सऊदी-पाकिस्तान की दोस्ती से 'नाराज' UAE ने छोड़ा OPEC? जानिए- भारत पर क्या होगा असर

UAE ने ‘पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन’ (OPEC) से अलग होने का एक अहम फैसला लिया. UAE को ईरान की तरफ से जबरदस्त दबाव का सामना करना पड़ा, जबकि ‘खाड़ी सहयोग परिषद’ (GCC) के देशों से उसे बहुत कम समर्थन मिला.

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UAE ने ‘पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन’ (OPEC) से अलग होने का एक अहम फैसला लिया. UAE को ईरान की तरफ से जबरदस्त दबाव का सामना करना पड़ा, जबकि ‘खाड़ी सहयोग परिषद’ (GCC) के देशों से उसे बहुत कम समर्थन मिला.

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यूएई के ऊर्जा मंत्री ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि यह फैसला ऊर्जा क्षेत्र, पेट्रोलियम सेक्टर और अन्य रणनीतियों की सावधानीपूर्वक समीक्षा के बाद लिया गया है. ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यूएई लंबे समय से ओपेक और ओपेक+ का सदस्य रहा है, लेकिन भविष्य में दुनिया को और ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होगी और मांग बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि यूएई को लगा कि यह नीतिगत फैसला लेने का सही समय है.

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यूएई और सऊदी अरब में मतभेद

यह ऐलान तब किया गया है, जब ईरान युद्ध के कारण पूरी दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ रही है. यूएई लंबे समय से ओपेक के उत्पादन प्रतिबंधों से परेशान था. हालांकि उसने ओपेक और ओपेक+ को छोड़ने का फैसला सऊदी अरब के साथ जारी विवादों के कारण किया है. ये दोनों देश कई मोर्चों पर आमने-सामने हैं. सऊदी अरब ने यूएई पर अपनी सुरक्षा को गंभीर खतरा पहुंचाने का भी आरोप लगाया है. इससे आशंका जताई जा रही है कि दुनिया में तेल को लेकर संकट और ज्यादा गंभीर हो सकता है, जिसका असर भारत पर भी पड़ सकता है. वहीं, यूएई के इस फैसले को खाड़ी देशों में फूट के तौर पर भी देखा जा रहा है.

भारत पर क्या होगा यूएई के फैसले का असर?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए ओपेक में होने वाली कोई भी हलचल सीधे भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है. अगर यूएई ओपेक के कोटा सिस्टम से बाहर होकर तेल उत्पादन को बढ़ाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आ सकती है. इससे भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता हो सकता है.

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ओपेक अक्सर तेल की कीमतों को बढ़ाने के लिए उत्पादन कम कर देता है. इससे भारत जैसे देशों को ज्यादा पैसा चुकाना पड़ता है. लेकिन अब यूएई के ओपेक से बाहर निकलने के कारण उसकी तेल की कीमतों को नियंत्रित करने की क्षमता कम होगी, जिसका सीधा फायदा भारत को होगा.

ट्रंप की बड़ी जीत माना जा रहा ये फैसला

यूएई का ओपेक से बाहर होने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है. बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ओपेक पर आरोप लगाते रहे हैं कि यह संगठन तेल कीमतों को बढ़ाककर दुनिया का शोषण करता है. ट्रंप ने अमेरिका के खाड़ी क्षेत्र को दिए जाने वाले सैन्य समर्थन को भी तेल कीमतों से जोड़ा है. उनका हमेशा से ये कहना रहा है कि अमेरिका ओपेक सदस्य देशों की रक्षा करता है, जबकि वो ऊंची तेल कीमतें लगाकर इसका फायदा उठाते हैं.

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पाकिस्तान की भूमिका से UAE नाराज?

इजरायल के बाद—जिसने अमेरिका के साथ मिलकर तेहरान के खिलाफ हमले शुरू किए थे—UAE ही वह देश था जिसे ईरान के हमलों का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ा. हाल के दिनों में, UAE के दूतों ने इस बात पर जोर दिया है कि ईरान ने किस तरह मिसाइलों और ड्रोन के ज़रिए उसके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया. अबू धाबी के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 8 अप्रैल तक UAE की हवाई सुरक्षा प्रणालियों ने 537 बैलिस्टिक मिसाइलों, 26 क्रूज मिसाइलों और 2,256 ड्रोन को बीच में ही रोक दिया.

चैथम हाउस के एसोसिएट फेलो नील क्विलियम ने ‘द फाइनेंशियल टाइम्स’ को बताया कि मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका से UAE नाराज हो गया, क्योंकि ‘अभी वह चीजों को सिर्फ ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ (यानी पूरी तरह से सही या गलत) नजरिए से देख रहा है.’

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ईरान के हमले के बाद UAE के रुख के बारे में FT से बात करते हुए क्विलियम ने कहा, ‘इसमें कोई निष्पक्षता नहीं है, कोई बीच का रास्ता नहीं है; और अगर आप मध्यस्थता कर रहे हैं, तो आप बीच के रास्ते पर ही होते हैं.’

लंदन के इस अखबार ने बताया कि UAE ने इस्लामाबाद को यह संकेत दिया था कि “वह चाहता है कि इस्लामाबाद ईरान के खिलाफ ज्यादा सख्त रुख अपनाए.’

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लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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