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क्या हैं Rare Earth Elements, कौन-सी चीजें बनती इनसे, दुनिया में किस-किस के पास है भंडार, भारत के पास कितना स्टॉक?

Rare Earth Elements: चीन के पास दुनिया में सबसे ज्यादा रेयर अर्थ एलिमेंट्स हैं, लेकिन इन्हें लेकर चीन ने अब आंखें दिखाना शुरू कर दिया है। इसलिए भारत समेत दुनियाभर के कई देश इनके लिए चीन पर अपनी निर्भरता खत्म करने के लिए कदम उठाने लगे हैं। आइए रेयर अर्थ एलिमेंट्स के बारे में जानते हैं...

Author Edited By : Khushbu Goyal
Updated: Feb 22, 2026 14:58
Rare Earth Elements
दुनिया में 90 प्रतिशत से ज्यादा रेयर अर्थ एलिमेंट्स चीन के पास हैं।

Rare Earth Elements Explainer: आजकल भारत समेत पूरी दुनिया में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के अलावा रेयर अर्थ एलिमेंट्स की भी खूब चर्चा हो रही है। जी हां, रेयर अर्थ एलिमेंट्स को रेयर अर्थ मिनरल्स और रेयर अर्थ मेटल्स भी कहते हैं और ये आज के हर देश की जरूरत हैं। अगर ये एलिमेंट्स न हों तो स्मार्टफोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट, गैजेट, सेमीकंडक्टर्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, सोलर पैनल, विमानों के इंजन, मेडिकल इंस्ट्रूमेंट, तेल की रिफाइनिंग, मिसाइलें और रडार सिस्टम नहीं बन पाएंगे।

भारत और ब्राजील की रेयर अर्थ एलिमेंट्स डील

आज हम रेयर अर्थ एलिमेंट्स की चर्चा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि भारत ने ब्राजील के साथ क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स को लेकर समझौता हुआ है। 21 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा की मौजूदगी में डील पर साइन हुए। इस डील का मकसद दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स का आदान-प्रदान करना और सीधी सप्लाई की चेन को मजबूत करना है, ताकि दोनों देशों की इन एलिमेंट्स के लिए चीन पर निर्भरता खत्म हो सके।

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भारत ने जॉइन किया पैक्स सिलिका अलायंस

ब्राजील से समझौता करने से एक दिन पहले 20 फरवरी को भारत ने अमेरिका का पैक्स सिलिका अलायंस जॉइन किया। इस गठबंधन में भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजरायल, जापान, कतर, साउथ कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यूनाइटेड किंगडम हैं। वहीं कनाडा, यूरोपीयन यूनियन, नीदरलैंड, ताइवान और आर्थिक सहयोगिता और विकास के लिए संगठन (OECD) इस अलायंस से साइन किए बिना जुड़े हैं। AI और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए यह गठबंधन बनाया गया है।

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भारत के दोनों समझौतों का चीन से कनेक्शन

बता दें कि रेयर अर्थ एलिमेंट्स को लेकर ब्राजील के साथ डील और पैक्स सिलिका अलायंस जॉइन करने का कनेक्शन चीन से है। क्योंकि रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर चीन का एकाधिकार है। 90 प्रतिशत रेयर अर्थ एलिमेंट्स चीन के पास हैं। चीन की उनकी माइनिंग करता है और चीन ही दुनिया को इन्हें सप्लाई करता है, लेकिन चीन ने अप्रैल 2025 में इनके निर्यात पर पाबंदी लगा दी, जिससे दुनियाभर में ऑटो सेक्टर, ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री प्रभावित हुई। भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल और डिफेंस सेक्टर पर असर पड़ा।

चीन नहीं देगा तो क्या करेंगे दुनियाभर के देश?

चीन की पाबंदी से कई देशों की टेक्नोलॉजिकल ग्रोथ प्रभावित हुई, इसलिए रेयर अर्थ एलिमेंट्स के वैश्विक बाजार में चीन के दबदबे को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। भारत ने ब्राजील से समझौता किया और अमेरिका ने 15 देशों के साथ मिलकर पैक्स सिलिका अलायंस बनाया। ऑस्ट्रेलिया और जापान भी अन्य देशों के साथ रेयर अर्थ एलिमेंट्स की डील करने की सोच रहे हैं। भारत को भी अपना खनन बढ़ाना होगा और प्रोसेसिंग टेक्निक में आत्मनिर्भर बनना होगा। विदेशों के साथ डील, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और घरेलू कंपनियों की जरूरत है।

रेयर अर्थ एलिमेंट्स क्या और कौन-कौन से हैं?

रेयर अर्थ एलिमेंट्स वे रासायनिक तत्व हैं, जो लैंथेनाइड्स ग्रुप का हिस्सा और बेहद दुर्लभ होते हैं। ये जमीन अंदर पाए जाते हैं। देखने में चांदी की तरह चमकदार और हल्के होते हैं। रेयर अर्थ एलिमेंट्स में लैंथेनाइड्स युक्त 15 मेटलस लैंथेनम (La)-57, सेरियम (Ce)-58, प्रेसियोडिमियम (Pr)-59, नियोडिमियम (Nd)-60, प्रोमेथियम (Pm)-61, समैरियम (Sm)-62, यूरोपियम (Eu)-63, गैडोलीनियम (Gd)-64, टेरबियम (Tb)-65, डिस्प्रोसियम (Dy)-66, होल्मियम (Ho)-67, अर्बियम (Er)-68, थ्यूलियम (Tm)-69, येटरबियम (Yb)-70, ल्यूटेटियम (Lu)-71 और लैंथेनाइड्स के समान गुणों वाले 2 अन्य तत्व स्कैंडियम (Sc)-21, यट्रियम (Y)-39 शामिल हैं।

दुनिया में किस-किस के पास कितना भंडार?

US जियोलॉजिकल सर्वे (जनवरी 2025) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में 9 करोड़ टन रेयर अर्थ एलिमेंट्स हैं। इनमें से 4.4 करोड़ टन रेयर अर्थ एलिमेंट्स चीन के पास हैं। इसके बाद ब्राजील के पास 2.1 करोड़ टन, भारत के पास 69 लाख टन रेयर अर्थ एलिमेंट्स हैं। इनके बाद ऑस्ट्रेलिया, रूस, वियतनाम और अमेरिका जैसे देश आते हैं, जिनके पास रेयर अर्थ एलिमेंट्स हैं। चीन रेयर अर्थ एलिमेंट्स का केवल खनन ही नहीं करता, बल्कि प्रोसेसिंग भी करता है। इसलिए रेयर अर्थ एलिमेंट्स की वैश्विक सप्लाई चेन पर उसका दबदबा है और इनके जरिए वह राजनीतिक और आर्थिक दबाव बनाता है।

रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर भारत की क्या स्थिति?

बता दें कि भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार है, लेकिन रेयर अर्थ एलिमेंट्स के उत्पादन में भारत बहुत पीछे हैं। साल 2024 में भारत ने सिर्फ 2900 टन रेयर अर्थ एलिमेंट्स का उत्पादन किया था, जबकि चीन ने 2.7 लाख टन रेयर अर्थ एलिमेंट्स उत्पादित किए थे। इस अंतर को देखते हुए भारत सरकार ने ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ शुरू किया है। इस मिशन के तहत साल 2031 तक 1200 जगहों पर सर्वे करके 30 प्रमुख खनिज भंडारों की पहचान करके रेयर अर्थ एलिमेंट्स की माइनिंग की जाएगी। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन क्रिटिकल मिनरल्स भी बनाएंगे।

First published on: Feb 22, 2026 02:49 PM

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