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दुनिया

विद्रोह के बैलेट तक, जेन Z की लहर जीतेगी या दिग्गज नेता? नेपाल में कल होंगे आम चुनाव?

नेपाल में 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव न केवल देश के भविष्य के लिए बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होंगे. Gen-Z के प्रदर्शनों के कारण चुनाव दो साल पहले कराए जा रहे हैं, जिनमें 8 सितंबर को पुलिस की गोलीबारी में मारे गए 19 लोगों सहित कुल 77 लोगों की मौत हुई थी.

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Edited By : Vijay Jain Updated: Mar 4, 2026 15:20
nepal election
photo credit: Gemini AI

नेपाल के इतिहास में पहली बार ‘डिजिटल पीढ़ी’ सीधे तौर पर सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेने को तैयार है. 5 मार्च को होने वाले मतदान में देश के 1.9 करोड़ मतदाता अपने भविष्य का फैसला करेंगे, इनमें करीब 10 लाख नए युवा वोटर शामिल हैं. भ्रष्टाचार, कुप्रशासन और संरक्षण-प्रधान अर्थव्यवस्था के खिलाफ पिछले साल सितंबर में युवाओं के दो दिवसीय प्रदर्शनों ने 77 लोगों की जान ले ली, जिसमें पहले ही दिन पुलिस फायरिंग में 19 युवाओं की मौत हो गई. यह चुनाव निर्धारित समय से दो साल पहले हो रहा है और इसे नेपाल की पुरानी राजनीतिक व्यवस्था को तोड़ने का सुनहरा मौका माना जा रहा है. नेपाल की 3 करोड़ आबादी के बीच बदलाव की हवा भरने को तैयार हैं. युवा आंदोलन की मांगें अब पूरे समाज में गूंज रही हैं. क्या यह चुनाव नेपाल को नई दिशा दे पाएगा?

यह चुनाव अलग क्यों है?

‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह चुनाव पिछले सितंबर में जेन जी आंदोलन का सीधा नतीजा है, जब युवाओं ने 8 सितंबर को सड़कों पर उतरकर पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ बगावत की. आज वही युवा प्रदर्शनकारी सड़कों को छोड़कर चुनावी मैदान में हैं. 77 मौतों के बाद सरकार ने समय से पहले चुनाव का ऐलान किया, ताकि युवाओं की मांगों को लागू करने का रास्ता बने. इस बार 40% से अधिक उम्मीदवार 35 वर्ष से कम आयु के हैं, जो नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है. दिलचस्प मुकाबला झापा-5 सीट पर देखने को मिल रहा है, जहां 74 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के सामने 35 वर्षीय ‘रैपर’ और काठमांडू के पूर्व मेयर बालेंद्र शाह (बालेन) खड़े हैं. बालेन शाह आज नेपाल के युवाओं के लिए बदलाव का प्रतीक बन चुके हैं.

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नेपाल में कैसे डाले जाते हैं चुनाव

मतदाता दो बैलट पेपर डालेंगे: एक फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) सिस्टम के तहत व्यक्तिगत उम्मीदवार के लिए, और दूसरा प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन (PR) के तहत पार्टी के लिए. कुल 275 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में 165 सीटें FPTP से और 110 PR से भरी जाएंगी.

FPTP सिस्टम: प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार जीतेगा.
PR सिस्टम: राष्ट्रव्यापी वोट शेयर के आधार पर सीटें बंटेंगी, Sainte-Laguë मेथड से.

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क्या होगा परिणाम?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है. जहां नेपाली कांग्रेस और यूएमएल जैसे पुराने दल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ (RSP) जैसी नई ताकतें तेजी से उभर रही हैं. 138 सीटें हासिल करने वाली पार्टी अकेले सरकार बना सकती है. यदि कोई भी दल 138 सीटों का जादुई आंकड़ा नहीं छू पाता तो नेपाल एक बार फिर गठबंधन सरकार के दौर में जा सकता है. इस बार 67 पार्टियां और 3,405 उम्मीदवार मैदान में हैं, जो गिनती को जटिल बनाएगा. इस बार जेन जेड की वजह से युवा टर्नआउट निर्णायक होगा. RSP को वोटर फटीग से फायदा हो सकता है – लोग पुरानी पार्टियों को सबक सिखाने के लिए नई पार्टी चुन सकते हैं.

मतगणना में एक महीना लग सकता है

जटिल बैलट और सैकड़ों उम्मीदवारों के कारण वोट गिनती धीमी होगी. FPTP रिजल्ट्स क्षेत्रवार आना शुरू होंगे, लेकिन PR के लिए राष्ट्रव्यापी टैली जरूरी. पूर्ण परिणाम घोषित होने में एक महीना लग सकता है.

First published on: Mar 04, 2026 03:20 PM

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