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ईरान अमेरिका की जंग को खत्म कराएगा पाकिस्तान! इस्लामाबाद में आज बड़ी बैठक, जानें कौन से देश शामिल?

क्या पाकिस्तान रुकवा पाएगा ईरान-इजरायल युद्ध? इस्लामाबाद में सऊदी, तुर्की और मिस्र के साथ होगा महामंथन. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की इस बड़ी कूटनीतिक चाल और अमेरिका-ईरान के बीच 'सीक्रेट' मध्यस्थता की पूरी इनसाइड स्टोरी

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Edited By : Vijay Jain Updated: Mar 29, 2026 09:38
Pakistan Middle East Peace Talk

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी जंग को रोकने के मकसद से पाकिस्तान ने एक बहुत बड़ी कूटनीतिक पहल शुरू की है. इस्लामाबाद में आज से दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक का आगाज हो रहा है, जिसमें सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री शामिल हो रहे हैं. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कूटनीति के जरिए युद्ध को रोकना और क्षेत्र में शांति बहाल करना है. पाकिस्तान इस समय ईरान और अमेरिका के बीच एक ‘पुल’ यानी मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भागीदार देशों के साथ मिलकर युद्ध विराम की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की है.

क्या है बैठक का मुख्य एजेंडा?

आज और कल होने वाली इस वार्ता में केवल कागजी बातें नहीं, बल्कि जमीन पर उतरने वाले व्यावहारिक प्रस्तावों पर चर्चा होगी. इनमें ईरान और अमेरिका के बीच अविश्वास को कम करने के लिए छोटे-छोटे एग्रीमेंट करना, लाल सागर और अन्य समुद्री व्यापारिक रास्तों को सुरक्षित बनाना और गाजा और लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में तुरंत शांति कैसे आए, जैसे एजेंडे शामिल हैं.

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पाकिस्तान के लिए यह क्यों है जरूरी?

पाकिस्तान फिलहाल खुद आर्थिक संकट से जूझ रहा है. ऐसे में अगर वह वैश्विक स्तर पर इतनी बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल करता है, तो इससे न केवल उसका अंतरराष्ट्रीय कद बढ़ेगा, बल्कि उसे आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर भी मदद मिल सकती है. हालांकि, सवाल अब भी वही है—क्या वाशिंगटन और तेहरान एक-दूसरे पर भरोसा करेंगे?

पूरी दुनिया की टिकी हैं निगाहें

पाकिस्तान की यह कोशिश कितनी रंग लाएगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र जैसे प्रभावशाली मुस्लिम देशों का एक साथ आना यह संकेत देता है कि मुस्लिम जगत अब युद्ध को और आगे नहीं बढ़ने देना चाहता. यदि पाकिस्तान इस ‘ब्रोकर’ की भूमिका में सफल होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसकी अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत होगी.

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First published on: Mar 29, 2026 09:28 AM

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