Iran-Israel-US War: दुनिया की नजरें मध्य-पूर्व (Middle East) पर टिकी हैं जहां अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई (Major Combat Operations) शुरू कर दी है. एक निवेशक या आम नागरिक के रूप में, यह स्थिति चिंताजनक जरूर है, लेकिन पैनिक (Panic) करने से बेहतर है इसे समझना.
जब भी दुनिया के उस हिस्से में अशांति होती है, तो उसका सीधा असर भारत की रसोई और जेब, दोनों पर पड़ता है. आइए समझते हैं कि यह जंग भारत के किन सेक्टर्स के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है:
क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) का खेल
ईरान और खाड़ी देश ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं. युद्ध का मतलब है आपूर्ति में बाधा (Supply Chain Disruption). अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है. तेल महंगा होने का मतलब है ट्रांसपोर्टेशन महंगा होना, जिससे हर सामान (सब्जी से लेकर मोबाइल तक) की ढुलाई महंगी हो जाती है. यह सीधे तौर पर महंगाई (Inflation) को बढ़ा सकता है.
सोना और चांदी (Safe Havens)
इतिहास गवाह है कि जब भी दुनिया में युद्ध का माहौल होता है, निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोना-चांदी में निवेश करते हैं क्योंकि इसे सुरक्षित माना जाता है. सोने और चांदी की कीमतों में बड़े गैप-अप (Gap-up) देखने को मिल सकते हैं. निवेशक इसे सेफ हेवन (Safe Haven) के तौर पर देख रहे हैं.
शेयर बाजार (Stock Market)
शुक्रवार (27 फरवरी) को भारतीय बाजारों में पहले ही भारी बिकवाली देखी गई थी. सोमवार को बाजार में काफी उतार-चढ़ाव (Volatility) रहने की उम्मीद है. हालांकि घबराकर बिकवाली न करें. शेयर बाजार ऐसे समय में भावनाओं (Fear) पर चलते हैं. अगर आपका निवेश लंबी अवधि (Long Term) का है, तो गिरावट को एक अवसर (Opportunity) के रूप में देखें.
प्रभावित हो सकने वाले सेक्टर्स
एविएशन (Aviation): जेट फ्यूल महंगा होने से एयरलाइंस कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है.
पेंट्स और ऑटोमोबाइल: ये सेक्टर सीधे कच्चे तेल के दाम से जुड़े होते हैं. कच्चे तेल में उछाल इनके लिए बुरा संकेत है.
डिफेंस (Defense): ऐसे समय में अक्सर डिफेंस सेक्टर के शेयरों में हलचल देखी जाती है, क्योंकि युद्ध के माहौल में देशों का रक्षा बजट और हथियारों की मांग बढ़ जाती है.
आम आदमी को क्या करना चाहिए?
युद्ध की खबरें डराती जरूर हैं, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था में अभी भी काफी मजबूती है. Q3 GDP के आंकड़े (7.8%) इसके सबूत हैं. अगर आपने बहुत अधिक रिस्क लिया हुआ है, तो उसे संतुलित करें. लेकिन सिर्फ डर के मारे अच्छे स्टॉक्स को बेचने की गलती न करें. अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि ईरान का जवाबी हमला (Retaliatory Strike) कितना बड़ा होगा और युद्ध कितना लंबा खिंचता है. यह स्थिति अनिश्चितता (Uncertainty) की है. अगले कुछ दिन ग्लोबल मार्केट्स में हलचल रहेगी. एक समझदार निवेशक के तौर पर, अपनी निवेश रणनीति में अनुशासन रखें.