ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर के बाद दुनिया को बड़ा झटका लगा है। क्योंकि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस के व्यापार की शर्तें तय कर दी हैं। रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी TASS ने ईरानी सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान ने होमुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स वसूलना शुरू कर दिया है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस के टैंकरों की आवाजाही की संख्या सीमित कर दी है। ईरान के इस फैसले का वैश्विक ऊर्जा व्यापार पर असर पड़ सकता है।
चीन ने अमेरिका और ईरान में कैसे कराया सीजफायर, क्या है 26 फोन कॉल का राज? 3 पॉइंट में जानें मामला
होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही शर्तों के अनुसार होगी
बता दें कि ईरान सरकार ने ईरान रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को समुद्री जहाजों से टोल टैक्स वसूलने के लिए तैनात कर दिया है। जिन्हें निर्देश दिए गए हैं कि होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही अब शर्तों के अनुसार होगी। अब होर्मुज स्ट्रेट को वही क्रॉस कर पाएगा जो टोल टैक्स भरकर मंजूरी लेगा। वहीं अब से पहले जहां रोजाना करीब 140 जहाज होर्मुज से गुजरते थे, वहीं अब सिर्फ 15 जहाजों को ही अनुमति मिलेगी, यानी अब होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही भी सीमित रहेगी।
होर्मुज स्ट्रेट को ईरान कमाई का जरिया बनाएगा
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने एक बयान जारी किया है। उन्होंने पूरी दुनिया को साफ-साफ संदेश दिया है कि अब ईरान होर्मुज स्ट्रेट को न सिर्फ कंट्रोल करेगा, बल्कि इसे कमाई का जरिया बनाएगा। इसकी सुरक्षा को और टाइट किया जाएगा, वहीं अब इससे गुजरने वाले जहाजों से एक बैरल तेल पर 1 अमेरिकी डॉलर की टोल फीस वसूली जाएगी। क्रिप्टोकरेंसी में फीस का भुगतान करना होगा। समझ लीजिए कि अब ईरान और होर्मुज स्ट्रेट दोनों जंग से पहले जैसे नहीं रहे।
अमेरिका का ईरान संग मिलकर कंट्रोल का दावा
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि होर्मुज स्ट्रेट को अब अमेरिका और ईरान मिलकर कंट्रोल करेंगे। जहाजों से वसूली भी दोनों देश मिलकर कर रहे हैं, जिसका शेयर दोनों में बंटेगा। अमेरिका के सहयोगी यूरोपीय देश बताएंगे कि वे होर्मुज की सुरक्षा करने में अमेरिका की मदद कैसे करेंगे? बता दें कि ईरान के इस फैसले से अरब देशों से तेल-गैस लेने वाले देशों में पेट्रोल-डीजल और गैस महंगी हो सकती है, यानी वैश्विक के साथ देशों की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।










