Rajesh Bharti
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Boeing lost 32 billion in 5 year : बोइंग कंपनी विमान बनाने वाली कंपनियों में प्रमुख है। भारत समेत दुनिया के कई देशों में यह कंपनी विमान बेचती है। लेकिन इन दिनों इस कंपनी के सितारे गर्दिश में हैं। बोइंग को 2019 से लेकर अब तक 32 बिलियन डॉलर (करीब 2.67 अरब रुपये) का नुकसान हो चुका है। यह नुकसान ऐसे समय हुआ है जब कंपनी पर दुनियाभर से विमान निर्माण में खामियों को लेकर शिकायत आ रही हैं।
विमान निर्माण को लेकर दुनियाभर में बोइंग का दबदबा है। इसका कारण है कि इस क्षेत्र में बहुत ज्यादा कंपनियां नहीं हैं। बोइंग के बाद एयरबस का ही नंबर आता है। हालांकि दो-तीन कंपनियां और हैं लेकिन उनकी एविएशन इंडस्ट्री में वह पकड़ नहीं है जो बोइंग और एयरबस की है।
बोइंग के विमानों में कई खामियां हाल ही में सामने आई हैं। इसे लेकर इस कंपनी के विमान में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एक मामला इसी साल जनवरी में उस समय सामने आया जब पोर्टलैंड के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद एक नए बोइंग 737 मैक्स विमान में लगा इमरजेंसी एग्जिट गेट टूटकर गिर गया। जांच में पाया गया कि गेट को सुरक्षित रूप से जोड़ने के लिए इसमें चार बोल्ट लगाए ही नहीं गए थे। दूसरा मामला 5 साल पहले का है जब दो नए बोइंग 737 मैक्स विमान लगभग एक जैसी दुर्घटनाओं में नष्ट हो गए थे। इसमें 300 से ज्यादा यात्रियों की मौत हो गई थी। जांच में पता चला कि इन दुर्घटनाओं का कारण उड़ान नियंत्रण सॉफ्टवेयर की खामी थी।

Boeing
बोइंग की खामियों को उजागर करने वाले एक व्हिसलब्लोअर की हाल ही में मौत हुई है। इनका नाम जोशुआ डीन था। जोशुआ ने बोइंग 737 मैक्स विमानों की खामियों को उजागर किया था और सप्लायर पर आरोप लगाया था कि उसने इन खामियों को नजरअंदाज किया। इससे पहले भी एक व्हिसलब्लोअर जॉन बारनेट की मौत हो चुकी है। जॉन की कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हो गई थी। बारनेट ने बोइंग 787 ड्रीमलाइनर की सुरक्षा समस्याओं को उजागर करने के लिए आवाज उठाई थी। इस मामले में उन्हें बोइंग के खिलाफ एक मुकदमे में गवाही देनी थी लेकिन उन्होंने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
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कंपनी पर इस समय 5600 कमर्शियल जेट का ऑर्डर है। इसकी कीमत 529 बिलियन डॉलर (करीब 44 हजार करोड़ रुपये) है। कंपनी जिस गति से विमानों का निर्माण कर रही है, उससे लगता है कि इस ऑर्डर को पूरा करने में उसे कई साल लगेंगे। ऐसा इसलिए कि कंपनी ने क्वॉलिटी इश्यू को हल करने के लिए विमान निर्माण की गति कम कर दी है। और वह प्रॉफिट में जाने के लिए एक साल में पर्याप्त विमान नहीं बना सकती। ऐसे में कंपनी को और ज्यादा नुकसान हो सकता है।
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