21 जुलाई को घूमने के इरादे से तीन भारतीय नागरिक बैंकॉक पहुंचे थे, लेकिन उनका सफर कुछ ही घंटों में डरावने अनुभव में बदल गया. आरोप है कि उन्हें झांसा देकर अगवा किया गया और पटाया के एक गुप्त ठिकाने पर कैद कर लिया गया. वहां उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया और परिवार से फिरौती वसूलने की कोशिश की गई. करीब एक सप्ताह बाद थाई पुलिस की कार्रवाई में तीनों को बचाया गया. इस मामले में गिरफ्तार किए गए संदिग्धों में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. ऐसे मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि थाईलैंड में भारतीयों को अपने ही देश के लोगों से खतरा क्यों बढ़ रहा है.
थाईलैंड लंबे समय से भारतीय पर्यटकों की पसंदीदा विदेशी जगहों में गिना जाता है. समुद्री तट, सांस्कृतिक आकर्षण और बैंकॉक-पटाया जैसे शहरों की नाइटलाइफ हर साल बड़ी संख्या में भारतीयों को अपनी ओर खींचती है. थाईलैंड के पर्यटन एवं खेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में जहां लगभग 16.3 लाख भारतीय पर्यटक पहुंचे थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर करीब 25 लाख हो गई.
पर्यटकों के अलावा, थाईलैंड में भारतीय मूल के लोगों और भारतीय नागरिकों की भी बड़ी आबादी रहती है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, वहां करीब 2.75 लाख लोगों का भारतीय समुदाय मौजूद है, जिसमें लगभग ढाई लाख भारतीय मूल के थाई नागरिक और करीब 25 हजार भारतीय नागरिक शामिल हैं. यह समुदाय कपड़ा, जेम्स एंड ज्वेलरी, आईटी, स्वास्थ्य, वित्त और आतिथ्य जैसे कई क्षेत्रों में सक्रिय है.
हाल के वर्षों में कई हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं. कई मामलों में भारतीय नागरिकों पर ही दूसरे भारतीयों का अपहरण करने, फिरौती मांगने, जबरन वेश्यावृत्ति में धकेलने और साइबर फ्रॉड सेंटरों में काम कराने के आरोप लगे हैं. अधिकांश पीड़ितों की रिहाई तब संभव हो सकी जब उनके परिवारों ने भारतीय और थाई अधिकारियों से संपर्क किया.
सस्ते टूर पैकेज के बहाने बनाया शिकार
ताजा मामले में तीन भारतीयों को कम खर्च में थाईलैंड घूमाने का लालच देकर बुलाया गया था. बैंकॉक पहुंचने के बाद उन्हें पटाया के एक किराए के मकान में ले जाकर बंधक बना लिया गया. जांच के मुताबिक, इस गिरोह में भारतीय और पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे, जिन्होंने पीड़ितों को एक सप्ताह से अधिक समय तक कैद रखा.
पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि उन्हें रोजाना शारीरिक यातनाएं दी जाती थीं. कई बार उन्हें टखनों के सहारे उल्टा लटकाया गया, पर्याप्त भोजन नहीं दिया गया और वीडियो कॉल के दौरान परिवार को डराने के लिए उनके शरीर पर लाल रंग लगाकर नकली चोटें दिखाई गईं. इस तरह परिवारों पर करीब 24 लाख थाई बाह्ट यानी लगभग 70 लाख रुपये की फिरौती देने का दबाव बनाया गया.
थाई पुलिस ने छापेमारी कर तीन लोगों को बचाया
27 जुलाई को थाई पुलिस ने छापेमारी कर तीनों को सुरक्षित बाहर निकाला. इसके बाद देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहे पांच भारतीय नागरिकों को बैंकॉक से गिरफ्तार किया गया. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसियों को शक है कि पूरे नेटवर्क का संचालन दुबई में बैठा एक पाकिस्तानी सरगना कर रहा था, जिसने आरोपियों को नकद भुगतान, कीमती सामान और विदेश जाने के टिकट देने का वादा किया था.
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नौकरी का झांसा देकर साइबर स्कैम सेंटरों तक पहुंचाया
सिर्फ फिरौती ही नहीं, बल्कि रोजगार के नाम पर भी भारतीयों को जाल में फंसाया जा रहा है. कई लोगों को थाईलैंड में आकर्षक नौकरी का भरोसा दिलाकर बुलाया गया और बाद में उन्हें म्यांमार सीमा पर सक्रिय साइबर स्कैम सेंटरों में भेज दिया गया, जहां उनसे ऑनलाइन ठगी करवाई गई.
मार्च में सीबीआई ने मुंबई निवासी सुनील नेल्लाथु रामकृष्णन उर्फ कृष को गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसी के मुताबिक, वह भारतीय युवाओं को बैंकॉक बुलाकर अवैध रूप से म्यांमार के म्यावाड़ी क्षेत्र स्थित साइबर ठगी केंद्रों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क का अहम हिस्सा था.
सीबीआई के अनुसार, मार्च और नवंबर 2025 में बचाकर भारत लाए गए पीड़ितों ने पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली का खुलासा किया. मार्च 2025 में ऐसे 283 भारतीयों को वापस लाया गया था, जबकि जनवरी 2026 में म्यांमार के साइबर ठगी केंद्रों से आंध्र प्रदेश के 120 से अधिक लोगों को मुक्त कराया गया.
जांच में यह भी सामने आया कि भारत में बैठे कुछ एजेंट और बिचौलिए विदेश में बेहतर नौकरी का लालच देकर लोगों को फंसाते थे और बाद में उन्हें अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोहों के हवाले कर देते थे. इसके बावजूद कई भारतीय अब भी वहां फंसे हुए हैं. जून में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के कम से कम 25 लोग अब भी थाईलैंड-म्यांमार सीमा के साइबर ठगी केंद्रों में बंधक बने हुए हैं. वहीं, एक पीड़ित की रिहाई के बदले करीब आठ लाख रुपये की मांग किए जाने का भी आरोप है.
रेस्टोरेंट में नौकरी का झूठा वादा, फिर देह व्यापार के लिए किया मजबूर
फरवरी में पटाया से मानव तस्करी का एक और मामला सामने आया था. तीन भारतीय महिलाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें सोशल मीडिया के जरिए अच्छी तनख्वाह वाली रेस्टोरेंट की नौकरी का झांसा देकर थाईलैंड बुलाया गया. यात्रा का पूरा खर्च उठाने का वादा किया गया था.
महिलाओं के मुताबिक, 9 फरवरी को उन्हें पटाया लाया गया, जहां पहुंचते ही उनके पासपोर्ट छीन लिए गए और उन्हें होटल के कमरे में बंद कर दिया गया. इसके बाद उन्हें जबरन देह व्यापार करने के लिए मजबूर किया गया. विरोध करने या भागने की कोशिश करने पर मारपीट, भूखा रखने और परिवार को निजी तस्वीरें भेजने जैसी धमकियां दी जाती थीं. शिकायत मिलने के बाद पटाया पुलिस ने इस मामले में दो भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया.