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बैंकों की हड़ताल… तो क्या ATM से भी नहीं निकलेंगे पैसे? जानिए कौन मशीनों में डालता है कैश

बैंकों की हड़ताल के दौरान ATM मशीनें तकनीकी रूप से चालू रहती हैं, लेकिन कैश रिफिलिंग न होने से पैसा खत्म होने का डर बना रहता है. जानिए मशीनों की नकदी का पूरा गणित.

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 बैंकों की हड़ताल होने पर अक्सर लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या वे एटीएम से पैसे निकाल पाएंगे. तकनीकी रूप से देखा जाए तो एटीएम मशीनें एक स्वचालित सिस्टम पर काम करती हैं और बैंक शाखाओं में हड़ताल होने के बावजूद ये मशीनें चालू रहती हैं. इसका मतलब यह है कि हड़ताल के दौरान भी आपका कार्ड मशीन में काम करेगा और आप अपना बैलेंस चेक करने या ट्रांजेक्शन करने जैसी सुविधाएं ले पाएंगे. हालांकि शाखा के भीतर होने वाले काम जैसे चेक क्लियरेंस या लोन प्रोसेसिंग पूरी तरह बंद रहेंगे लेकिन डिजिटल माध्यम और मशीनें काम करती रहेंगी.

कैश खत्म होने का सबसे बड़ा डर

एटीएम मशीनों के चालू रहने के बावजूद सबसे बड़ी समस्या नकदी की उपलब्धता को लेकर आती है. हड़ताल के दौरान बैंक कर्मचारी मशीनों में दोबारा पैसा भरने यानी कैश रिफिलिंग का काम नहीं करते हैं जिसके कारण मशीनें जल्दी खाली हो सकती हैं. जनवरी 2026 में होने वाली हड़ताल के दौरान भी यह आशंका जताई गई है कि व्यस्त इलाकों और बाजारों में स्थित एटीएम से कैश जल्दी खत्म हो सकता है. अगर हड़ताल का समय बढ़ता है तो एटीएम के बाहर ‘नो कैश’ की तख्तियां लटक सकती हैं जिससे आम जनता को नकदी के लिए भटकना पड़ सकता है.

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मशीनों में पैसा डालने का सिस्टम

भारत में एटीएम में कैश डालने की जिम्मेदारी ज्यादातर आउटसोर्स की गई एजेंसियों की होती है या फिर सीधे बैंक स्टाफ इसे संभालता है. हड़ताल के दौरान बैंक के भीतर से कैश की सप्लाई चेन प्रभावित हो जाती है जिससे निजी एजेंसियां भी मशीनों तक पैसा नहीं पहुंचा पाती हैं. यही कारण है कि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में एटीएम सेवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं क्योंकि वहां बैकअप के तौर पर नकदी का स्टॉक कम होता है. ऐसे में हड़ताल की घोषणा होते ही लोग बड़ी मात्रा में कैश निकालने लगते हैं जिससे मशीनें अपनी क्षमता से पहले ही जवाब दे देती हैं.

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डिजिटल भुगतान ही है सही समाधान

अगर हड़ताल लंबी खिंचती है और आपके पास नकदी खत्म हो जाती है तो यूपीआई और मोबाइल बैंकिंग ही आपके सबसे बड़े मददगार साबित होंगे. जानकारों की सलाह है कि हड़ताल से एक दिन पहले ही अपनी जरूरत का कैश निकालकर रख लें ताकि मशीनों के खाली होने पर आपको परेशानी न हो. आज के दौर में डिजिटल पेमेंट की सुविधा लगभग हर छोटी-बड़ी दुकान पर मौजूद है इसलिए एटीएम पर निर्भरता कम करना ही समझदारी है. याद रखें कि हड़ताल केवल बैंक कर्मचारियों के काम रोकने तक सीमित नहीं होती बल्कि इसका असर पूरे बैंकिंग इकोसिस्टम की सप्लाई चैन पर पड़ता है.

First published on: Jan 26, 2026 10:20 PM

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About the Author

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

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राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

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