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दुनिया

ईरान जंग से हिला पाकिस्तान! शहबाज शरीफ ने मंत्रियों की सैलरी रोकी, इफ्तार पार्टियों पर लगा बैन

ईरान-इजरायल जंग के चलते पाकिस्तान में तेल संकट गहरा गया है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंत्रियों की सैलरी रोकने, इफ्तार पार्टियों पर बैन और हफ्ते में केवल 4 दिन दफ्तर खोलने का कड़ा फैसला लिया है.

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Written By: Raja Alam Updated: Mar 10, 2026 08:45

मिडिल ईस्ट में जारी ईरान और इजरायल की जंग ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश में सख्त पाबंदियों का ऐलान किया है. अब पाकिस्तान में सरकारी दफ्तर हफ्ते में केवल 4 दिन ही खुलेंगे और आधे कर्मचारियों को घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम करना होगा. इतना ही नही ईंधन बचाने के लिए देश के सभी स्कूलों को अगले दो हफ्तों के लिए बंद कर दिया गया है. प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से पैदा हुए तेल संकट से निपटने के लिए ये कड़े फैसले लेना बेहद जरूरी हो गया था.

मंत्रियों और सांसदों पर गिरी गाज

देश के खाली खजाने को देखते हुए शहबाज सरकार ने अपने मंत्रियों और अधिकारियों पर भी चाबुक चलाया है. प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि सरकार के सभी मंत्री, सलाहकार और विशेष सहायक अगले दो महीने तक कोई वेतन नही लेंगे. इसके अलावा सांसदों के वेतन में भी 25 फीसद की कटौती की जाएगी. सरकारी विभागों में गाड़ियों के लिए मिलने वाले पेट्रोल-डीजल के कोटे में 50 फीसद की कमी कर दी गई है. आदेश के मुताबिक अगले दो महीने तक 60 फीसद सरकारी गाड़ियां सड़कों पर नही उतरेंगी. सरकार का मानना है कि इन उपायों से करोड़ों डॉलर की बचत होगी जिससे ईंधन संकट के असर को थोड़ा कम किया जा सकेगा.

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इफ्तार पार्टी और विदेश यात्रा पर रोक

रमजान के महीने में दी जाने वाली आधिकारिक इफ्तार पार्टियों और डिनर पर सरकार ने पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. खर्चों में कटौती करने के लिए अब कोई भी सरकारी सेमिनार या कार्यक्रम निजी होटलों में नही होगा बल्कि इसके लिए केवल सरकारी भवनों का ही इस्तेमाल किया जाएगा. इसके साथ ही मंत्रियों और सरकारी अफसरों की विदेश यात्राओं पर भी रोक लगा दी गई है. केवल बहुत जरूरी मामलों में ही विदेश जाने की अनुमति दी जाएगी. शहबाज शरीफ ने खाड़ी देशों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान इस मुश्किल घड़ी में अपने मित्र देशों के साथ खड़ा है लेकिन हकीकत यह है कि इस समय कोई भी देश पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने के लिए आगे नही आ रहा है.

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दोतरफा संकट में फंसा पाकिस्तान

पाकिस्तान इस समय न केवल आर्थिक बल्कि सुरक्षा के मोर्चे पर भी बुरी तरह घिर गया है. एक तरफ मिडिल ईस्ट की जंग से तेल की सप्लाई रुकी हुई है तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान बॉर्डर पर आतंकवाद की चुनौतियां बढ़ रही हैं. प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में स्वीकार किया कि कच्चे तेल की कीमतों में अचानक हुए उछाल ने देश की कमर तोड़ दी है. पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह खाड़ी देशों पर निर्भर है और वहां जारी संघर्ष ने देश में ‘लंका’ लगा दी है. जनता पहले ही आसमान छूती महंगाई से परेशान है और अब इन नई पाबंदियों ने आम आदमी की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है.

First published on: Mar 10, 2026 06:53 AM

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