ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार को दावा किया कि उसने इजरायल के सरकारी और सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं. ईरानी सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, इन ठिकानों में तेल अवीव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का दफ्तर और हाइफा व पूर्वी यरूशलेम के सुरक्षा स्थल शामिल हैं.
IRGC ने एक बयान में कहा, ‘जायोनी शासन के अपराधी प्रधानमंत्री के कार्यालय और उनके वायुसेना कमांडर के मुख्यालय को निशाना बनाया गया.’
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इस दावे के कुछ घंटों बाद, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू बेट शेमेश में दिखाई दिए. वह उस जगह पहुंचे थे, जहां ईरान ने मिसाइल दागकर हमला किया था. इस हमले में नौ लोग मारे गए थे.
🚨Netanyahu says the difference between Israel and Iran is that Israel doesn’t target civilians.
— Skint Eastwood (@Skint_Eastwood1) March 2, 2026
"You see the difference. The tyrants of Tehran target civilians, we target the tyrants of Tehran to protect civilians." pic.twitter.com/OiaBZUL9B7
नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका-इजरायली हमलों का मकसद अस्तित्व के खतरों को खत्म करना है. साथ ही कहा कि ईरान के भीतर बदलाव लाना है.
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हमले के पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए, नेतन्याहू ने कहा, ‘ईरान का आतंकी शासन नागरिकों पर गोलीबारी करता है, और हम नागरिकों की रक्षा के लिए आतंकी शासन पर हमला करते हैं. यह एक बहुत बड़ा अंतर है.’
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लेबनान तक युद्ध की लपटें
ईरान के समर्थन में अब उसका सबसे शक्तिशाली सहयोगी हिजबुल्लाह भी इस युद्ध में कूद पड़ा है. खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए हिजबुल्लाह ने इजरायली ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों की बरसात कर दी. जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए. लेबनान की सरकारी एजेंसी के मुताबिक, इन हमलों में अब तक कम से कम 31 लोगों की मौत हो चुकी है और 150 के करीब घायल हैं.










