ईरान-इजरायल जंग के बीच राष्ट्रपति पेजेशकियन का बड़ा एलान, युद्ध खत्म करने के लिए रखीं 3 कड़ी शर्तें

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध को रोकने के लिए ठोस कूटनीतिक प्रस्ताव दिया है. उन्होंने शांति बहाली के लिए अपनी स्पष्ट मांगें दुनिया के सामने रखी हैं.

Iran Israel war ceasefire terms
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अमेरिका और इजरायल के साथ जारी भीषण जंग के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पहली बार युद्ध विराम को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए साफ किया है कि तेहरान तीन मुख्य शर्तों पर ही लड़ाई रोकने को तैयार है. ईरान की पहली शर्त है कि उसके वैध अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाए. दूसरी शर्त में युद्ध के दौरान हुए भारी नुकसान के लिए हर्जाना मांगा गया है और तीसरी शर्त के रूप में भविष्य में किसी भी हमले के खिलाफ पक्की अंतरराष्ट्रीय गारंटी की मांग की गई है. पेजेशकियन का कहना है कि अगर इन मांगों को मान लिया जाता है तो क्षेत्र में शांति की बहाली संभव है.

जंग की शुरुआत और भारी तबाही

यह खूनी संघर्ष 28 फरवरी को तब शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा संयुक्त हमला किया था. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक इस युद्ध ने अब तक भयानक तबाही मचाई है जिसमें 1200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 10 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं. इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल के कई शहरों पर मिसाइलों और ड्रोन्स की बारिश कर दी है. सिर्फ इजरायल ही नही बल्कि जॉर्डन और इराक जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी ईरान ने अपना निशाना बनाया है जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है.

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ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ता असर

इस युद्ध की आग सिर्फ सीमाओं तक सीमित नही है बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में तनाव बढ़ने से तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. तेल टैंकरों की आवाजाही रुकने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगी हैं जिससे ग्लोबल मार्केट में महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह तनाव जल्द कम नही हुआ तो ऊर्जा संकट और गहरा सकता है जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा.

कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज

ईरान के राष्ट्रपति ने रूस और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय सहयोगियों के नेताओं से बात कर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश शुरू कर दी है. उनका आरोप है कि मौजूदा संकट के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और ‘जायोनी शासन’ यानी इजरायल जिम्मेदार हैं और उन्हें अपनी कार्रवाई के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. हालांकि युद्ध के दूसरे हफ्ते में भी फिलहाल तनाव कम होने के कोई ठोस संकेत नही दिख रहे हैं. अब देखना यह होगा कि क्या अमेरिका और इजरायल ईरान की इन शर्तों पर गौर करते हैं या यह जंग और भी भयानक रूप अख्तियार कर लेती है.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

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राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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