5-10 लाख का बजट है तो नई कार लें या पुरानी? क्या होगा फायदे का सौदा, खरीदने से पहले जान लें पूरा हिसाब

5-10 लाख रुपये के बजट में कार खरीदने वालों के सामने सिर्फ नई कार का ही विकल्प नहीं होता. इसी बजट में पुरानी कार लेकर बड़ा सेगमेंट और ज्यादा फीचर्स भी मिल सकते हैं. तो जानते हैं इस बजट में नई कार खरीदना सही रहेगा या यूज्ड. जानिए खरीदारी से पहले किन बातों का हिसाब लगाना जरूरी है.

car buying tips

अगर कार खरीदने का प्लान तो सिर्फ नई कारों की कीमत देखकर फैसला करना जरूरी नहीं है. (Image Credit-Magnific)

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अगर कार खरीदने के लिए आपके पास 5-10 लाख रुपये का बजट है तो सिर्फ नई कारों की कीमत देखकर फैसला करना जरूरी नहीं है. इसी बजट में आपके सामने सेकेंड हैंड कार का ऑप्शन भी होता है. नई कार लेने पर वारंटी और नए फीचर्स मिलते हैं, जबकि पुरानी कार में इसी बजट में बड़ा सेगमेंट और ज्यादा फीचर्स वाली गाड़ी मिल सकती है. ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कौन-सी कार सस्ती है, बल्कि यह भी कि लंबे समय में किस ऑप्शन पर कितना खर्च आएगा.

नई कार में मिलता है वारंटी का फायदा

5-10 लाख रुपये के बजट में नई कार खरीदने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि गाड़ी बिल्कुल नई होती है और निर्माता की वारंटी मिलती है. शुरुआती सालों में मेंटेनेंस और रिपेयर का खर्च भी आमतौर पर ज्यादा अनुमानित रहता है. इसके अलावा, नई कार में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और नए सेफ्टी फीचर्स मिलने की संभावना रहती है.

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नई कार का लोन भी पड़ सकता है हल्का

अगर आप कार खरीदने के लिए लोन लेते हैं तो नई का कार का एक फायदा यहां भी मिल सकता है. नई कारों के लोग पर ब्याज दर आमतौर पर यूज्ड कार लोग के मुकाबले कम होती है. इससे EMI औक कुल ब्याज का बोझ कंट्रोल में रखने में मदद मिल सकती है. हालांकि नई कार के खरीदने के बाद शुरुआती समय में ही उसकी कीमत में गिरावट शुरू हो जाती है.

पुरानी कार में मिल सकता है बड़ा मॉडल

5-10 लाख रुपये के बजट में सेकेंड हैंड कार चुनने पर आपको नई कार के मुकाबले बड़े सेगमेंट का मॉडल मिल सकता है. जिस बजट में नई छोटी कार आती है, उतने ही पैसों में कुछ साल पुरानी बड़ी सेडान या SUV ज्यादा स्पेस और फीचर्स के साथ मिल सकती है. हालांकि, इस विकल्प में कार चुनते समय थोड़ी ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है.

Used Car खरीदते समय इन चीजों को जरूर देखें

पुरानी कार लेने से पहले उसकी उम्र, किमी, सर्विस हिस्ट्री और एक्सीडेंट रिकॉर्ड जरूर जांचना चाहिए. इसके अलावा इंश्योरेंस और बची हुई वारंटी की जानकारी भी लेना जरूरी है. एक दो साल पुरानी अच्छी तरह मेंटेन की गई कार और चाय-पांच साल पुरानी कार के मेंटेनेंस खर्च में काफी अंतर हो सकता है.

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कम कीमत का मतलब सस्ता लोन नहीं

यूज्ड कार की खरीद कीमत नई कार से कम हो सकती है, लेकिन इसका लोन जरूरी नहीं कि सस्ता हो. पुरानी कार का ब्याज दर आमतौर पर ज्यादा हो सकती है और लोन की अवधि भी छोटी रह सकती है. ऐसे में कम कीमत वाली करा की EMI आपकी उम्मीद से ज्यादा हो सकती है. इसलिए सिर्फ कार की कीमत देखकर फाइनेंस का फैसला करना सही नहीं होगा.

पुरानी कार में डेप्रिसिएशन का फायदा

नई कार की कीमत शुरुआती सालों में तेजी से घटती है. वहीं पुरनी कार खरीदने पर इस शुरुआती डेप्रिसिएशन का बड़ा हिस्सा पहले ही हो चुका होता है. इसका मतलब यह है कि अच्छ कंडीशन वाली पुरानी कार खरीदने पर फ्यूचर में कीमत गिरने का असर नई कार की तुलना में अलग हो सकता है.

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पुरानी कार में रिपेयर का खर्च बढ़ सकता है

पुरानी कार का सबसे बड़ा जोखिम मेंटेनेंस और रिपेयर से जुड़ा होता है. अगर कार की वारंटी खत्म हो चुकी है तो किसी बड़े पार्ट में खराबी आने पर अचानक बड़ा खर्च करना पड़ सकता है. इसलिए कम कीमत में बड़ी कार मिलने के साथ भविष्य में आने वाले सर्विस और रिपेयर खर्च को भी बजट में रखना चाहिए.

कीमत नहीं, पूरी लागत का हिसाब लगाएं

नई और पुरानी कार में फैसला करते समय सिर्फ एक्स-शोरूम या खरीद कीमत की तुलना न करें. EMI, कुल, ब्याज, इंश्योरेंस, नियमित सर्विस, संभावित रिपेयर, डेप्रिसिएशन और भविष्य की रीसेल वैल्यू को भी हिसाब में शामिल करें. इससे आपको दोनों ऑप्शन की वास्तविक लागत समझने में मदद मिलेगा.

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किस स्थिति में कौन सा विकल्प?

अगर आपकी प्राथमिकता वारंटी, नई कार की सुविधा, लेटेस्ट फीचर्स और शुरुआती सालों में कम अनिश्चितता है तो नई कार पर विचार किया जा सकता है. वहीं अगर आप कार की अच्छी तरह जांच कराने के लिए तैयार हैं और इसी बजट में बड़ा मॉडल या ज्यादा फीचर्स चाहते हैं तो सेकेंड हैंड कार एक विकल्प हो सकती है. आखिर में सही फैसला आपकी जरूरत, कार की कंडीशन और कुल बजट पर निर्भर करेगा.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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