RBI Relief: कैपिटल मार्केट के नए नियमों पर 3 महीने की रोक, अब 1 जुलाई से बदलेंगे लोन और एक्विजिशन के नियम

RBI का बड़ा फैसला आया है। कैपिटल मार्केट के नए नियमों की डेडलाइन 1 अप्रैल से बढ़ाकर 1 जुलाई 2026 कर दी गई है। कंपनियों को खरीदने के लिए लोन लेना अब ज्यादा पारदर्शी होगा, लेकिन कंट्रोल और गारंटी की शर्तें बैंकों को सुरक्षित रखेंगी। क्या है ये नया फ्रेमवर्क और आपकी जेब पर क्या होगा असर? पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें

RBI (11)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कॉरपोरेट जगत और बैंकिंग सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए कैपिटल मार्केट (Capital Market) के नए नियमों को लागू करने की तारीख आगे बढ़ा दी है। जो नियम कल यानी 1 अप्रैल 2026 से लागू होने थे, उन्हें अब 1 जुलाई 2026 तक के लिए टाल दिया गया है।

विज्ञापन

बाजार के दिग्गजों और बैंकों से मिले फीडबैक के बाद RBI ने यह 3 महीने की अतिरिक्त मोहलत दी है ताकि सिस्टम को इन तकनीकी बदलावों के लिए पूरी तरह तैयार किया जा सके।

विज्ञापन

क्या है यह नया फ्रेमवर्क और क्यों है जरूरी?

सरल शब्दों में कहें तो ये नियम तय करते हैं कि बैंक शेयर बाजार, कंपनियों के अधिग्रहण (Acquisition) और ब्रोकर्स को किस शर्त पर और कितना पैसा उधार दे सकते हैं। RBI का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक जब भी मार्केट में पैसा लगाएं या बड़ी डील्स के लिए लोन दें, तो जोखिम (Risk) कम से कम हो।

नए नियमों की 4 सबसे बड़ी बातें:

विज्ञापन

मार्केट ब्रोकर्स (CMI) के लिए राहत
कैपिटल मार्केट में काम करने वाली संस्थाओं के लिए अच्छी खबर है। अब वे अपनी ट्रेडिंग के लिए 100% कैश या उसके बराबर की सिक्योरिटी जमा करके बैंकों से फंडिंग ले सकेंगे। इससे बाजार में नकदी (Liquidity) का प्रवाह बना रहेगा और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असर नहीं पड़ेगा।

कंपनियों का अधिग्रहण (Acquisition) और कंट्रोल
अब अगर कोई कंपनी किसी दूसरी कंपनी को खरीदना चाहती है या विलय (Merger) कर रही है, तो बैंक से लोन लेना आसान होगा। लेकिन एक बड़ी शर्त है, बैंक केवल तभी पैसा देंगे जब मकसद उस कंपनी पर ‘कंट्रोल’ (मालिकाना हक) हासिल करना हो। महज कुछ शेयर खरीदने के लिए अब बैंक आसानी से कर्ज नहीं देंगे।

विज्ञापन

रिफाइनेंसिंग (Refinancing) पर नकेल
अक्सर कंपनियां एक बैंक का कर्ज चुकाने के लिए दूसरे बैंक से नया लोन लेती हैं। अब ऐसा तभी मुमकिन होगा जब खरीदारी की डील पूरी तरह संपन्न हो चुकी हो। खरीदने वाली कंपनी का उस पर पूरा नियंत्रण हो। नए लोन का इस्तेमाल सिर्फ पुराना कर्ज चुकाने के लिए ही किया जाए।

कॉर्पोरेट गारंटी अनिवार्य
अगर कोई बड़ी कंपनी अपनी किसी छोटी सहायक कंपनी (Subsidiary) के नाम पर लोन लेती है, तो अब मुख्य पैरेंट कंपनी को अपनी कॉर्पोरेट गारंटी देनी होगी। इससे बैंकों का पैसा डूबने का खतरा कम होगा, क्योंकि लोन न चुकाने पर मुख्य कंपनी की जिम्मेदारी तय होगी।

विज्ञापन

इस मोहलत का क्या होगा असर?
3 महीने की इस राहत से बैंकों को अपने सॉफ्टवेयर और कागजी प्रक्रियाओं को अपडेट करने का पर्याप्त समय मिल गया है। आम निवेशकों के लिए इसका मतलब है कि 1 अप्रैल से बाजार में अचानक लोन की कोई कमी या उथल-पुथल नहीं आएगी।

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