US Iran Nuclear Deal: अमेरिका और ईरान के बीच साढ़े तीन महीने से चल रही जंग और भारी तबाही के बाद आखिरकार एक अंतरिम शांति समझौते (MoU) पर मुहर लग गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस डील के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम के कारण लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से पूरी तरह आजादी मिल जाएगी? आइए समझते हैं ईरान पर लगी पाबंदियों और इस डील का पूरा गणित.
क्या हैं ईरान पर लगे मौजूदा प्रतिबंध?
ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और उसकी क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों की वजह से उस पर दुनिया भर की पाबंदियों का एक बड़ा जाल बिछा हुआ है. इसमें मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र (UN), अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के कड़े प्रतिबंध शामिल हैं. इन सैंक्शन्स ने ईरान के बैंकिंग सिस्टम को ठप कर दिया था और उसके तेल व्यापार पर पूरी तरह रोक लगा दी थी. साल 2015 में हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते (JCPOA) के बाद ईरान को कुछ राहत जरूर मिली थी, लेकिन 2018 में डोनाल्ड ट्रंप ने इस डील से हाथ पीछे खींच लिए, जिसके बाद पाबंदियां दोबारा लागू हो गईं. इसके साथ ही ‘स्नैपबैक’ मैकेनिज्म के जरिए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध भी पिछले साल फिर से एक्टिव हो गए.
इस नई डील से ईरान को क्या राहत मिलेगी?
इस नए समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से हटा लिया है. इसका मतलब है कि ईरान अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से अपना कच्चा तेल (Crude Oil) बेच सकेगा. इसके अलावा, ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने और विदेशी बैंकों में फंसे अपने करीब 25 अरब डॉलर के फंसे हुए फंड को निकालने का रास्ता साफ होता दिख रहा है.
यूरोपीय संघ (EU) का क्या है रुख?
भले ही अमेरिका ने प्रतिबंधों में ढील दे दी हो, लेकिन यूरोपीय संघ (EU) ने अभी अपने रुख में नरमी नहीं दिखाई है. ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने स्पष्ट किया है कि 27 देशों का यह ब्लॉक फिलहाल ईरान पर लगे अपने प्रतिबंधों को नहीं हटाएगा. हालांकि, इटली, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों ने कहा है कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ‘स्पष्ट और जांचने योग्य कदम’ उठाता है, तो वे प्रतिबंध हटाने को तैयार हैं.
आगामी 60 दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच गहन बातचीत का दौर चलेगा, जिसमें ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक को कम करने और परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी पर अंतिम फैसला होगा. जब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह वैश्विक भरोसा बहाल नहीं हो जाता, तब तक पाबंदियों का यह जाल पूरी तरह से कटना नामुमकिन नजर आता है.
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