अपनी करेंसी लॉन्‍च कर सकते हैं BRICS, क्‍या डॉलर हो जाएगा कमजोर? ट्रंप के छूटे पसीने

अभी दुनिया का लगभग 80-90% व्यापार डॉलर में होता है. अगर ब्रिक्स देश (जो दुनिया की 40% से ज्यादा आबादी और करीब 30% GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं) अपनी करेंसी में व्यापार शुरू कर देते हैं, तो डॉलर की मांग वैश्विक बाजार में तेजी से गिरेगी.

bricks currency

ब्र‍िक्‍स करेंसी अगर आती है तो डॉलर पर क्‍या असर होगा ?

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ब्रिक्स देश “BRICS Pay” जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों और स्थानीय मुद्राओं (जैसे रुपया-रुबल व्यापार) पर अधिक ध्यान दे रहे हैं. साल 2026 के भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इस दिशा में किसी ‘गोल्ड-बैक्ड’ (सोने पर आधारित) यूनिट या डिजिटल करेंसी की घोषणा की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में ब्रिक्स (BRICS) देश (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका + नए सदस्य) अगर एक नई कॉमन मुद्रा (Common Currency) लाते हैं तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्‍या असर होगा और डॉलर को यह क‍ितना कमजोर कर सकता है? आइये जानते हैं:

यदि ब्रिक्स करेंसी हकीकत में आती है, तो इसके परिणाम कुछ इस तरह हो सकते हैं:

डॉलर का एकाधिकार (Dominance) कम होगा
अभी दुनिया का लगभग 80-90% व्यापार डॉलर में होता है. अगर ब्रिक्स देश (जो दुनिया की 40% से ज्यादा आबादी और करीब 30% GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं) अपनी करेंसी में व्यापार शुरू कर देते हैं, तो डॉलर की मांग वैश्विक बाजार में तेजी से गिरेगी. इसे ‘डी-डॉलराइजेशन’ (De-dollarization) कहा जाता है.

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डॉलर की मांग घटने से उसकी कीमत गिर सकती है, जिससे अमेरिका में महंगाई बढ़ सकती है क्योंकि उनके लिए आयात महंगा हो जाएगा.

‘शस्त्रीकरण’ (Weaponization) का डर खत्म होगा
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने रूस को डॉलर के ग्लोबल पेमेंट सिस्टम (SWIFT) से बाहर कर दिया था. ब्रिक्स देश अपनी करेंसी लाकर खुद को ऐसे अमेरिकी प्रतिबंधों से सुरक्षित करना चाहते हैं. इससे देशों की ‘आर्थिक संप्रभुता’ बढ़ेगी.

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भारत के लिए फायदे और चुनौतियां
भारत को कच्चा तेल या अन्य सामान खरीदने के लिए बार-बार डॉलर नहीं खरीदने पड़ेंगे, जिससे ट्रांजेक्शन फीस बचेगी और विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) पर दबाव कम होगा. भारत को यह संतुलन बनाना होगा कि नई करेंसी पर कहीं चीन (युआन) का दबदबा न हो जाए. भारत अपनी करेंसी ‘रुपये’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने को प्राथमिकता दे रहा है.

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क्या डॉलर पूरी तरह खत्म हो जाएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर को पूरी तरह रिप्लेस करना फिलहाल नामुमकिन है. क्‍योंक‍ि अमेरिकी डॉलर के पीछे दुनिया की सबसे पारदर्शी और स्थिर कानूनी प्रणाली है. ब्रिक्स देशों (जैसे रूस और चीन) की अर्थव्यवस्थाओं में उतनी पारदर्शिता की कमी है. डॉलर हर जगह स्वीकार्य है. नई करेंसी को इस स्तर तक पहुंचने में दशकों लग सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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