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नेपाल की बाढ़ के दौरान सुरंगों में फंसे मजदूरों ने कैसे बचाई जान? जानिए जद्दोजहद की पूरी दास्तान

Flash Flood In Nepal: नेपाल में अचानक आई बाढ़ में मौत का आंकड़ा 1000 के पार चला गया है, लेकिन इस बीच जिंदगी को बचाने की कई कहानियां सामने आईं, जो इंसानी जद्दोजहद की दास्तान को बयान करता है.

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नेपाल में फ्लैश फ्लड (Photo-PTI)

Nepal Flash Flood: नेपाल में 26 अगस्त 2026 को फ्लैश फ्लड का पानी जैसे-जैसे नीचे की हर चीज को अपने आगोश में लेता जा रहा था, शिव गिरी और 6 अन्य लोगों के पास अपनी जान बचाने के लिए ऊपर की ओर चढ़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं था. मेलुंग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से ऊंचाई वाले इलाके की ओर भागते वक्त उन्होंने अपनी आंखों के सामने घरों, बस्तियों और कई ढांचों को बाढ़ में बहते देखा. जिंदगी बचाने की इस जद्दोजहद में वो लगातार पहाड़ी की तरफ बढ़ते रहे.

शिव गिरी ने सुनाई पूरी कहानी

वेबसाइट ‘नेपाल न्यूज’ को शिव गिरी ने बताया कि उनके कई साथी मजदूर और उनका चचेरा भाई भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गए. तिमुरे और धुंटे कस्बों तक जाने वाले सामान्य रास्ते बंद हो जाने के बाद, इस ग्रुप ने करीब 12 घंटे तक जंगल के रास्ते पैदल सफर किया. इसके बाद उन्हें एक गुफा मिली, जहां उन्होंने रात बिताई.

जान बचाना हुआ मुश्किल

नेपाल में बाढ़ से प्रभावित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट से जान बचाकर भागने की ये एक बेहद मुश्किल घटना थी. यहां बचाव दल अब भी उन सैकड़ों मजदूरों और कर्मचारियों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं जिनसे 26 अगस्त से कोई संपर्क नहीं हो पाया है. माना जा रहा है कि उनमें से कई लोग सुरंगों के अंदर फंसे हुए हैं.

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280 लोगों का रेस्क्यू

अधिकारियों ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को बताया कि अब तक सुरंगों से तकरीबन 280 लोगों को बचाया जा चुका है जबकि भारत और चीन की स्पेशल टीम अब भी फंसे हुए लोगों का पता लगाने और उन तक पहुंचने के नेपाल की कोशिशों में शामिल हो गए हैं.

सुरंग में ब्लास्ट

सोमवार को एक साइट पर कंट्रोल्ड ब्लास्ट किया गया, जब बचावकर्मी एक बंद सुरंग तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे. मेलुंग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के तकनीकी कर्मचारी गिरी ने बताया कि अगले दिन ये ग्रुप प्रोजक्ट साइट की तरफ नीचे उतरा और बचाव के लिए मदद मांगी.

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काठमांडू में शिव गिरि का इलाज

‘नेपाल न्यूज’ की खबर के मुताबिक, आखिरकार नेपाली सेना के एक हेलीकॉप्टर ने उन्हें काठमांडू पहुंचाया, जहां शिव गिरि का इलाज त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में किया जा रहा है. अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में सिविल इंजीनियर संदीप राणा तकरीबन 100 अन्य कर्मचारियों के साथ पहाड़ी पर चढ़कर बढ़ते बाढ़ के पानी से बच निकले.

राणा ने सोमवार को ‘द राइजिंग नेपाल’ को बताया कि जब वो प्रोजेक्ट ऑफिस में थे, तभी इमरजेंसी सायरन बजा. इससे पहले कि कर्मचारी अपने निर्धारित स्थल तक पहुंच पाते, उन्हें बताया गया कि डैम साइट से तकरीबन 12 किलोमीटर ऊपर की ओर भारी बाढ़ आ गई है.

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उंची जगहों पर जाकर बचाई जान

ग्रुप ने ऊंची जगह की ओर चढ़ना शुरू किया और आखिरकार त्रिशूली नदी से तकरीबन 30 से 35 मीटर ऊपर एक जगह पर पहुंच गया. वहां से उन्होंने प्रोजेक्ट ऑफिस, कैंप और सड़कों को बाढ़ के पानी में डूबते हुए देखा. राणा ने अखबार को बताया, ‘हमें ऊपर चढ़ते रहना था और साथ ही गिरते पत्थरों से भी बचना था. रुककर सोचने का कोई समय नहीं था.’ ये ग्रुप 7 से 8 घंटे तक चढ़ाई करने के बाद शाम करीब चार बजे गरांग इलाके में एक सड़क तक पहुंचा. जब तक राणा कालिकास्थान पहुंचे, तब तक उनके साथ सिर्फ 2 लोग ही बचे थे जबकि बाकी लोग बिछड़ गए थे.

रामचंद्र की कहानी

एक और बचे हुए शख्स, जिनकी पहचान रामचंद्र के तौर पर हुई है, ने त्रिशूली नदी के किनारे एक सुरंग के अंदर बाढ़ का सामना किया. ‘रातोपाति’ समाचार पोर्टल के मुताबिक, जब सुरंग के रास्ते में पानी घुसने लगा तो रामचंद्र और उनके 5 साथी सुरंग से बाहर निकलने के रास्ते से सैकड़ों मीटर दूर थे.

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बह जाने से बचने के लिए उन्होंने सुरंग की छत पर लगी लोहे की सीढ़ी पकड़ ली. रामचंद्र ने बताया कि उन छह लोगों ने खुद को संभालने के लिए टिन की एक चादर का इस्तेमाल किया और करीब 6 घंटे तक एक सीढ़ी से दूसरी सीढ़ी तक बढ़ते रहे. उन्होंने कहा, “हम छह लोग थे, और बाद में सुरंग के दरवाजे पर हमें एक और शख्स मिला.ट

कैसे आई अचानक बाढ़?

माना जाता है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के गिरने या हिमस्खलन की वजह से आई जबरदस्त बाढ़ ने 26 अगस्त को उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया. इस आपदा में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों लोग अब भी लापता हैं. हिमालयी सीमावर्ती इलाके से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी बाढ़ का पानी अपने साथ नीचे की ओर ले गई जिससे घर, गाड़ियां, सड़कें और पुल बह गए और पनबिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा.

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