Vastu Tips: मेन गेट पर जूते-चप्पल रखना पड़ सकता है भारी! वास्तु दोष के कारण हो सकते हैं ये 3 बड़े नुकसान, जानें शू रैक की सही दिशा
Vastu Tips: घर के मुख्य द्वार पर जूते-चप्पल रखने से वास्तु दोष लगता है, जिससे तीन बड़े पारिवारिक नुकसान हो सकते हैं. सुख-समृद्धि के लिए जानें शू रैक की सही दिशा और नियम.
Vastu Tips: घर को सुंदर और व्यवस्थित रखने के लिए हम अक्सर मुख्य द्वार यानी मेन गेट के पास शू रैक बना देते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार घर के मुख्य दरवाजे पर जूते-चप्पल या शू रैक रखना बेहद अशुभ माना जाता है. वास्तु में मुख्य द्वार को सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं बल्कि घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का सबसे बड़ा मुख्य स्रोत माना गया है. यदि इसी पवित्र स्थान पर बाहर की गंदगी और धूल समेटे हुए जूते-चप्पल रखे जाएं तो घर में आने वाली पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह पूरी तरह से रुक जाता है. प्रवेश द्वार पर अव्यवस्था होने के कारण घर का पूरा वातावरण प्रभावित होता है और सुख-शांति गायब होने लगती है.
परिवार में बढ़ सकती है ये परेशानी
वास्तु मान्यताओं के अनुसार यदि मुख्य द्वार के ठीक सामने या बिल्कुल पास में जूते-चप्पल बिखरे रहते हैं तो इससे माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं. इसके कारण घर में धन से जुड़ी परेशानियां लगातार बढ़ने लगती हैं और परिवार की आर्थिक तरक्की की रफ्तार बहुत धीमी पड़ जाती है. जूते-चप्पल अपने साथ बाहर की नकारात्मकता लेकर आते हैं जिससे घर के अंदर का माहौल खराब होता है. वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक मुख्य द्वार पर शू रैक होने से परिवार के सदस्यों के बीच बिना बात का मानसिक तनाव बढ़ता है और लोगों में छोटी-छोटी बातों पर आपसी विवाद होने लगते हैं. इसके साथ ही यह दोष नौकरी, व्यापार और प्रोफेशनल लाइफ में भी बड़ी रुकावटें पैदा करता है.
यदि आप अपने घर में जूतों की अलमारी रखना चाहते हैं तो वास्तु के अनुसार इसके लिए पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा को सबसे बेहतर और उत्तम माना गया है. इसके अलावा आप चाहें तो उत्तर-पश्चिम दिशा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि ये दिशाएं बाहरी ऊर्जा को संतुलित रखने में मददगार साबित होती हैं. इसके विपरीत उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में भूलकर भी जूते-चप्पल नहीं रखने चाहिए क्योंकि ईशान कोण को देवताओं का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है. घर में हमेशा बंद होने वाली लकड़ी या मेटल की शू कैबिनेट का ही उपयोग करें क्योंकि खुली रैक की तुलना में बंद अलमारी जूतों की बदबू और गंदगी को बाहर फैलने से रोकती है.
जगह की कमी हो तो अपनाएं ये आसान उपाय
आजकल फ्लैट्स और छोटे घरों में जगह की कमी के कारण मजबूरी में शू रैक को मुख्य द्वार के पास ही रखना पड़ता है. ऐसी स्थिति में अलमारी को दरवाजे के ठीक सामने रखने के बजाय थोड़ा साइड में छिपाकर रखें और मुख्य गेट से थोड़ी दूरी जरूर बनाए रखें. इसके साथ ही घर में सालों पुराने, टूटे-फूटे और अनुपयोगी जूते-चप्पल जमा करके बिल्कुल न रखें और समय-समय पर शू रैक की सफाई करते रहें. मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा रखें और वहां सुंदर नेम प्लेट या हरे-भरे पौधे लगाएं. जूतों की बदबू को दूर करने के लिए अलमारी के अंदर कपूर या लौंग रखें ताकि घर का मुख्य प्रवेश द्वार हमेशा सकारात्मक ऊर्जा से महकता रहे.
