Shani Rahu Gochar: ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य के अनुसार, ज्योतिष शास्त्र की एक प्राचीन और प्रमुख शाखा है मेदिनी ज्योतिष, जिसमें राजनीति, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, मौसम आदि पहलुओं का अध्ययन कर भविष्यवाणी की जाती है. मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, विश्व में चल रहे दुनिया की बड़ी उथल-पुथल, जैसे- अमेरिका-ईरान युद्ध, होर्मुज स्ट्रेट का संकट और वैश्विक तेल संकट सीधा संबंध ग्रह शनि, राहु और मंगल के गोचर से है.
तेल, कच्चे तेल यानी क्रूड पेट्रोलियम और जमीन के नीचे से निकलने वाले पदार्थों के कारक ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह हैं. वहीं अचानक होने वाले युद्ध, धोखे, छलावा और कूटनीतिक भ्रम के कारक राहु ग्रह हैं.
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राहु-शनि की खगोलीय स्थिति
वर्तमान में राहु कुंभ राशि में हैं, जो वायु तत्व की राशि है. वहीं शनि ग्रह मीन राशि में हैं, जो जल तत्व की राशि है. यही कारण है कि पूरा युद्ध संकट जमीनी मोर्चे से ज्यादा हवाई है और समुद्री रास्तों, जैसे कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), पर केंद्रित हो गया है. मिसाइल से हवाई हमले अचानक होने का कारण राहु का कुंभ में होना है.
मंगल की उग्र स्थिति
ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य बताते हैं कि जब युद्ध शुरू हुआ तब मीन राशि में मंगल की युति शनि के साथ थी. यह कई बार देखा गया है कि जब भी शनि और राहु के साथ मंगल का क्रूर संबंध बनता है, अंगारक योग और रौद्र संवत जैसी स्थितियां पैदा होती हैं, जो युद्ध, सैन्य कारवाई और विनाशकारी घटनाएं करवा देती हैं.
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मई-जून 2026 और आगे की स्थिति
मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, आने वाले कुछ सप्ताह बहुत संवेदनशील रहने वाले हैं. 18 मई से 28 मई 2026 तक अत्यधिक उतार-चढ़ाव का दौर रहेगा. इस समय सैन्य बयानबाजी, ड्रोन हमले और तेल बाजार में भारी अस्थिरता बनी रहेगी. वहीं, 29 मई से 3 जून 2026 तक अत्यधिक भ्रम रहेगा.
ज्योतिषाचार्य के अनुसार इसके बाद 4 जून से 10 जून 2026 तक हों का क्रूर प्रभाव थोड़ा धीमा पड़ेगा और युद्धविराम या समझौते के लिए दवाब बेनेगा. मेदिनी ज्योतिषीय गणना बताती है कि यह संकट आसानी से पूरी तरह शांत नहीं होगा और इसके और भी डीप नेगेटिव असर 2027 में दिखेंगे, जब शनि ग्रह मंगल की राशि मेष में गोचर कर नीच के हो जाएंगे.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन के निजी विचार हैं। ये केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
Shani Rahu Gochar: ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य के अनुसार, ज्योतिष शास्त्र की एक प्राचीन और प्रमुख शाखा है मेदिनी ज्योतिष, जिसमें राजनीति, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, मौसम आदि पहलुओं का अध्ययन कर भविष्यवाणी की जाती है. मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, विश्व में चल रहे दुनिया की बड़ी उथल-पुथल, जैसे- अमेरिका-ईरान युद्ध, होर्मुज स्ट्रेट का संकट और वैश्विक तेल संकट सीधा संबंध ग्रह शनि, राहु और मंगल के गोचर से है.
तेल, कच्चे तेल यानी क्रूड पेट्रोलियम और जमीन के नीचे से निकलने वाले पदार्थों के कारक ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह हैं. वहीं अचानक होने वाले युद्ध, धोखे, छलावा और कूटनीतिक भ्रम के कारक राहु ग्रह हैं.
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राहु-शनि की खगोलीय स्थिति
वर्तमान में राहु कुंभ राशि में हैं, जो वायु तत्व की राशि है. वहीं शनि ग्रह मीन राशि में हैं, जो जल तत्व की राशि है. यही कारण है कि पूरा युद्ध संकट जमीनी मोर्चे से ज्यादा हवाई है और समुद्री रास्तों, जैसे कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), पर केंद्रित हो गया है. मिसाइल से हवाई हमले अचानक होने का कारण राहु का कुंभ में होना है.
मंगल की उग्र स्थिति
ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य बताते हैं कि जब युद्ध शुरू हुआ तब मीन राशि में मंगल की युति शनि के साथ थी. यह कई बार देखा गया है कि जब भी शनि और राहु के साथ मंगल का क्रूर संबंध बनता है, अंगारक योग और रौद्र संवत जैसी स्थितियां पैदा होती हैं, जो युद्ध, सैन्य कारवाई और विनाशकारी घटनाएं करवा देती हैं.
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मई-जून 2026 और आगे की स्थिति
मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, आने वाले कुछ सप्ताह बहुत संवेदनशील रहने वाले हैं. 18 मई से 28 मई 2026 तक अत्यधिक उतार-चढ़ाव का दौर रहेगा. इस समय सैन्य बयानबाजी, ड्रोन हमले और तेल बाजार में भारी अस्थिरता बनी रहेगी. वहीं, 29 मई से 3 जून 2026 तक अत्यधिक भ्रम रहेगा.
ज्योतिषाचार्य के अनुसार इसके बाद 4 जून से 10 जून 2026 तक हों का क्रूर प्रभाव थोड़ा धीमा पड़ेगा और युद्धविराम या समझौते के लिए दवाब बेनेगा. मेदिनी ज्योतिषीय गणना बताती है कि यह संकट आसानी से पूरी तरह शांत नहीं होगा और इसके और भी डीप नेगेटिव असर 2027 में दिखेंगे, जब शनि ग्रह मंगल की राशि मेष में गोचर कर नीच के हो जाएंगे.
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