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ईरान की जंग में US ने बहाए अरबों डॉलर, पेंटागन ने पहली बार गिनाए युद्ध के महाखर्चे

US-Iran War Cost: पेंटागन के खुलासे ने उड़ाए अमेरिका के होश! ईरान युद्ध में अब तक फूंके जा चुके हैं 25 अरब डॉलर, जो नासा के सालाना बजट के बराबर है. जानिए कैसे इस युद्ध ने ट्रंप की कुर्सी और आम आदमी की जेब पर संकट खड़ा कर दिया है.

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US-Iran War Cost: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका अब तक 25 अरब डॉलर (करीब 2.10 लाख करोड़ रुपये) खर्च कर चुका है. यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ (NASA) के इस साल के कुल बजट के बराबर है.

रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से ठीक छह महीने पहले आए इन आंकड़ों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. विपक्षी डेमोक्रेट्स ने इस अलोकप्रिय युद्ध को बढ़ती महंगाई और आम जनता की आर्थिक बदहाली से जोड़ना शुरू कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध की वजह से अमेरिका में गैसोलीन और खाद की कीमतें आसमान छू रही हैं. गैसोलीन की औसत कीमत पिछले चार सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है.

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पेंटागन और सांसदों के बीच तीखी बहस

सदन की सशस्त्र सेवा समिति के सामने नियंत्रक जूल्स हर्स्ट ने बताया कि खर्च का बड़ा हिस्सा गोला-बारूद पर खर्च हुआ है. हालांकि, विपक्षी सांसद एडम स्मिथ ने सवाल उठाया कि पेंटागन इस आंकड़े तक कैसे पहुंचा, क्योंकि शुरुआती अनुमानों में खर्च काफी कम बताया गया था.
वहीं, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने युद्ध के खर्च का पुरजोर बचाव किया. उन्होंने डेमोक्रेट्स को ‘निकम्मा’ और ‘हार मानने वाला’ बताते हुए सवाल किया— “ईरान को परमाणु बम हासिल करने से रोकने के लिए आप कितना भुगतान करेंगे? क्या यह कीमत देश की सुरक्षा से बड़ी है?”

जंग की भारी कीमत: जान भी और माल भी

28 फरवरी से शुरू हुए इस हमले में अब तक 13 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं और सैकड़ों घायल हैं. युद्ध के कारण तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बाधित होने से दुनिया भर के बाजारों में खलबली है.

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गिरती लोकप्रियता ने बढ़ाई ट्रंप की चिंता

ताजा रॉयटर्स/इप्सोस सर्वे के मुताबिक, ईरान के साथ इस संघर्ष को लेकर अमेरिकी जनता का समर्थन लगातार घट रहा है. मार्च में जहां 38% लोग युद्ध के साथ थे, वहीं अब यह आंकड़ा गिरकर सिर्फ 34% रह गया है. गिरती लोकप्रियता और बढ़ती महंगाई ने नवंबर में होने वाले सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है.

First published on: Apr 30, 2026 06:31 AM

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Vijay Jain

सीनियर न्यूज एडिटर विजय जैन को पत्रकारिता में 23 साल से अधिक का अनुभव है.  न्यूज 24 से पहले विजय दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में अलग-अलग जगहों पर रिपोर्टिंग और टीम लीड कर चुके हैं, हर बीट की गहरी समझ है। खासकर शहर राज्यों की खबरें, देश विदेश, यूटिलिटी और राजनीति के साथ करेंट अफेयर्स और मनोरंजन बीट पर मजबूत पकड़ है. नोएडा के अलावा दिल्ली, गाजियाबाद, गोरखपुर, जयपुर, चंडीगढ़, पंचकूला, पटियाला और जालंधर में काम कर चुके हैं इसलिए वहां के कल्चर, खानपान, व्यवहार, जरूरत आदि की समझ रखते हैं. प्रिंट के कार्यकाल के दौरान इन्हें कई मीडिया अवार्ड और डिजिटल मीडिया में दो नेशनल अवार्ड भी मिले हैं. शिकायत और सुझाव के लिए स्वागत है- Vijay.kumar@bagconvergence.in

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