क्या है शक्सगाम घाटी विवाद? आमने-सामने क्यों हैं चीन-भारत… पाकिस्तान से कैसे है इसका लिंक

Shaksgam Valley Dispute: भारत और चीन के बीच शक्सगाम घाटी का विवाद फिर से ताजा हो गया है, जिसका सीधा कनेक्शन पाकिस्तान से भी है. शक्सगाम घाटी जम्मू-कश्मीर में है, जिस पर चीन अवैध कब्जा करके उसे होते हुए एक कॉरिडोर पाकिस्तान तक जाने के लिए बना रहा है.

Shaksgam Valley India vs China vs Pakistan

भारत ने चीन पर शक्सगाम घाटी पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया है.

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Shaksgam Valley Dispute: भारत और पाकिस्तान के बीच जहां POK को लेकर विवाद है, वहीं भारत और चीन के बीच भी लद्दाख समेत कई जगहों को लेकर विवाद है. इन्हीं जमीनी विवादों में से एक विवाद जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी को लेकर भी है, जिसका कनेक्शन चीन और पाकिस्तान दोनों से है. आजादी के बाद पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी पर कब्जा कर लिया था, जिसे बाद में पाकिस्तान ने चीन को दे दिया और भारत का कहना है कि चीन ने इस घाटी पर अवैध कब्जा किया हुआ है.

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अब सुर्खियों में क्यों आया है घाटी विवाद?

बता दें कि ताजा विवाद शक्सगाम घाटी के रास्ते चीन से पाकिस्तान तक बन रहे कॉरिडोर के चलते छिड़ा है. चीन ने जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी को अपनी जमीन बताते हुए दावा किया है कि पाकिस्तान तक घाटी के रास्ते सड़क वह अपने इलाके में बना रहा है, जबकि वह सड़क POK के गिलगिट बाल्टिस्तान से निकलेगी, जो भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है. दूसरी तरफ, इस सड़क का सीधा कनेक्शन पाकिस्तान से है, जो भारत को बर्दाश्त नहीं है, इसलिए भारत ने चीन के प्रोजेक्ट पर आपत्त्ति जताई.

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC)

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग कहती हैं कि शक्सगाम घाटी को लेकर 1960 में चीन और पाकिस्तान के बीच समझौता हुआ था, जिसके तहत दोनों देशों ने घाटी से लगती अपनी सीमाएं तय की और एक आर्थिक सहयोग परियोजना पर काम करने की सहमति बनाई थी, जिसका मकसद दोनों देशों के व्यापार संबंधों को बढ़ावा देना और दोनों देशों की जनता का विकास करना होगा.

माओ निंग ने बताया कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) इसकी समझौते का हिस्सा है, जो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का ड्रीम प्रोजेक्ट भी है. साल 2013 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट पर करीब 5 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसके तहत चीन के शिंजियांग स्टेट से पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक सड़क बनाई जाएगी, जिस पर कई बंदरगाह, रेलवे पुलि और ऊर्जा प्रोजेक्ट्स भी लगे होंगे.

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चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) से चीन की पहुंच अरब सागर और हिंद महासागर तक हो जाएगी. मलक्का की खाड़ी से आने वाले क्रूड ऑयल के लिए 16000 किलोमीटर लंबा रास्ता सिर्फ 5000 किलोमीटर रह जाएगा. ग्वादर पोर्ट पर चीन का नेवी बेस है. ऐसे में कॉरिडोर बनने के बाद चीन के लिए अपने नौसैनिक बेड़े तक रिपेयरिंग और मेंटेनेंस की सुविधाएं पहुंचाना संभव हो जाएगा.

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CPEC को लेकर भारत की प्रतिक्रिया

गत 9 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का विरोध किया था और इसे मान्यता नहीं देने का ऐलान किया था.विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दोहराया था कि शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है और पहले पाकिस्तान फिर चीन ने इस पर अवैध कब्जा किया हुआ है. भारत कॉरिडोर प्रोजेक्ट को मान्यता इसलिए भी नहीं देगा, क्योंकि इसके जरिए चीन पाकिस्तान के मिलकर भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है.

रणधीर जायसवाल ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारत का इलाका है और चीन ने इस पर अवैध कब्जा किया हुआ है. वहीं भारत CPEC प्रोजेक्ट को इसलिए भी मान्यता नहीं देगा, क्योंकि चीन का कॉरिडोर पाकिस्तान तक बनेगा और यह भारत के उस इलाके से गुजरेगा, जिस पर पाकिस्तान ने जबरदस्ती और अवैध तरीके से कब्जा किया हुआ है. पाकिस्तान और चीन दोनों को बताया जा चुका है कि लद्दाख और जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन दोनों देशों को यह बात आज तक समझ नहीं आई.

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कश्मीर मुद्दे पर क्या कहता है चीन?

बता दें कि चीन का कहना है कि उसे अपने इलाके में कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का अधिकार है. इससे न तो किसी को आपत्ति होनी चाहिए और न ही इस पर किसी को सवाल उठाने का हक है. रही बात कश्मीर के मुद्दे की तो इस पर चीन का रुख पहले जैसा ही रहेगा. चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते और CPEC का भारत-पाकिस्तान कश्मीर विवाद पर चीन के रुख से कोई संबंध नहीं है. पहले भी कहा है और अभी कहते हैं कि POK का मुद्दा भारत पाकिस्तान को बातचीत करके सुलझाना चाहिए.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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