अगर आप शेयर बाजार (Stock Market) में एक्टिव रहते हैं और रोज सुबह बाजार खुलने का इंतजार करते हैं, तो 7 सितंबर 2026 से लागू हुए नए नियम आपके लिए जानना बेहद जरूरी हैं. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने मिलकर प्री-ओपन सेशन (सुबह 9:00 बजे से 9:15 बजे तक) के नियमों को अपडेट कर दिया है.
इस बदलाव का सीधा मकसद बाजार में अनचाहे उतार-चढ़ाव (Volatility) को रोकना, कीमतों में पारदर्शिता लाना और आखिरी समय में होने वाली गड़बड़ियों या मैनिपुलेशन (Manipulation) पर लगाम लगाना है.
प्री-ओपन सेशन में क्या बदला?
मार्केट के शुरुआती 15 मिनट की प्रक्रिया को दो मुख्य टाइम-स्लॉट में बांटा गया है. सुबह 9:00 से 9:05 बजे तक (प्रथम 5 मिनट Window) में निवेशक अपने मार्केट ऑर्डर (मौजूदा भाव पर खरीद-बिक्री) और लिमिट ऑर्डर (अपनी मनपसंद तय कीमत पर खरीद-बिक्री) दोनों डाल सकते हैं. इस समय के दौरान ऑर्डर्स को एडिट या कैंसिल भी किया जा सकता है.
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दूसरा विंडो सुबह 9:05 से 9:10 बजे तक होगा, जिसमें अब सुबह 9:05 बजे के बाद कोई भी नया मार्केट ऑर्डर नहीं स्वीकार किया जाएगा. इस विंडो में केवल लिमिट ऑर्डर ही सबमिट, मॉडिफाई या कैंसिल किए जा सकेंगे. पहले यह समय 9:07 बजे तक था, जिसे अब बढ़ाकर 9:10 बजे तक कर दिया गया है.
जब सुबह शेयर का ओपनिंग प्राइस (Price Discovery) तय किया जाएगा, तब मार्केट ऑर्डर को लिमिट ऑर्डर के मुकाबले पहली प्राथमिकता (First Priority) दी जाएगी.
ट्रेडर्स और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 3 सबसे बड़ी बातें
- मार्केट ऑर्डर के लिए समय सीमा: अगर आप ओवरनाइट खबरों या ग्लोबल मार्केट के ट्रेंड्स को देखकर ‘At-The-Market’ ऑर्डर लगाना चाहते हैं, तो 9:05 बजे से पहले-पहले ऑर्डर प्लेस कर दें. 9:05 के बाद सिर्फ लिमिट ऑर्डर ही चलेगा.
- हेराफेरी और फेक ऑर्डर पर लगाम: पहले कुछ बड़े ट्रेडर्स 9:07 बजे से ठीक पहले बड़े-बड़े फेक मार्केट ऑर्डर डालकर शेयर की कीमतों को गलत तरीके से प्रभावित करते थे और लास्ट सेकंड में ऑर्डर कैंसिल कर देते थे. अब 9:05 के बाद मार्केट ऑर्डर बंद होने से यह खेल खत्म हो जाएगा.
- प्राइस स्पाइक से बचाव: 9:05 से 9:10 के बीच सिर्फ लिमिट ऑर्डर रहने की वजह से मार्केट में लिक्विडिटी बनी रहेगी और 9:15 बजे अचानक किसी शेयर की कीमत अचानक बहुत ज्यादा ऊपर-नीचे नहीं भागेगी.
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. किसी भी प्रकार के वित्तीय फैसले से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.