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कौन थे अयूब खान? पाकिस्तान के पहले फील्ड मार्शल, तख्तापलट करते ही बन गए राष्ट्रपति

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत से मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान सरकार डैमेज कंट्रोल करने में जुटी है। मंगलवार को पाक की शहबाज शरीफ सरकार ने आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का बड़ा पद दिया है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत से मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान सरकार डैमेज कंट्रोल करने में जुटी है। मंगलवार को पाक की शहबाज शरीफ सरकार ने आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का बड़ा पद दिया है। इससे पहले पाकिस्तान में इस पद मोहम्मद अयूब खान रहे थे। उस दौरान अयूब खान ने खुद को पाकिस्तान का राष्ट्रपति घोषित कर दिया था। आइए आपको पाकिस्तान के पहले फील्ड मार्शल अयूब खान के बारे बताते हैं।

अलीगढ़ में हुआ था जन्म

भारत के उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ में 14 मई 1907 में अयूब खान का जन्म हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और सैंडहर्स्ट में ब्रिटिश रॉयल मिलिट्री कॉलेज से पढ़ाई की थी। अयूब खान भारतीय सेना में एक अधिकारी के तौर पर नियुक्त हुए थे। 1947 में पाकिस्तान बनने के बाद परिवार के साथ वहां चले गए थे। वह पाकिस्तान की सेना में तेजी से प्रमोट होते चले गए।

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1958 में अयूब खान ने किया तख्तापलट

अयूब खान 1948 में मेजर जनरल से कमांडर इन चीफ रहे। इसके अलावा अयूब थोड़े समय के लिए रक्षा मंत्री भी बने। इसके बाद 1958 में राष्ट्रपति सिंकदर मिर्जा ने सेना के समर्थन से संविधान को निरस्त कर दिया और अयूब को फील्ड मार्शल बना दिया। इसके तुंरत बाद अयूब ने खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया और मिर्जा को निर्वासित कर दिया गया।

1960 में की ‘बुनियादी लोकतंत्र’ की स्थापना

राष्ट्रपति बनने के बाद अयूब खान ने 1960 में ‘बुनियादी लोकतंत्र’ की स्थापना की थी। इसमें सरकार और लोगों के बीच संपर्क स्थापति करने के लिए स्थानीय निकायों का एक नेटवर्क शामिल था। इसके बाद अयूब ने दोबारा चुनाव कराया और राष्ट्रपति बन गया। 1965 में इसी के तहत अयूब खान को फिर से चुना गया। उस दौरान अयूब खान को मोहम्मद अली जिन्ना की बहन फातिमा जिन्ना के पीछे एकजुट विपक्ष की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था।

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1965 में भारत से हारे अयूब खान

1962 में भारत पर चीन के आक्रमण करने के बाद अयूब ने चीन के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित किए और सैन्य सहायता प्राप्त की। इसके बाद 1965 में अयूब खान ने जम्मू कश्मीर को लेकर भारत से युद्ध छेड़ दिया। करीब 2 सप्ताह तक युद्ध लड़ने के बाद अयूब खान ने हार मान ली और संयुक्त राष्ट्र के जरिए युद्ध विराम करके सीमा समझौता कर लिया। बताते हैं कि इसके बाद अयूब खान ने चुनाव न लड़ने का फैसला किया और 26 मार्च 1969 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 19 अप्रैल 1974 में इस्लामाबाद में उनकी मौत हो गई।

क्यों चर्चा में हैं अयूब खान?

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने मंगलवार को आर्मी चीफ आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाया है। इसके बाद से एक बार फिर पाकिस्तान में तख्तापलट किए जाने की चर्चा होने लगी है। बताया जा रहा है कि आसिम मुनीर इस समय पाकिस्तान का सबसे चर्चित शख्स है। भविष्य में सेना के समर्थन से वह पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार का तख्तापलट कर सकता है। बताया जाता है कि आसिम मुनीर भी थोड़ा सब्र कर अयूब खान वाली चल सकता है। अब देखना होगा कि पाकिस्तान का दूसरा फिल्ड मार्शल बनने के बाद आसिम मुनीर का अगला कदम क्या होगा?

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First published on: May 20, 2025 07:55 PM

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About the Author

Md Junaid Akhtar

युवा पत्रकार मोहम्मद जुनेद अख्तर करीब 12 साल से मीडिया में काम कर रहे हैं। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2013 में ‘अमर उजाला’ गाजियाबाद से की थी। यहां इन्होंने अखबार में करीब एक साल तक रेलवे, कलेक्ट्रेट और आरडब्ल्यूए जैसी बीट पर काम किया। इसके बाद इन्होंने 2014 में ‘नवोदय टाइम्स‘ के लिए रेलवे, स्पोर्ट्स और एजुकेशन की बीट कवर कीं। करीब एक साल बाद 2015 में इनका ट्रांसफर गाजियाबाद से दिल्ली हो गया। दिल्ली में इन्होंने अल्पसंख्यकों के मुद्दों के साथ जंतर-मंतर पर कई बड़े धरने-प्रदर्शन कवर किए। वर्ष 2016 में इनका ट्रांसफर दिल्ली से नोएडा हो गया। नोएडा में इन्होंने क्राइम बीट पर लगातार करीब तीन साल काम तक किया। इसके बाद 2020 में लॉकडाउन के दौरान इन्हें क्राइम के अलावा गौतमबुद्ध नगर के तीनों प्राधिकरण और दूसरी बीट भी कवर करने का मौका मिला। जुनेद अख्तर ने साल 2024 (जनवरी) में ‘उत्तर प्रदेश टाइम्स’ की डिजिटल टीम को जॉइन कर लिया। इस दौरान इन्होंने ‘उत्तर प्रदेश टाइम्स’ की नोएडा डिजिटल साइट ट्राइसिटी टुडे में भी काम किया। इस बीच 27 फरवरी 2025 को जुनेद अख्तर ने न्यूज 24 डिजिटल टीम को जॉइन कर लिया। यहां जुनेद अख्तर बतौर सब एडिटर काम कर रहे हैं। जुनेद यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखते हैं। इसके अलावा नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद की खबरों पर भी नजर रखते हैं।

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