---विज्ञापन---

दुनिया angle-right

क्या है शक्सगाम घाटी विवाद? आमने-सामने क्यों हैं चीन-भारत… पाकिस्तान से कैसे है इसका लिंक

Shaksgam Valley Dispute: भारत और चीन के बीच शक्सगाम घाटी का विवाद फिर से ताजा हो गया है, जिसका सीधा कनेक्शन पाकिस्तान से भी है. शक्सगाम घाटी जम्मू-कश्मीर में है, जिस पर चीन अवैध कब्जा करके उसे होते हुए एक कॉरिडोर पाकिस्तान तक जाने के लिए बना रहा है.

---विज्ञापन---

Shaksgam Valley Dispute: भारत और पाकिस्तान के बीच जहां POK को लेकर विवाद है, वहीं भारत और चीन के बीच भी लद्दाख समेत कई जगहों को लेकर विवाद है. इन्हीं जमीनी विवादों में से एक विवाद जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी को लेकर भी है, जिसका कनेक्शन चीन और पाकिस्तान दोनों से है. आजादी के बाद पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी पर कब्जा कर लिया था, जिसे बाद में पाकिस्तान ने चीन को दे दिया और भारत का कहना है कि चीन ने इस घाटी पर अवैध कब्जा किया हुआ है.

यह भी पढ़ें: दोस्ती की नई शुरुआत! 5 साल में पहली बार चीन शुरू करने जा रहा है ये काम, भारतीयों को मिलेगा फायदा

---विज्ञापन---

अब सुर्खियों में क्यों आया है घाटी विवाद?

बता दें कि ताजा विवाद शक्सगाम घाटी के रास्ते चीन से पाकिस्तान तक बन रहे कॉरिडोर के चलते छिड़ा है. चीन ने जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी को अपनी जमीन बताते हुए दावा किया है कि पाकिस्तान तक घाटी के रास्ते सड़क वह अपने इलाके में बना रहा है, जबकि वह सड़क POK के गिलगिट बाल्टिस्तान से निकलेगी, जो भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है. दूसरी तरफ, इस सड़क का सीधा कनेक्शन पाकिस्तान से है, जो भारत को बर्दाश्त नहीं है, इसलिए भारत ने चीन के प्रोजेक्ट पर आपत्त्ति जताई.

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC)

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग कहती हैं कि शक्सगाम घाटी को लेकर 1960 में चीन और पाकिस्तान के बीच समझौता हुआ था, जिसके तहत दोनों देशों ने घाटी से लगती अपनी सीमाएं तय की और एक आर्थिक सहयोग परियोजना पर काम करने की सहमति बनाई थी, जिसका मकसद दोनों देशों के व्यापार संबंधों को बढ़ावा देना और दोनों देशों की जनता का विकास करना होगा.

---विज्ञापन---

माओ निंग ने बताया कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) इसकी समझौते का हिस्सा है, जो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का ड्रीम प्रोजेक्ट भी है. साल 2013 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट पर करीब 5 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसके तहत चीन के शिंजियांग स्टेट से पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक सड़क बनाई जाएगी, जिस पर कई बंदरगाह, रेलवे पुलि और ऊर्जा प्रोजेक्ट्स भी लगे होंगे.

यह भी पढ़ें: भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा होगी और मजबूत, ITBP बनाएगी 10 ऑल-वूमेन बॉर्डर पोस्ट

---विज्ञापन---

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) से चीन की पहुंच अरब सागर और हिंद महासागर तक हो जाएगी. मलक्का की खाड़ी से आने वाले क्रूड ऑयल के लिए 16000 किलोमीटर लंबा रास्ता सिर्फ 5000 किलोमीटर रह जाएगा. ग्वादर पोर्ट पर चीन का नेवी बेस है. ऐसे में कॉरिडोर बनने के बाद चीन के लिए अपने नौसैनिक बेड़े तक रिपेयरिंग और मेंटेनेंस की सुविधाएं पहुंचाना संभव हो जाएगा.

CPEC को लेकर भारत की प्रतिक्रिया

गत 9 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का विरोध किया था और इसे मान्यता नहीं देने का ऐलान किया था.विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दोहराया था कि शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है और पहले पाकिस्तान फिर चीन ने इस पर अवैध कब्जा किया हुआ है. भारत कॉरिडोर प्रोजेक्ट को मान्यता इसलिए भी नहीं देगा, क्योंकि इसके जरिए चीन पाकिस्तान के मिलकर भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है.

---विज्ञापन---

रणधीर जायसवाल ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारत का इलाका है और चीन ने इस पर अवैध कब्जा किया हुआ है. वहीं भारत CPEC प्रोजेक्ट को इसलिए भी मान्यता नहीं देगा, क्योंकि चीन का कॉरिडोर पाकिस्तान तक बनेगा और यह भारत के उस इलाके से गुजरेगा, जिस पर पाकिस्तान ने जबरदस्ती और अवैध तरीके से कब्जा किया हुआ है. पाकिस्तान और चीन दोनों को बताया जा चुका है कि लद्दाख और जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन दोनों देशों को यह बात आज तक समझ नहीं आई.

यह भी पढ़ें: भारत-चीन विवाद पर बनीं 4 फिल्में, 1 रही हिट, क्या ‘120 बहादुर’ बदल पाएगी 60 साल का इतिहास?

---विज्ञापन---

कश्मीर मुद्दे पर क्या कहता है चीन?

बता दें कि चीन का कहना है कि उसे अपने इलाके में कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का अधिकार है. इससे न तो किसी को आपत्ति होनी चाहिए और न ही इस पर किसी को सवाल उठाने का हक है. रही बात कश्मीर के मुद्दे की तो इस पर चीन का रुख पहले जैसा ही रहेगा. चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते और CPEC का भारत-पाकिस्तान कश्मीर विवाद पर चीन के रुख से कोई संबंध नहीं है. पहले भी कहा है और अभी कहते हैं कि POK का मुद्दा भारत पाकिस्तान को बातचीत करके सुलझाना चाहिए.

First published on: Jan 14, 2026 01:17 PM

End of Article

About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola