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दुनिया

न्यूजीलैंड में समय क्यों बदलता है? अप्रैल में घड़ी एक घंटा पीछे करने की वजह जानिए

न्यूजीलैंड में हर साल अप्रैल के पहले रविवार को समय एक घंटा पीछे कर दिया जाता है. इसे डेलाइट सेविंग टाइम (DST) कहा जाता है, जिसका मकसद दिन की रोशनी का बेहतर इस्तेमाल करना है.

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Written By: Varsha Sikri Updated: Apr 5, 2026 22:42
New Zealand Time Change
Credit: AI

न्यूजीलैंड में हर साल एक खास समय पर घड़ियों का टाइम बदला जाता है. साल 2026 में भी 5 अप्रैल को सुबह 3 बजे घड़ियों को एक घंटा पीछे कर दिया गया. इस प्रोसेस को डेलाइट सेविंग टाइम (Daylight Saving Time – DST) कहा जाता है. इस बदलाव के बाद समय 3 बजे से सीधे 2 बजे हो जाता है, यानी लोगों को एक घंटे की एक्सट्रा नींद भी मिलती है. डेलाइट सेविंग टाइम एक ऐसी मैनेजमैंट है, जिसमें गर्मियों के दौरान घड़ी को एक घंटा आगे कर दिया जाता है और सर्दियों के पहले उसे वापस पीछे कर दिया जाता है. इसका मकसद दिन की रोशनी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना होता है. न्यूजीलैंड में ये हर साल सितंबर के आखिरी रविवार से शुरू होता है और अप्रैल के पहले रविवार को खत्म होता है.डेलाइट सेविंग टाइम का आइडिया सबसे पहले 1895 में न्यूजीलैंड के वैज्ञानिक जॉर्ज हडसन ने दिया था.

अप्रैल में समय पीछे क्यों किया जाता है?

अप्रैल में न्यूजीलैंड में सर्दियों की शुरुआत होती है और दिन छोटे होने लगते हैं. ऐसे में घड़ी को पीछे करने से सुबह जल्दी उजाला हो जाता है और लोग अपनी दिनचर्या को बेहतर तरीके से चला पाते हैं. हालांकि, इसका असर यह भी होता है कि शाम को जल्दी अंधेरा हो जाता है. डेलाइट सेविंग टाइम सिस्टम को लागू करने के पीछे कई वजह हैं:
ऊर्जा की बचत: पहले माना जाता था कि इससे बिजली की खपत कम होती है
दिन की रोशनी का बेहतर इस्तेमाल: लोग शाम को ज्यादा समय बाहर बिता सकते हैं
प्रोडक्टिविटी बढ़ाना: दिन का समय ज्यादा उपयोगी बनाना

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क्या सभी देशों में लागू है DST?

नहीं, दुनिया के सभी देश डेलाइट सेविंग टाइम का पालन नहीं करते. ये खासतौर पर उन देशों में लागू होता है जो भूमध्य रेखा से दूर हैं, जहां दिन और रात की अवधि में बड़ा अंतर होता है. भारत जैसे देशों में DST लागू नहीं है क्योंकि यहां दिन और रात की अवधि में ज्यादा अंतर नहीं होता. भारत में पूरे देश में एक ही समय लागू होता है, जिसे Indian Standard Time (IST) कहा जाता है. ये समय देश के सभी राज्यों में एक जैसा रहता है. पश्चिमी डेलाइट सेविंग टाइम को लेकर बहस भी होती रहती है. कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे नींद के रूटीन पर असर पड़ता है, जबकि कुछ इसे फायदेमंद बताते हैं.

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First published on: Apr 05, 2026 10:41 PM

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