रॉयटर्स समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट में दो यूरोपीय अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका द्वारा ईरान में सैन्य हस्तक्षेप की संभावना है. एक अधिकारी ने कहा कि यह अगले 24 घंटों में हो सकता है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक इजरायली अधिकारी ने भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रंप ने हस्तक्षेप करने का निर्णय ले लिया है, हालांकि इसका दायरा और समय स्पष्ट नहीं है.
Iran Protests Live Updates: ईरान में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. इन विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरान सरकार के एक फैसले ने आग में घी डालने का काम किया है. 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी एरफान सोल्तानी को फांसी देने के फैसले के बाद विरोधियों का सरकार के खिलाफ गुस्सा और उग्र हो गया. ईरान के हालात को देखते हुए भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों को तुरंत देश छोड़कर अपने मुल्क जाने की एडवाइजरी जारी की है. वहीं, ईरान लगातार अपने देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहरा रहा है. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में अब तक 2500 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है.
ईरान में लोग क्यों कर रहे विरोध प्रदर्शन?
ईरान में चल रहे देशव्यापी प्रदर्शन के कई कारण हैं, जिनमें महंगाई, जरूरी सामानों की आसमान छूती कीमतें और रियाल की भारी गिरावट के चलते उपजा आर्थिक संकट शामिल है. वहीं, दिसंबर 2025 के अंत में तेहरान के ग्रैंड बाजार के व्यापारियों द्वारा दुकानें बंद होने की वजह से लोग और भड़क गए. अब ये विरोध प्रदर्शन शासन के खिलाफ व्यापक विद्रोह में बदल चुके हैं, जहां सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई, भ्रष्टाचार, मानवाधिकार हनन, इंटरनेट सेंसरशिप और ऊर्जा संकट पर लोगों का गुस्सा फूट रहा है.
भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी
ईरान में दिनोंभर चली हिंसा से 2000 लोगों की मौत के बाद भारतीय दूतावास ने देशवासियों को ईरान की यात्रा स्थगित करने की सलाह दी है, जब तक कि स्थिति सामान्य न हो जाए. विदेश मंत्रालय ने वहां मौजूद छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों को उपलब्ध सभी साधनों से ईरान छोड़ने का निर्देश दिया है. मंत्रालय ने कहा, भारत सरकार ने ईरान की वर्तमान स्थिति को देखते हुए पिछली एडवाइजरी में बदलाव किया है और वहां मौजूद भारतीय नागरिकों (छात्र, तीर्थयात्री, व्यापारी और पर्यटक) को उपलब्ध परिवहन साधनों से ईरान से तुरंत निकलने की सलाह दी है.’
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सऊदी अरब ने ईरान को स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने हवाई क्षेत्र या भूभाग का इस्तेमाल उस पर हमले के लिए नहीं होने देगा. एएफपी समाचार एजेंसी ने सरकार के करीबी दो सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है. सऊदी सेना के एक करीबी सूत्र ने एएफपी को बताया, 'सऊदी अरब ने तेहरान को सीधे तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि वह उसके खिलाफ की गई किसी भी सैन्य कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा और उसके भूभाग और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल इस उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा.'
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को आरोप लगाया कि इजरायल अमेरिका को इस मामले में घसीटकर ईरान में हिंसा भड़का रहा है. अराघची ने अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल पर लिखा, 'लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस बार वे दबी हुई बात को खुलकर कह रहे हैं.' उन्होंने आगे लिखा, 'हमारी सड़कों पर खून बह रहा है, और इजरायल खुलेआम इस बात पर गर्व कर रहा है कि उसने 'प्रदर्शनकारियों को हथियारों से लैस कर दिया है' और 'यही सैकड़ों लोगों की मौत का कारण है'.' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को पता है कि हत्याओं को रोकने के लिए क्या करना चाहिए.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि तेहरान में अशांति के बीच उन्हें अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची का फोन आया. जयशंकर ने एक पोस्ट में कहा, 'ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया. हमने ईरान और उसके आसपास की बदलती स्थिति पर चर्चा की.'
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली शमखानी ने बुधवार को कहा कि ईरान पर हमलों का जिक्र करते समय ट्रंप को कतर में अमेरिकी नियंत्रण वाले हवाई अड्डे के विनाश का जिक्र करना चाहिए. शमखानी ने X पर एक पोस्ट में कहा, 'अमेरिका के राष्ट्रपति, जो बार-बार ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की निराधार कहानी सुनाते हैं, उन्हें ईरानी मिसाइलों द्वारा अमेरिकी अल उदैद हवाई अड्डे के विनाश का भी जिक्र करना चाहिए. इससे निश्चित रूप से ईरान की किसी भी हमले का जवाब देने की इच्छा और क्षमता को सही मायने में समझने में मदद मिलेगी.'
रॉयटर्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, बुधवार को दर्जनों ईरानी सीमा पार करके तुर्की में दाखिल हुए, क्योंकि अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की। एक मानवाधिकार समूह के अनुसार, ईरान में लगभग 2500 लोग मारे गए थे. रॉयटर्स के अनुसार, ईरानी परिवार और व्यक्ति अपने सामान और अन्य चीजों के साथ कपिकोय सीमा द्वार से तुर्की के पूर्वी प्रांत वान पहुंचे और पास के कस्बों की ओर जाने वाले वाहनों में सवार हो गए.
ईरान से एक भारतीय छात्रा ने वीडियो शेयर कर अपने माता-पिता और भारतीयों को वहां की स्थिति से अवगत कराया. छात्रा कहती है, ‘हैलो, अस्सलामु अलैकुम! अब्बू, अम्मा, हुदा, रुतबा… क्या तुम सब ठीक हो? मैं ठीक हूं. यह मेरी एक दोस्त है सायशा, इसे घर आना था. अब मैं इसी के फोन में यह वीडियो रिकॉर्ड कर रही हूं ताकि वह तुम्हें भेज सके और तुम्हें पता चल सके कि मैं ठीक हूं, मैं जिंदा हूं’.
ईरान इंटरनेशनल ने फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के हवाले से बताया कि फ्रांस ईरान में संचार ब्लैकआउट के बाद इंटरनेट सेवा बहाल करने में मदद के लिए यूटेलसैट उपग्रह टर्मिनल भेजने की संभावना पर विचार कर रहा है. सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट अगले एक से दो सप्ताह तक जारी रहेगा.
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के मद्देनजर सऊदी अरब, कतर और ओमान सहित तीन खाड़ी देशों ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए राजनयिक प्रयास शुरू कर दिए हैं. इस मामले से अवगत एक क्षेत्रीय अधिकारी ने सीएनएन को बताया, 'किसी भी सैन्य तनाव के व्यापक क्षेत्र पर गंभीर परिणाम होंगे, जिनमें इसकी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था भी शामिल है.'
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि कतर के अल उदैद हवाई अड्डे के कुछ कर्मियों को निकासी की सलाह दी गई है. अधिकारी ने कहा कि कुछ कर्मियों को अड्डे को छोड़ने का निर्देश 'एहतियाती' कदम के तौर पर दिया गया है. जून में अमेरिका द्वारा ईरान में परमाणु सुविधाओं पर हमले के बाद ईरान ने पहले ही इस अड्डे को निशाना बनाया था.










