Pankaj Mishra
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Chanakya Niti : आचार्य चाणक्य भारत ही नहीं दुनियाभर के राजनीति, कूटनीति और अर्थशास्त्र के पितामह माने जाते हैं। सदियों पहले आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गई नीतियां भारत समेत दुनिया भर के देशों में प्रसिद्ध है। लोग उनकी नीतियों को अपने जीवन में उतार कर सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। चाणक्य नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी प्राचीन काल में थी।
आचार्य चाणक्य (Chanakya Niti) ने अपने नीतियों में बच्चे, बड़े, बुजुर्ग सभी को कोई न कोई सीख दी है। चाणक्य ने अपने नीति यानी ज्ञान में माता-पिता और संतान के बारे में भी बहुत कुछ बताया है। चाणक्य नीति ने माता-पिता को अपनी संतान की शिक्षा, संस्कार और सेहत को लेकर सदैव सतर्क रहने की चाहिए।
आचार्य चाणक्य के मुताबिक बच्चों पर सबसे ज्यादा प्रभाव उनके मां-बाप का पड़ता है। माता-पिता ही अपने बच्चों के पहले शिक्षक होते हैं। चाणक्य कहते हैं कि माता-पिता को संतान को अच्छे संस्कार देने चाहिए। संतान को लेकर हर माता-पिता को गंभीर होना चाहिए।
आचार्य चाणक्य (Chanakya Niti) के मुताबिक बच्चों को योग्य और सफल बनाने के लिए माता-पिता को कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। दरअसल बच्चें माता-पिता की अच्छी आदतों को तो ग्रहण करते ही हैं, लेकिन वो गलत आदतों से बहुत जल्द प्रभावित होते हैं। ऐसे में बच्चों के मामले में चाणक्य की इन बातों को नहीं भूलना चाहिए।
आचार्य चाणक्य (Chanakya Niti) ने अपने नीति में बच्चों को लेकर कहा है कि हर इंसान को उनके सामने सोच विचार कर ही बातें करना चाहिए, क्योंकि बच्चे छोटे पौधे की तरह होते हैं। ऐसे में आप उन्हें जैसा ढालेंगे वे वैसा ही फल देंगे। चाणक्य के मुताबिक अगर आप चाहते हैं कि बच्चों की बोली और भाषा अच्छी हो तो इसके लिए सबसे पहले माता-पिता को अपनी बोली पर ध्यान देना चाहिए। इसलिए उन्हें अपनी बोली और भाषा को लेकर ज्यादा सावधानी बरतना चाहिए। क्योंकि व्यक्ति की बोली और भाषा बहुत कुछ बयां करती है।
आचार्य चाणक्य नीति (Chanakya Niti) के मुताबिक बच्चों के सामने माता-पिता को झूठ और दिखावा नहीं करना चाहिए। अगर आप बच्चों के सामने झूठ बोलेंगे या उन्हें अपने झूठ में शामिल करेंगे तो उनकी नजर में आप अपना सम्मान खो देंगे। इसलिए कोशिश करें कि बच्चों को झूठ और दिखावे से दूर ही रखें, नहीं तो इससे आगे चलकर आपको कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
आचार्य चाणक्य का कहना है कि आपसी बातचीत के दौरान माता-पिता को एक दूसरे का सम्मान और आदर का खास ध्यान रखना चाहिए। अगर इनके आपसी रिश्तों में आदर और सम्मान नहीं है तो इसका असर बच्चों के दिमाग और मन पर पड़ता है। ऐसे में इसका खास ध्यान रखना चाहिए।
अक्सर देखा जाता है कि बच्चों के सामने ही माता-पिता आपस में एक दूसरे से लड़ने-झगड़ने लगते हैं। पति-पत्नी एक दूसरे की कमियां निकालने लगते हैं। चाणक्य नीति के मुताबिक ऐसा करने से वो अपने बच्चों की नजर में सम्मान खोने लगते हैं। बच्चों की नजर में उनका कोई सम्मान नहीं रह जाता और ऐसे में कई बार ऐसा हो जाता है कि बच्चे भी आपका अपमान करने से नहीं चूकते। इसलिए ऐसा करने से बचें।
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