करते हैं.

बाजार में अस्थिरता: शेयर बाजार में भी इस खबर का असर पहले ही दिख रहा है. सोमवार को भारतीय बाजारों में जो घबराहट थी, उसके पीछे यही ऑयल फियर (Oil Fear) सबसे बड़ा कारण है.

अब आगे क्या?
अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं. बाजार की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या यह हमला एक छोटी सैन्य कार्रवाई तक सीमित रहेगा या यह एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदलेगा?अमेरिका और ओपेक (OPEC) देश सप्लाई को लेकर क्या कदम उठाते हैं?

फिलहाल, कच्चे तेल की कीमतों का $82 पर पहुंचना एक संकेत है कि हमें आने वाले समय के लिए अपनी कमर कस लेनी चाहिए. एक आम नागरिक के तौर पर, यह समय है कि हम सतर्क रहें और बाजार में होने वाले छोटे-मोटे झटकों से न घबराएं.

First published on: Mar 02, 2026 08:42 AM

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