Vastu Tips: घर को सुंदर और व्यवस्थित रखने के लिए हम अक्सर मुख्य द्वार यानी मेन गेट के पास शू रैक बना देते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार घर के मुख्य दरवाजे पर जूते-चप्पल या शू रैक रखना बेहद अशुभ माना जाता है. वास्तु में मुख्य द्वार को सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं बल्कि घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का सबसे बड़ा मुख्य स्रोत माना गया है. यदि इसी पवित्र स्थान पर बाहर की गंदगी और धूल समेटे हुए जूते-चप्पल रखे जाएं तो घर में आने वाली पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह पूरी तरह से रुक जाता है. प्रवेश द्वार पर अव्यवस्था होने के कारण घर का पूरा वातावरण प्रभावित होता है और सुख-शांति गायब होने लगती है.
परिवार में बढ़ सकती है ये परेशानी
वास्तु मान्यताओं के अनुसार यदि मुख्य द्वार के ठीक सामने या बिल्कुल पास में जूते-चप्पल बिखरे रहते हैं तो इससे माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं. इसके कारण घर में धन से जुड़ी परेशानियां लगातार बढ़ने लगती हैं और परिवार की आर्थिक तरक्की की रफ्तार बहुत धीमी पड़ जाती है. जूते-चप्पल अपने साथ बाहर की नकारात्मकता लेकर आते हैं जिससे घर के अंदर का माहौल खराब होता है. वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक मुख्य द्वार पर शू रैक होने से परिवार के सदस्यों के बीच बिना बात का मानसिक तनाव बढ़ता है और लोगों में छोटी-छोटी बातों पर आपसी विवाद होने लगते हैं. इसके साथ ही यह दोष नौकरी, व्यापार और प्रोफेशनल लाइफ में भी बड़ी रुकावटें पैदा करता है.
यदि आप अपने घर में जूतों की अलमारी रखना चाहते हैं तो वास्तु के अनुसार इसके लिए पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा को सबसे बेहतर और उत्तम माना गया है. इसके अलावा आप चाहें तो उत्तर-पश्चिम दिशा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि ये दिशाएं बाहरी ऊर्जा को संतुलित रखने में मददगार साबित होती हैं. इसके विपरीत उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में भूलकर भी जूते-चप्पल नहीं रखने चाहिए क्योंकि ईशान कोण को देवताओं का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है. घर में हमेशा बंद होने वाली लकड़ी या मेटल की शू कैबिनेट का ही उपयोग करें क्योंकि खुली रैक की तुलना में बंद अलमारी जूतों की बदबू और गंदगी को बाहर फैलने से रोकती है.
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जगह की कमी हो तो अपनाएं ये आसान उपाय
आजकल फ्लैट्स और छोटे घरों में जगह की कमी के कारण मजबूरी में शू रैक को मुख्य द्वार के पास ही रखना पड़ता है. ऐसी स्थिति में अलमारी को दरवाजे के ठीक सामने रखने के बजाय थोड़ा साइड में छिपाकर रखें और मुख्य गेट से थोड़ी दूरी जरूर बनाए रखें. इसके साथ ही घर में सालों पुराने, टूटे-फूटे और अनुपयोगी जूते-चप्पल जमा करके बिल्कुल न रखें और समय-समय पर शू रैक की सफाई करते रहें. मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा रखें और वहां सुंदर नेम प्लेट या हरे-भरे पौधे लगाएं. जूतों की बदबू को दूर करने के लिए अलमारी के अंदर कपूर या लौंग रखें ताकि घर का मुख्य प्रवेश द्वार हमेशा सकारात्मक ऊर्जा से महकता रहे.
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