अमेरिका और ईरान का युद्ध खत्म हो सकता है, लेकिन युद्ध खत्म करने की शर्त परमाणु समझौते की बजाय होर्मुज स्ट्रेट होगी. यह दावा वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बंद करने के लिए युद्ध शुरू किया था, लेकिन युद्ध करते-करते इसकी वजह होर्मुज स्ट्रेट बन गई, इसलिए अब अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल देता है तो राष्ट्रपति ट्रंप परमाणु समझौता करने की जिद छोड़ सकते हैं और युद्ध खत्म हो सकता है.
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ईरान से समझौते का आधार बनी होर्मुज स्ट्रेट
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का फोकस अब परमाणु समझौते पर नहीं है, बल्कि वे अब गल्फ देशों में सैन्य अभियान को खत्म करना चाहते हैं. युद्धविराम को बढ़ाना चाहते हैं और होर्मुज स्ट्रेट को बहाल कराना चाहते हैं. इसके लिए उनकी विशेष टीम ईरान के साथ बातचीत करने में जुटी है. ट्रंप और उनकी टीम होर्मुज स्ट्रेट को ईरान से समझौते का आधार बना रही है, जिसके फाइनल होते ही ट्रंप युद्ध खत्म कर देंगे, लेकिन परमाणु समझौता करने का उनका मकसद पूरा नहीं होगा.
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होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान ने रखी शर्तें
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं, जैसे युद्ध से ईरान के हुए नुकसान की भरपाई अमेरिका को करनी होगी. ईरान की बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करनी होगी. मिडिल ईस्ट से अमेरिकी सेना को वापस बुलाना होगा. ईरान पर आज तक लगाए गए सभी प्रतिबंध हटाने होंगे और फ्रीज की प्रॉपर्टी-फंड रिलीज करना होगा. होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए अमेरिका को यह मांगें माननी होंगी, अन्यथा ईरान तो लंबे समय तक चले वाले टकराव की तैयारी किए बैठा है.
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कच्चा तेल और गैसोलीन चुनाव में बन सकते मुद्दे
राष्ट्रपति ट्रंप के पास अब ईरान युद्ध को जीतने का आधार भी पहले की तरह मजबूत नहीं रहा है, क्योंकि एक और कच्चे तेल के बढ़ते दामों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है तो दूसरी तरफ अमेरिका में गैसोलीन की कीमतें युद्ध के कारण लगभग 4 डॉलर प्रति गैलन के हाई लेवल तक पहुंच गई हैं, जो मिड टर्म इलेक्शन के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. कच्चा तेल और गैसोलीन मुद्दा न बने, इसलिए राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार कहते रहते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट ओपन है और व्यापार जारी है.
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