मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH370 दुनिया के सबसे बड़े विमान रहस्यों में से एक बनी हुई है. 12 साल बाद भी ये फ्लाइट और उसमें सवार 239 लोगों का कोई ठोस पता नहीं चल पाया है. हाल ही में इस विमान को ढूंढने के लिए फिर से बड़े स्तर पर समुद्र में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन इस बार भी कोई कामयाबी नहीं मिली. मलेशिया सरकार के मुताबिक, हाल के अभियान में दक्षिणी हिंद महासागर के लगभग 15,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को स्कैन किया गया. आधुनिक तकनीक और समुद्र के भीतर चलने वाले रोबोटिक उपकरणों की मदद से समुद्र की गहराई तक जांच की गई, लेकिन विमान का मलबा या उससे जुड़ा कोई नया सुराग नहीं मिला.
ये भी पढ़ें: ये मुस्कान आपको हैरान कर देगी! मलेशिया में 42 दांत वाले शख्स ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
क्या है मामला?
फ्लाइट MH370 8 मार्च 2014 को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से चीन के बीजिंग के लिए रवाना हुई थी. उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही विमान रडार से अचानक गायब हो गया. विमान में कुल 239 लोग सवार थे, जिनमें यात्री और क्रू मेंबर्स शामिल थे. ये घटना मॉर्डन एविएशन हिस्ट्री की सबसे रहस्यमय घटनाओं में गिनी जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि प्लेन अपनी निर्धारित उड़ान मार्ग से भटक गया था और दक्षिणी हिंद महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. पिछले कई सालों में समुद्र के किनारों पर विमान के कुछ संदिग्ध टुकड़े मिले थे, जिनमें से कुछ को MH370 से जुड़ा माना गया. हालांकि विमान का मुख्य मलबा अब तक नहीं मिला है.
सर्च ऑपरेशन में नहीं मिली कामयाबी
हालिया सर्च ऑपरेशन एक प्राइवेट समुद्री तकनीकी कंपनी Ocean Infinity ने चलाया था. ये अभियान 'नो फाइंड, नो फी' मॉडल पर आधारित था, यानी अगर विमान का मलबा मिलता तो ही कंपनी को भुगतान किया जाता. सरकार ने इस खोज के लिए लगभग 70 मिलियन डॉलर तक की राशि तय की थी. हालांकि खोज अभियान के खत्म होने के बाद भी विमान के बारे में कोई नई जानकारी सामने नहीं आई है. इसके बावजूद विमान में सवार यात्रियों के परिवार अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं. कई परिवारों ने मलेशिया सरकार से अपील की है कि सर्च ऑपरेशन को आगे भी जारी रखा जाए. विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र की गहराई, खराब मौसम और विशाल क्षेत्र के कारण इस विमान को ढूंढना बेहद कठिन है. यही वजह है कि इतने सालों बाद भी ये रहस्य पूरी तरह से सुलझ नहीं पाया है.
मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH370 दुनिया के सबसे बड़े विमान रहस्यों में से एक बनी हुई है. 12 साल बाद भी ये फ्लाइट और उसमें सवार 239 लोगों का कोई ठोस पता नहीं चल पाया है. हाल ही में इस विमान को ढूंढने के लिए फिर से बड़े स्तर पर समुद्र में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन इस बार भी कोई कामयाबी नहीं मिली. मलेशिया सरकार के मुताबिक, हाल के अभियान में दक्षिणी हिंद महासागर के लगभग 15,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को स्कैन किया गया. आधुनिक तकनीक और समुद्र के भीतर चलने वाले रोबोटिक उपकरणों की मदद से समुद्र की गहराई तक जांच की गई, लेकिन विमान का मलबा या उससे जुड़ा कोई नया सुराग नहीं मिला.
ये भी पढ़ें: ये मुस्कान आपको हैरान कर देगी! मलेशिया में 42 दांत वाले शख्स ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
क्या है मामला?
फ्लाइट MH370 8 मार्च 2014 को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से चीन के बीजिंग के लिए रवाना हुई थी. उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही विमान रडार से अचानक गायब हो गया. विमान में कुल 239 लोग सवार थे, जिनमें यात्री और क्रू मेंबर्स शामिल थे. ये घटना मॉर्डन एविएशन हिस्ट्री की सबसे रहस्यमय घटनाओं में गिनी जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि प्लेन अपनी निर्धारित उड़ान मार्ग से भटक गया था और दक्षिणी हिंद महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. पिछले कई सालों में समुद्र के किनारों पर विमान के कुछ संदिग्ध टुकड़े मिले थे, जिनमें से कुछ को MH370 से जुड़ा माना गया. हालांकि विमान का मुख्य मलबा अब तक नहीं मिला है.
सर्च ऑपरेशन में नहीं मिली कामयाबी
हालिया सर्च ऑपरेशन एक प्राइवेट समुद्री तकनीकी कंपनी Ocean Infinity ने चलाया था. ये अभियान ‘नो फाइंड, नो फी’ मॉडल पर आधारित था, यानी अगर विमान का मलबा मिलता तो ही कंपनी को भुगतान किया जाता. सरकार ने इस खोज के लिए लगभग 70 मिलियन डॉलर तक की राशि तय की थी. हालांकि खोज अभियान के खत्म होने के बाद भी विमान के बारे में कोई नई जानकारी सामने नहीं आई है. इसके बावजूद विमान में सवार यात्रियों के परिवार अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं. कई परिवारों ने मलेशिया सरकार से अपील की है कि सर्च ऑपरेशन को आगे भी जारी रखा जाए. विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र की गहराई, खराब मौसम और विशाल क्षेत्र के कारण इस विमान को ढूंढना बेहद कठिन है. यही वजह है कि इतने सालों बाद भी ये रहस्य पूरी तरह से सुलझ नहीं पाया है.