नेपाल की तबाही में भी वफादारी नहीं भूला कुत्ता, मालिक लापता, लेकिन मकान के आगे डटा रहा

Trishuli Bazar Loyal Dog: नेपाल में आए फ्लैश फ्लड ने बर्बादी का खौफनाक मंजर दिखाया, लेकिन इस तबाही के बीच वफादारी की ऐसी इमोशनल मिसाल नजर आए, जिसके बारे में जानकर ही दिल बैठ जाता है. टूटकर बिखरे मकान के मलबे के पास सफेद-काला कुत्ता शांत होकर बैठा दिखा, जो मालिक के इंतजार में वहां से हटने को तैयार नहीं है.

Dog in Flood Hit Nepal

नेपाल में बाढ़ के बाद मालिक के इंतजार में कुत्ता (AI Image)

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Black-White Dog In Nepal Flash Flood: नेपाल में 26 अगस्त 2026 आई भयानक बाढ़ से हुई तबाही के बीच त्रिशूली बाजार में एक काले-सफेद रंग का कुत्ता वफादारी की एक बेहतरीन मिसाल बन गया है. ये पालतू जानवर उसी जगह पर डटा हुआ है जहां चार घरों का एक कलस्टर बह गया था; ऐसा लगता है कि वो उन लोगों का इंतजार कर रहा है जिन्हें वो कभी अपना परिवार मानता था.

मकान के आगे डटा है कुत्ता

कुत्ते के गले में अभी भी उसका कॉलर बंधा है और वो कीचड़ वाली उस जगह से हटने को तैयार नहीं है जो कभी उसके घर का हिस्सा रही होगी. लकड़ी, कीचड़ और मलबा हटाने वाली JCB मशीनों और बचाव दलों की लगातार आवाजाही के बावजूद उसे वहां से हटाया नहीं जा सका है.

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जगह छोड़ने से इनकार

रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे वालंटियर बिक्रम थापा ने टीओआई को बताया कि शुरुआत में कर्मचारियों ने बिस्किट और आवाज देकर कुत्ते को सुरक्षित जगह पर लाने की कोशिश की, लेकिन उसने कोई खास रिस्पॉन्स नहीं दिया. थापा ने कहा, ‘उसके गले का कॉलर तो ठीक-ठाक है, लेकिन वह वहां से हटने को बिल्कुल तैयार नहीं है.’

चुपचाप है बेजुबान जानवर

मलबा हटाने के काम में शामिल सुनील तमांग ने बताया कि पास में खुदाई करने वाली मशीनें (एक्सकेवेटर) चलने के बावजूद कुत्ता बहुत शांत रहता है. जब कोई गाड़ी या इंसान पास आता है तो वह कभी-कभी अपना सिर उठाता है, लेकिन जल्द ही वापस उसी कीचड़ वाली जगह पर लौट आता है.

दरवारे पर लौट आता है

बाढ़ ने इलाके का नजारा पूरी तरह बदल दिया है. घर गायब हो चुके हैं और अब वहां सिर्फ बिखरा हुआ मलबा और इमारतों के टुकड़े बचे हैं. कर्मचारी ये पता नहीं लगा पाए हैं कि उन 4 घरों में से कौन-सा घर उस कुत्ते के मालिकों का था. हालांकि, उसके बार-बार उसी पुराने दरवाजे वाली जगह पर लौटने से लोकल लोगों को यकीन हो गया है कि वही जगह कभी उसका घर और इलाका हुआ करती थी.

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अपनों का इंतजार

जानवरों के रेस्क्यू में लगी वालंटियर रीता गुरुंग ने बताया कि लोगों ने अब कुत्ते को जबरदस्ती वहां से हटाने की कोशिश करना छोड़ दिया है. इसके बजाय वो पास में ही खाना और पानी रख देते हैं. बताया जाता है कि कुत्ता तभी खाना खाता है जब आस-पास शांति हो जाती है. जिन लोगों ने अपने घर खो दिए हैं, उनके लिए इस जानवर का बिहेवियर उन लोगों की याद दिलाता है जो अभी भी लापता हैं. लोकल लोगों का कहना है कि वो अब उस कुत्ते पर नजर रखे हुए हैं क्योंकि वो मलबे के बीच लगातार अपनों का इंतजार कर रहा है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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