Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को स्थगित किए जाने से पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है. अपनी खेती और बिजली उत्पादन के लिए पूरी तरह सिंधु नदी तंत्र पर निर्भर रहने वाला पाकिस्तान अब इस मुद्दे को लेकर वैश्विक मंचों पर गुहार लगा रहा है.
इसी कड़ी में बौखलाए पाकिस्तान ने मंगलवार को एक ‘इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस’ का आयोजन किया, जिसमें भारत का नाम लिए बिना उसे धमकी भरे लहजे में चेतावनी दी गई. पाकिस्तान ने कहा कि यदि 1960 की यह ऐतिहासिक संधि विफल होती है, तो कागज पर मौजूद कोई भी वैश्विक वर्ल्ड ऑर्डर सुरक्षित नहीं रहेगा.
इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा, ‘साझा पानी को कभी भी हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए. इसे सहयोग, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के साथ देशों के बीच एक पुल के रूप में काम करना चाहिए.’
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उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पाकिस्तान को उसके पानी के अधिकारों से वंचित करने के किसी भी प्रयास के गंभीर परिणाम होंगे, जिससे दक्षिण एशिया के लगभग दो अरब लोगों की शांति और सुरक्षा प्रभावित होगी.
It was a privilege to address the seminar, “Indus Waters Treaty: An Instrument of Regional Peace and Stability,” where leading experts from Pakistan and abroad discussed one of the defining challenges of our time in South Asia.
— Ishaq Dar (@MIshaqDar50) June 30, 2026
I underscored that the Indus Waters Treaty is not…
वहीं, पाकिस्तानी सीनेटर मुसादिक मलिक ने भारत पर निशाना साधते हुए अंतरराष्ट्रीय संधियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए. मलिक ने कहा, ‘सिंधु जल संधि के दौरान दोनों परमाणु ताकतों के बीच तीन युद्ध हुए हैं. अगर यह संधि नहीं टिकी, तो दूसरे विश्व युद्ध के बाद कागज पर बनी कोई भी विश्व व्यवस्था सुरक्षित नहीं रहेगी.’
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साथ ही उन्होंने कहा, ‘अगर कोई शक्तिशाली देश एक दिन उठकर यह कह दे कि यह संधि मुझ पर लागू नहीं होती और इसे एकतरफा सस्पेंड कर दे, तो ऐसी संधियों का क्या मूल्य रह जाता है?’
भारत ने इस पूरे मामले पर अपना रुख बेहद सख्त और स्पष्ट रखा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ शब्दों में कहा था कि ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते.’
भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित होने वाले सीमा पार आतंकवाद पर ठोस, विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक जल सहयोग को आतंकवाद से अलग नहीं रखा जा सकता. भारत ने पश्चिमी नदियों पर हाइड्रोपावर और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के काम को भी तेज कर दिया है ताकि संधि के कानूनी दायरे में रहते हुए पानी का अधिकतम उपयोग भारत में ही किया जा सके.
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फिलहाल, 1960 में वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में जवाहरलाल नेहरू और अयूब खान के बीच हुआ यह समझौता तब तक सस्पेंड रहेगा, जब तक पाकिस्तान आतंक का रास्ता पूरी तरह नहीं छोड़ देता.
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