Grah ki Chaal: जब कभी घर का पालतू कुत्ता बिना वजह रातभर रोता है या गाय अचानक दाना-पानी छोड़ देती है, तो इसे सिर्फ मौसम का असर मानकर चुप न बैठें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ब्रह्मांड में घूमते ग्रहों की चाल का असर सिर्फ मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर जीवित प्राणी के व्यवहार और स्वास्थ्य पर इसकी गहरी छाप पड़ती है। खासतौर पर राहु, केतु और शनि जैसे भारी ग्रह जब अपनी चाल बदलते हैं तो जानवरों की फितरत अचानक बदल सकती है।
हर ग्रह का अपना पशु
वैदिक ज्योतिष की मानें तो हर ग्रह एक विशेष जीव का स्वामी है। तेजस्वी सूर्य का संबंध सीधे सिंह, चीते और गरुड़ जैसे शाही प्राणियों से जुड़ा है। शांत चंद्रमा खरगोश, सफेद गाय और मछलियों को नियंत्रित करता है। मंगल की उग्रता घोड़ों, भेड़-बकरियों और लड़ाकू शिकारी कुत्तों में दिखती है। बुध ग्रह तोते, लोमड़ी और चतुर बंदरों का कारक है। बृहस्पति हाथी और हंस जैसे बुद्धिमान जीवों पर शासन करता है, तो शुक्र कबूतर और सजावटी पक्षियों को सुंदरता देता है।
ग्रह की चाल का असर
- शनि की गति का असर सबसे ज्यादा काले कुत्तों, भैसों और कछुओं पर पड़ता है।
- अगर घर में पला कुत्ता बार-बार बिना किसी कारण के रोए या काटने पर उतारू हो जाए तो यह शनि की वक्री चाल का संकेत होता है।
- राहु से पीड़ित बिल्ली और सांप छिपकर वार करते हैं।केतु की ऊर्जा कुत्तों और चूहों के जरिए बाहर आती है।
- कबूतर और तोते को दाना डालना बुध और राहु दोनों को एक साथ शांत करने का सरल उपाय है।
जानवर भी देते हैं पूर्वाभास
पालतू जानवर ग्रहों की नकारात्मक तरंगों के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं। जब राहु या शनि की स्थिति भारी हो रही होती है, तो वे अकारण बीमार पड़ जाते हैं, खाना छोड़ देते हैं या डरे हुए से कोने में दुबके रहते हैं। कुत्ते का आधी रात को सिर उठाकर रोना अक्सर परिवार पर आने वाले केतु प्रकोप का संकेत माना जाता है। इसके उलट, अगर ग्रह अनुकूल हों तो वही जानवर घर की निगेहबानी कर सकारात्मकता भर देते हैं।
पशु-पक्षी से ग्रह शांति उपाय
इन अशुभ प्रभावों को काटने के लिए ज्योतिष में जानवरों की सेवा को सबसे बड़ा उपाय बताया गया है। इस तरह प्रकृति का यह चक्र ग्रहों, मनुष्यों और जानवरों को एक अटूट डोर में बांधता है:
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.